PIL की 'नीयत' पर हाईकोर्ट ने उठाया सवाल
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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने निजी लाभ के लिए पीआईएल दायर किए जाने पर सख्त
रुख अख्तियार कर याची पर 50 हजार रुपये हर्जाना ठोका है।
कोर्ट ने ताकीद की
कि याची को महीने भर में हर्जाने की यह रकम हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार के पास
जमा करनी होगी, अन्यथा इसकी भू-राजस्व के तहतवसूली की जाएगी।
न्यायमूर्ति
इम्तियाज मुर्तजा एवं न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने
बुधवार को यह फैसला व आदेश रामप्रताप राय की पीआईएल पर सुनाया।
इसमें याची
ने 21 मई 2005 के उस शासनादेश को रद्द किए जाने की गुजारिश की थी, जिसके
तहत एक पक्षकार को राजधानी में सुल्तानपुर रोड पर हाईटेक टाउनशिप विकसित
करने के लिए चुना गया था।
साथ ही आवंटियों को आस्था अपार्टमेंट में जमीन व
फ्लैटों का कब्जा सौंपे जाने का भी आग्रह किया गया था। अदालत
ने पाया कि याची व एक पक्षकार के बीच सिविल कोर्ट में आपसी विवाद लंबित
है।
इसके लंबित रहने के दौरान याची ने यह पीआईएल दायर कर हाईटेक टाउनशिप
विकसित करने संबंधी शासनादेश को रद्द किए जाने का आग्रह किया।
कोर्ट ने
टिप्पणी की कि यह कुछ और नहीं, बल्कि निजी फायदे के लिए अदालती प्रक्रिया
का दुरुपयोग करने का प्रयास है।