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69 हजार शिक्षक भर्ती: एक अंक के विवाद में सरकार को जवाब के लिए 10 दिन का समय
Thu, 04 May 2023 02:27 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 04 May 2023 02:27 PM IST
सार
69 हजार शिक्षक भर्ती में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए यूपी सरकार से पूरा ब्यौरा तलब किया है। हलफनामा पेश न होने पर अफसरों को तलब किया जाएगा।
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- फोटो : Social Media
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विस्तार
हाईकोर्ट ने 69 हजार शिक्षक भर्ती में एक अंक विवाद मामले में दाखिल अवमानना याचिका पर सरकार को ब्यौरा पेश करने का दस दिन का समय दिया है। साथ ही सख्त रुख अपनाते हुए चेताया कि पहले के आदेश का पालन न होने पर कोर्ट पक्षकार अफसरों को तलब करने पर विवश हो सकता है। मामले की अगली सुनवाई 10 दिन बाद होगी। अवमानना याचिका रिट कोर्ट का आदेश न पालन होने के खिलाफ दायर की गई है।
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इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बेसिक शिक्षा के प्रमुख सचिव दीपक कुमार व अन्य पक्षकारों से रिट कोर्ट के 20 दिसंबर, 2021 के फैसले के तहत कार्रवाई का ब्यौरा मांगा था। पर बीते मंगलवार को फिर सरकार की ओर से इसे पेश नहीं किया गया। सरकारी वकील ने 10 दिन का और समय मांगा, जिसे आखिरी मौके के रूप में कोर्ट ने मंजूर कर लिया। न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन की एकल पीठ ने अपना आदेश अभ्यर्थी सुरंगमा शुक्ला की अवमानना याचिका पर दिया।
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याची का कहना था कि 20 दिसंबर, 2021 को शैक्षिक परिभाषा वाले प्रश्न पर रिट कोर्ट ने न्यायालय की शरण में आए अभ्यर्थियों को एक अतिरिक्त अंक प्रदान करते हुए मेरिट के अनुसार नियुक्ति का आदेश दिया था। इसके करीब साल भर बाद भी आदेश का अनुपालन नहीं हुआ। जबकि इस फैसले के खिलाफ सरकार की विशेष अनुमति याचिका खारिज होने के बाद रिट कोर्ट का निर्णय पुष्ट हो गया है। इससे करीब 1000 अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में है। इसे रिट कोर्ट के आदेश की अवहेलना कहते हुए यह अवमानना याचिका दाखिल की गई।
उधर, सरकारी वकील ने कहा था कि विभागीय पक्षकार इन अभ्यर्थियों को एक अतिरिक्त अंक प्रदान करने की प्रक्रिया में थे। लेकिन इसी बीच बीते 13 मार्च को सवा सौ याचिकाओं फैसला देेते हुए रिट कोर्ट ने 1 जून, 2020 की चयन सूची को पुनरीक्षित किए जाने का आदेश दिया। इसमें याची का भी सरोकार जुड़ा है। ऐसे में, सरकारी वकील ने आगे अपनाई जाने वाली कार्रवाई को बताने के लिए 10 दिन का समय दिए जाने का आग्रह किया था। इस पर कोर्ट ने बेसिक शिक्षा के प्रमुख सचिव दीपक कुमार व अन्य पक्षकारों से रिट कोर्ट के 20 दिसंबर, 2021 के फैसले के तहत प्रस्तावित कार्रवाई का ब्योरा मांगा था।