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69,000 सहायक शिक्षक भर्ती का मामला : हाईकोर्ट ने छेड़छाड़ के संदेह पर सरकार से मांगा स्पष्टीकरण
Mon, 18 Feb 2019 10:59 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Mon, 18 Feb 2019 10:59 PM IST
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Lucknow High Court
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प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में 69000 सहायक शिक्षकों के पदों पर भर्ती मामले में उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने सरकार से स्पष्टीकरण तलब किया है। अदालत ने राज्य सरकार से यह सफाई तब मांगी जब सोमवार को परीक्षा के अर्हता अंक तय करे जाने के सरकारी आदेश की मूल पत्रावली का अवलोकन किया गया। अदालत ने इस फाईल में एक पन्ने पर दूसरा पन्ना चिपका पाए जाने पर हैरत जताते सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है और कहा है कि न्यायालय इस फाइल के संबंध में फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद लेने पर भी विचार सकता है। मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी।
न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान की पीठ के समक्ष चल रही सुनवाई के दौरान सोमवार को जब सरकार द्वारा परीक्षा के अर्हता अंक तय करे जाने की मूल फाईल पेश की गई तो अदालत ने पाया कि फाइल के एक पन्ने को दूसरे पन्ने के ऊपर चिपकाया गया है। पाया गया कि नीचे चिपके पन्ने पर कुछ नोटिंग है जो पढ़ने में नहीं आ रही थी। अदालत ने जब फाईल में छेड़छाड़ करे जाने का संदेह जताते हुए राज्य सरकार की तरफ से पेश अधिवक्ताओं से इस बाबत पूछा तो उन्होंने फाईल में किसी प्रकार की छेड़छाड़ करे जाने से इंकार किया।
अधिवक्ताओं की इस सफाई पर अदालत ने कहा कि सरकार को एक मौका दिया जाता है कि अगली सुनवाई पर इसका स्पष्टीकरण दिया जाए और उसी दिन अदालत इस फाइल के सिलसिले में फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद लेने पर भी विचार कर सकती है।
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न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान की पीठ के समक्ष चल रही सुनवाई के दौरान सोमवार को जब सरकार द्वारा परीक्षा के अर्हता अंक तय करे जाने की मूल फाईल पेश की गई तो अदालत ने पाया कि फाइल के एक पन्ने को दूसरे पन्ने के ऊपर चिपकाया गया है। पाया गया कि नीचे चिपके पन्ने पर कुछ नोटिंग है जो पढ़ने में नहीं आ रही थी। अदालत ने जब फाईल में छेड़छाड़ करे जाने का संदेह जताते हुए राज्य सरकार की तरफ से पेश अधिवक्ताओं से इस बाबत पूछा तो उन्होंने फाईल में किसी प्रकार की छेड़छाड़ करे जाने से इंकार किया।
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अधिवक्ताओं की इस सफाई पर अदालत ने कहा कि सरकार को एक मौका दिया जाता है कि अगली सुनवाई पर इसका स्पष्टीकरण दिया जाए और उसी दिन अदालत इस फाइल के सिलसिले में फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद लेने पर भी विचार कर सकती है।
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अदालत ने अर्हता अंक तय करे जाने की मूल फाईल की थी तलब
परीक्षा के अर्हता अंक तय करे जाने के सरकार के आदेश पर कई याचियों की ओर से यह दलील दी गई थी कि सरकार ने जरूरी प्रक्रियाओं का पालन करे बगैर ही 7 जनवरी का शासनादेश जारी कर दिया गया है। न्यायालय ने इस पर राज्य सरकार को अर्हता अंक तय करे जाने के फैसले वाली मूल फाइल पेश करने को कहा था। अदालत ने कहा था कि इससे यह पता लग सकेगा कि यह निर्णय किस प्रकार लिया गया। अदालत के इस आदेश पर सरकार की ओर से मूल फाइल पेश की गई जिसके अवलोकन के दौरान न्यायालय ने पाया की पेज नंबर 42 के ऊपर पेज नंबर 43 चिपकाया गया है। कोर्ट ने पाया कि पेज नंबर 42 पर दर्ज नोटिंग उस पर दूसरा पेज चिपका होने की वजह से पढ़ने में नहीं आ रहा था। इस पर न्यायालय ने कहा कि कोर्ट की यह जानने में उत्सुकता है कि पेज नंबर 42 क्या है व उस पर क्या लिखा है। अदालत ने यह भी पूछा कि ऐसा क्यों किया गया।
सरकार की तरफ से पूरी हुई बहस
अंतिम दौर में चल रही बहस में सोमवार को राज्य सरकार की तरफ से बहस पूरी हो गई। सरकार की तरफ से अदालत में बहस कर रह वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत चंद्रा ने अपनी बहस में कटआफ मार्क्स को लेकर सरकार के फैसले को सही ठहराया। इस मामले में छह जनवरी को परीक्षा होने के बाद सरकार ने सात जनवरी को अर्हता अंक तय करे जाने के आदेश दिए थे। इसका शिक्षा मित्रों ने विरोध किया था और दलील दी थी कि अगर सरकार को अर्हता अंक तय करने हैं तो पूर्व में हुई परीक्षा के समान करे। सरकार की तरफ से बहस पूरा होने के बाद अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी तय कर दी। अदालत ने इस तिथि पर याचियों की तरफ से व अन्य पक्षकारों की ओर से वकीलों को भी बहस करने का मौका दिया है।
सरकार की तरफ से पूरी हुई बहस
अंतिम दौर में चल रही बहस में सोमवार को राज्य सरकार की तरफ से बहस पूरी हो गई। सरकार की तरफ से अदालत में बहस कर रह वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत चंद्रा ने अपनी बहस में कटआफ मार्क्स को लेकर सरकार के फैसले को सही ठहराया। इस मामले में छह जनवरी को परीक्षा होने के बाद सरकार ने सात जनवरी को अर्हता अंक तय करे जाने के आदेश दिए थे। इसका शिक्षा मित्रों ने विरोध किया था और दलील दी थी कि अगर सरकार को अर्हता अंक तय करने हैं तो पूर्व में हुई परीक्षा के समान करे। सरकार की तरफ से बहस पूरा होने के बाद अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी तय कर दी। अदालत ने इस तिथि पर याचियों की तरफ से व अन्य पक्षकारों की ओर से वकीलों को भी बहस करने का मौका दिया है।