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'अपार्टमेंट के कॉमन एरिया पर सभी का हक'
टीम डिजिटल/इलाहाबाद
Updated Tue, 26 Nov 2013 12:54 AM IST
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बहुआवासीय योजनाओं में फ्लैट लेकर रहने वालों का अपार्टमेंट के कॉमन एरिया पर भी स्वामित्व होगा।
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अपार्टमेंट के कॉमन एरिया जैसे पार्किंग, पार्क, स्वीमिंग पूल, स्कूल आदि से छेड़छाड़ भी फ्लैट मालिकों और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना नहीं किया जा सकेगा।
इन सुविधाओं का स्थानांतरण या विभाजन भी नहीं किया जा सकता है।
यही नहीं, प्रमोटर विज्ञापन में दिखाए गए प्लान को बाद में अपनी मर्जी से और व्यावसायिक लाभ के लिए बदल नहीं सकता।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह व्यवस्था यूपी अपार्टमेंट एक्ट-2010 की विस्तृत व्याख्या करते हुए दी।
न्यायमूर्ति सुनील अंबवानी और न्यायमूर्ति भारत भूषण की खंडपीठ ने कहा कि ग्रुप हाउसिंग के बढ़ते चलन के कारण डेवलपर्स और फ्लैट स्वामियों के मध्य विवाद का बढ़ना स्वाभाविक है।
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विवाद होने की स्थिति में अदालतों पर मुकदमों का बोझ बढ़ जाएगा। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि प्रत्येक अपार्टमेंट में एक रजिस्टर्ड सोसाइटी गठित की जाए और इस प्रकार के विवादों को वहां सुलझाया जाए।
प्रमोटर और फ्लैट मालिकों का यह संयुक्त दायित्व है कि वह एसोसिएशन का पंजीकरण कराएं। यदि विवाद नहीं सुलझता है तो पक्षकार सक्षम प्राधिकारी के पास अपना विवाद ले जाएं।
कोर्ट ने सक्षम प्राधिकारी को भी निर्देश दिया है कि विवादों का सर्वप्रथम मध्यस्थता से निस्तारण करने का प्रयास किया जाए।
सोसाइटी के गठन हेतु मॉडल बाई लॉज को अपनाया जाए। यह 90 दिन में पूरा कर लिया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने ग्रुप हाउसिंग सोसाइटीज के तमाम विवादों का एक साथ निस्तारण करते हुए कहा है कि महानगरों विशेषकर नोएडा और गाजियाबाद जैसे नगरों जो राजधानी के करीब हैं बड़ी संख्या में आवासीय योजनाएं निर्माणाधीन हैं।
इनमें रहने वालों को सामान्य उपयोग के क्षेत्र पर एक समान अधिकार देना आवश्यक है। यूपी अपार्टमेंट एक्ट 2010 में प्रामोटरों को जिम्मेदारियों से बांधने की व्यवस्था को कोर्ट ने पूरी तरह से वैध ठहराया है।
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