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गैंगरेप के आरोपी गायत्री को जमानत यानी न्याय का गर्भपात, जज ने की गलती: हाईकोर्ट

Sat, 27 May 2017 05:42 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Sat, 27 May 2017 05:42 PM IST
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high court cancelled bail order of gayatri prajapati
डेमो
हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सामूहिक दुराचार मामले में गायत्री प्रजापति को निचली अदालत के जज ओपी मिश्रा से मिली जमानत के आदेश को शुक्रवार को रद्द कर दिया। जस्टिस अमरेश्वर प्रताप साही ने निचली अदालत के 25 अप्रैल के आदेश को गलत और जल्दबाजी में लिया गया निर्णय बताया।
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कहा, इससे न्याय का गर्भपात और नाश हुआ है। इससे पहले हाईकोर्ट ने जमानत के आदेश पर स्टे लगा दिया था। इसकी वजह से गायत्री प्रजापति अभी भी जेल में है। वहीं, जमानत पर रिहा हुए दो अन्य आरोपियों पीआरओ विकास वर्मा व प्रतिनिधि अमरेंद्र सिंह उर्फ पिंटू सिंह को बाद में सरेंडर करना पड़ा था।
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राज्य सरकार ने इस मामले में 25 अप्रैल को निचली अदालत से दी गई जमानत के खिलाफ हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा, निचली अदालत के लिए यह जरूरी था कि आरोपियों की बेल अर्जी में दिए गए तथ्यों का ध्यान रखती।
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आरोपियों ने बेल अर्जी में गलत जानकारियां दी और बताया, उनके खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। मगर, अब यह साफ हो चुका है कि आपराधिक रिकॉर्ड है। आरोपियों को जमानत देने से पहले सरकारी वकील को अगर मौका दिया गया होता तो वे आपराधिक रिकॉर्ड सामने रखते।

...इसलिए जमानत को दी चुनौती 

high court cancelled bail order of gayatri prajapati
गायत्री प्रसाद प्रजाप‌त‌ि - फोटो : demo pic
वहीं, 24 अप्रैल को आई बेल अर्जी पर अगली ही तारीख पर निर्णय कर लिया गया। निचली अदालत ने बड़ी गलती की है। संबंधित जज ओपी मिश्रा 30 अप्रैल को रिटायर्ड होने वाले थे, यह तथ्य भी बताता है कि कानून के पथ की उपेक्षा करते हुए बेल अर्जी सुनी गई। इस तरह निचली अदालत अपने क्षेत्र से कहीं आगे निकल गई।

सरकार की चुनौती याचिका के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एक महिला और उसकी बेटी से गैंगरेप मामले में तीनों आरोपियों पर आईपीसी व पॉक्सो एक्ट के विभिन्न धाराओं में लखनऊ के गौतमपल्ली थाने में 18 फरवरी को केस दर्ज कराया गया था।

हाईकोर्ट में प्रदेश के अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कहा था कि अगर आरोपियों को जमानत दी जाती है तो वे पीड़िताओं और गवाहों को डरा-धमका सकते हैं। इतना ही नहीं, सूबे के पूर्व कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रजापति सुबूतों से छेड़छाड़ करवाते हुए ट्रायल को प्रभावित कर सकते हैं।

वह इतने शक्तिशाली हैं कि अपनी गिरफ्तारी को एक महीने तक टलवाते रहे, एफआईआर भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हो सकी। इससे पहले पीड़िताओं ने डीजीपी को भी शिकायत दी थीं, लेकिन इस मामले में सीबीसीआईडी से जांच करवा कर उल्टे पीड़िता और उसके पति पर ब्लैकमेलिंग का चार्ज लगाया जाने लगा। वहीं, निचली अदालत में जज ने गलत तथ्यों के आधार पर आरोपियों को जमानत दे दी थी।
 
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