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सबको पता था, सब चुप थे, बर्बाद कौन हुआ, अब कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति
Tue, 01 Oct 2019 11:07 AM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 01 Oct 2019 11:07 AM IST
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फाइल फोटो
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अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी सिंजेंटा ने वर्ष-2018 में ही धान की घटिया हाईब्रीड प्रजाति यूपी में बेचने की तैयारी कर ली थी। तब रामपुर, मुरादाबाद और संभल के 26 किसानों के खेतों में एलपी-17059 का प्रदर्शन करके कागजी खानापूरी करने कोशिश की थी। लेकिन कृषि विभाग के अधिकारियों ने इन किसानों के यहां जाकर उत्पादन संबंधी दावों की सत्यता जानने का प्रयास तक नहीं किया।
लाइसेंस जारी होने से पहले ही कंपनी ने यूपी में यह प्रजाति खपाना शुरू कर दिया। इसकी जानकारी के बावजूद कृषि अधिकारियों ने मुख्यालय या शासन को लिखित में जानकारी भी नहीं दी। अब इसका खामियाजा किसान भुगत रहे हैं। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ रामपुर के जिला कृषि अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
अगर कंपनी की ओर से कृषि विभाग को उपलब्ध कराई गई जानकारी को सही माना जाए तो उसने मुरादाबाद, रामपुर, बरेली और बदायूं के अलावा रुद्रपुर (उत्तराखंड) के किसानों को इस प्रजाति के 12274 किलोग्राम बीज की आपूर्ति की गई। यह बीज दो हजार एकड़ से ज्यादा रकबे में इस्तेमाल के लिए पर्याप्त है।
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यूपी के इन चार जिलों में ही करीब 10 हजार किसानों ने इस बीज का इस्तेमाल किया। पश्चिमी यूपी और अवध क्षेत्र में भी इस बीज के इस्तेमाल की आशंका है। हालांकि, इस बाबत अब तक कोई अधिकृत आंकड़ा कृषि विभाग के पास नहीं है। विभाग सिर्फ कंपनी की ओर से मुहैया कराई गई सूचना को ही सही मानकर चल रहा है। जानकारों का कहना है कि मामले की गहन जांच हो तो बिना वैध अनुमति मुनाफे का पूरा कुचक्र सामने आ सकता है। प्रभावित होने वाले किसानों की संख्या कहीं ज्यादा हो सकती है।
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लाइसेंस जारी होने से पहले ही कंपनी ने यूपी में यह प्रजाति खपाना शुरू कर दिया। इसकी जानकारी के बावजूद कृषि अधिकारियों ने मुख्यालय या शासन को लिखित में जानकारी भी नहीं दी। अब इसका खामियाजा किसान भुगत रहे हैं। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ रामपुर के जिला कृषि अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
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अगर कंपनी की ओर से कृषि विभाग को उपलब्ध कराई गई जानकारी को सही माना जाए तो उसने मुरादाबाद, रामपुर, बरेली और बदायूं के अलावा रुद्रपुर (उत्तराखंड) के किसानों को इस प्रजाति के 12274 किलोग्राम बीज की आपूर्ति की गई। यह बीज दो हजार एकड़ से ज्यादा रकबे में इस्तेमाल के लिए पर्याप्त है।
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यूपी के इन चार जिलों में ही करीब 10 हजार किसानों ने इस बीज का इस्तेमाल किया। पश्चिमी यूपी और अवध क्षेत्र में भी इस बीज के इस्तेमाल की आशंका है। हालांकि, इस बाबत अब तक कोई अधिकृत आंकड़ा कृषि विभाग के पास नहीं है। विभाग सिर्फ कंपनी की ओर से मुहैया कराई गई सूचना को ही सही मानकर चल रहा है। जानकारों का कहना है कि मामले की गहन जांच हो तो बिना वैध अनुमति मुनाफे का पूरा कुचक्र सामने आ सकता है। प्रभावित होने वाले किसानों की संख्या कहीं ज्यादा हो सकती है।
उप निदेशक व जिला कृषि अधिकारी पर अवैध बिक्री रोकने का जिम्मा
नियमानुसार, अनधिकृत प्रजाति के बीज की बिक्री रोकने की जिम्मेदारी जिला कृषि अधिकारी और उप निदेशक कृषि की होती है। सभी को पता था कि जिस समय अप्रैल-मई में सिंजेंटा यह बीज किसानों को बेच रही थी, उस समय उसे इसकी अनुमति नहीं मिली थी। इससे बीज कंपनियों और कृषि विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत को समझा जा सकता है।
लाइसेंस जारी करने से लेकर उत्पाद सूची में नई प्रजाति शामिल कराना भी कोई मुश्किल काम नहीं है। हालांकि, एलपी-17059 वैरायटी को लेकर लखनऊ के जिला कृषि अधिकारी ने खामियां बताते हुए आवेदन पर आपत्ति लगा दी थी। सवाल उठता है कि इन आपत्तियों को दूर कराए बिना सिंजेंटा को बीज बिक्री लाइसेंस इतनी हड़बड़ी में जारी करने की क्या वजह थी।
लापरवाही का अनुमान इससे भी लगा सकते हैं कि हजारों किसान इस प्रजाति का इस्तेमाल करके बर्बाद हो रहे हैं, पर सिर्फ रामपुर के जिला कृषि अधिकारी से ही जवाब-तलब किया गया। अन्य जिलों के अधिकारियों से इस बाबत अभी तक कोई पूछताछ नहीं की गई है।
लाइसेंस जारी करने से लेकर उत्पाद सूची में नई प्रजाति शामिल कराना भी कोई मुश्किल काम नहीं है। हालांकि, एलपी-17059 वैरायटी को लेकर लखनऊ के जिला कृषि अधिकारी ने खामियां बताते हुए आवेदन पर आपत्ति लगा दी थी। सवाल उठता है कि इन आपत्तियों को दूर कराए बिना सिंजेंटा को बीज बिक्री लाइसेंस इतनी हड़बड़ी में जारी करने की क्या वजह थी।
लापरवाही का अनुमान इससे भी लगा सकते हैं कि हजारों किसान इस प्रजाति का इस्तेमाल करके बर्बाद हो रहे हैं, पर सिर्फ रामपुर के जिला कृषि अधिकारी से ही जवाब-तलब किया गया। अन्य जिलों के अधिकारियों से इस बाबत अभी तक कोई पूछताछ नहीं की गई है।