फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Hepatitis day today: Medicine department of KGMU gives a report based on study.

खुलासा: असुरक्षित शेविंग कराने से भी हेपेटाइटिस-बी का खतरा, पांच साल में आए संक्रमण के मामलों में हुआ अध्ययन

Fri, 28 Jul 2023 12:23 PM IST
ishwar ashish सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ
सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Fri, 28 Jul 2023 12:23 PM IST
सार

केजीएमयू के मेडिसिन विभाग में पांच साल में आए संक्रमितों पर हुए अध्ययन को जर्नल ऑफ क्लीनिकल एंड एक्सपेरिमेंटल हेपेटोलॉजी में प्रकाशित किया गया जिसमें पाया गया कि कुल मरीजों में से 52 फीसदी को यह संक्रमण सड़क के किनारे या फिर असुरक्षित तरीके से शेविंग कराने से हुआ। पढ़ें रिपोर्ट: 

विज्ञापन
Hepatitis day today: Medicine department of KGMU gives a report based on study.
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Getty Images

विस्तार

हेपेटाइटिस-बी के 50 फीसदी मरीज बगैर किसी लक्षण के होते हैं। शुरुआती दौर में इसके संक्रमण की जानकारी होने पर इलाज में आसानी होती है। देरी होने पर हेपेटाइटिस-बी लिवर से संबंधित गंभीर रोग का कारण बनता है और संक्रमित की जान भी जा सकती है। केजीएमयू के मेडिसिन विभाग में हुए अध्ययन में सामने आया है कि कुल मरीजों में से 52 फीसदी ऐसे थे, जिनके संक्रमण की वजह असुरक्षित तरीके से शेविंग (दाढ़ी बनाना) कराना रही। इस अध्ययन को जर्नल ऑफ क्लीनिकल एंड एक्सपेरिमेंटल हेपेटोलॉजी में प्रकाशित किया गया है।

विज्ञापन


मुख्य अध्ययनकर्ता प्रो. अजय कुमार पटवा ने बताया कि मेडिसिन विभाग में यह अध्ययन वर्ष 2014 से 2019 के बीच आए 1508 मरीजों पर किया गया। इस अध्ययन के अनुसार कुल मरीजों में से 52 फीसदी को यह संक्रमण सड़क के किनारे या फिर असुरक्षित तरीके से शेविंग कराने से हुआ। इसके अलावा सर्जरी से 34 फीसदी, दांत निकलवाने से 25 फीसदी और 16 फीसदी को टैटू बनवाने से, 10 फीसदी को खून चढ़वाने तथा 0.2 फीसदी लोगों को नशीली दवाएं लेने के दौरान हेपेटाइटिस-बी का संक्रमण हुआ। ये सभी वर्ग हेपेटाइटिस-बी के लिए उच्च जोखिम वर्ग में आते हैं।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें - प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में पांच लाख रामभक्तों के आने की उम्मीद, पीएम मोदी होंगे मुख्य यजमान
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें - यूपी में महंगी होगी बिजली: 1 रुपए यूनिट तक बढ़ सकते हैं बिजली के दाम, लगेगा अतिरिक्त ईधन अधिभार


इससे संक्रमित व्यक्तियों में लक्षण काफी देर से दिखते हैं, इसलिए समय से पहचान के लिए इन उच्च जोखिम वर्ग के व्यक्तियों को अपनी जांच खुद ही करवा लेनी चाहिए। कुल संक्रमित व्यक्तियों में से 50 फीसदी लोग सामान्य दवाओं से या कई बार अपने आप छह महीने में ठीक हो जाते है। हालांकि इसके बावजूद ऐसे रोगी अन्य व्यक्तियों को संक्रमित कर सकते हैं।

अन्य बीमारी के बाद हुई जांच में 40 फीसदी को पता चला संक्रमण
अध्ययन के दौरान देखा गया कि इस बीमारी के कुल रोगियों में से 40 फीसदी ऐसे थे, जिनको दूसरी बीमारी के दौरान हुई खून की जांच में इस संक्रमण का पता चला। 23 फीसदी रोगी लिवर संबंधी बीमारी की जांच से, सर्जरी से पहले हुई जांच में 10 फीसदी, गर्भावस्था की जांच में 6 फीसदी, वीजा क्लीयरेंस में 4 फीसदी, फेमिली स्क्रीनिंग में 3 फीसदी, रक्तदान के दौरान 2 फीसदी और हेल्थ कैंप में 0.2 फीसदी में हेपेटाइटिस-बी की पुष्टि हुई।

बनाया गया चिकित्सीय निर्देशों का सेट-
इस अध्ययन की सबसे बड़ी विशेषता चिकित्सकों की सुविधा के लिए थेरेप्यूटिक एल्गोरिद्म तैयार करना है। इस एल्गोरिद्म में चिकित्सीय निर्देशों का सेट है। इस सेट के माध्यम से चिकित्सक हेपेटाइटिस-बी के रोगियों की जांच, पहचान, इलाज और फॉलोअप कर सकते हैं। इस अध्ययन में डॉ. अजय पटवा के साथ ही अमरदीप, वीरेंद्र आतम, प्रतिष्ठा मिश्रा, सुमित रुंगटा, अनिल गंगवार, अंकुर यादव, कमलेश के गुप्ता, भास्कर अग्रवाल, संजीव के वर्मा और अमित गोयल शामिल रहे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed