जब अचानक अस्पताल पहुंच गए स्वास्थ्य मंत्री, जानिए क्या हुआ वहां का हाल?
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यूपी सरकार के स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन सोमवार दोपहर अचानक डफरिन अस्पताल पहुंच गए। लगभग सवा घंटे के अपने निरीक्षण के दौरान उन्होंने ओपीडी, इमरजेंसी और अल्ट्रासाउंड कक्ष का निरीक्षण किया।
मरीजों को भीड़ को देखते हुए उन्होंने वहां रेडियोलॉजिस्ट और महिला डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने का आश्वासन दिया। एक डॉक्टर की अनुपस्थित पर नाराजगी जतायी और उसकेखिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद वो ठाकुरगंज में बन रहे 100 बेड के हॉस्पिटल पहुंचे।
वहां एक ही लिफ्ट देखकर अधिकारियों को फटकारा। अस्पताल के उद्घाटन की तिथि दो अक्टूबर तय करते हुए, दूसरी लिफ्ट भी जल्द ही लगाने के निर्देश दिए।
वीरांगना अवंती बाई महिला चिकित्सालय (डफरिन) में सोमवार सुबह से क्वालिटी एश्योरेंस की टीम ने धावा बोला हुआ था कि दोपहर लगभग सवा 12 बजे अचानक चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन भी अधिकारियों केसाथ वहां पहुंच गए। सबसे पहले उन्होंने ओपीडी का निरीक्षण किया।
मौके पर नहीं मिले तीन डॉक्टर
मरीजों की भीड़ देखने के बाद उन्होंने डॉक्टरों की उपस्थिति जांची तो पता चला कि तीन डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं थी। डॉ. लुब्ना सिद्दीकी छह माह की अल्ट्रासाउंड की ट्रेनिंग के लिए छुट्टी पर थी लेकिन बाद में उन्होंने छुट्टी बढ़ा ली थी।
इसकी जानकारी मिलने पर स्वास्थ्य मंत्री ने उनके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके अलावा डॉ. रुचि साहू मातृत्व अवकाश और डॉ. रश्मि वर्मा अर्न लीव (अर्जित अवकाश) पर थी।
स्वास्थ्य मंत्री ने ओपीडी में मरीजों की भीड़ को देखते हुए वहां चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने का आश्वासन दिया। इसके बाद अहमद हसन इमरजेंसी कक्ष में पहुंच गए, वहां की व्यवस्थाओं को जांच को, अधिकतर स्टाफ ड्यूटी पर मिला।
डफरिन अस्पताल में सोमवार सुबह से ही क्वालिटी एश्योरेंस की जांच टीम भी मौजूद थी। इसी के चलते वहां सभी डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल स्टाफ ड्यूटी पर तैनात मिला। यहां तक कि सफाई कर्मचारी तक पूरी वर्दी में थे। इस टीम की ही मौजूदगी का असर था कि चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री को अस्पताल में व्यवस्था चाक-चौबंद मिली।
रेडियोलॉजिस्ट की भी होगी तैनाती
स्वास्थ्य मंत्री इसके बाद अल्ट्रासाउंड कक्ष की तरफ निरीक्षण के लिए पहुंचे। वहां भी उन्हें मरीजों लंबी लाइन लगी मिली। उन्होंने मरीजों से सुविधाओं की जानकारी मांग तो एक गोलागंज से आयी एक महिला ने उन्हें बताया कि वो चार सितंबर को अल्ट्रासाउंड के लिए आई थी।
चार दिन बाद भी उसकी जांच नहीं हो पायी है। उन्होंने वहां तैनात रेडियोलॉजिस्ट डॉ. सोमेश्वर पुरी से भी वार्ता की। मरीजों की वेटिंग के बारे में जानकारी मिलने के बाद एक अल्ट्रासाउंड मशीन और एक अतिरिक्त रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती का आश्वासन दिया। मरीजों और उनके परिवारीजनों के लिए पीने का पानी की उचित व्यवस्था न होने पर भी उन्होंने नाराजगी जतायी।
डफरिन में इस समय 30 डॉक्टर हैं। अस्पताल की सुपरिटेंडेंट इंचार्ज डॉ. मंजुल बहार के अनुसार वर्ष २००० में इस अस्पताल में सभी विशेषज्ञता के 60 डॉक्टर हुआ करते थे।
इन 15 सालों के दौरान डॉक्टरों की संख्या आधी हो गई। जबकि मरीज कई गुना बढ़ गए हैं। हर महीने पांच हजार से अधिक मरीज डफरिन अस्पताल में प्रसव व इलाज के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग से १० महिला डॉक्टर, एक पैथोलॉजिस्ट और एक रेडियोलॉजिस्ट की मांग की है।
एक ही लिफ्ट लगाने पर लगी फटकार
चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन को ठाकुरगंज टीबी अस्पताल परिसर में बन रहे 100 बेड हॉस्पिटल के निर्माण में भारी अनियमितताएं मिली। दो की जगह पर मौके पर एक ही लिफ्ट लगी मिली। इस पर उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगायी। 100 की जगह उन्हें वहां 60 बेड ही मिले।
अल्ट्रासाउंड मशीन के बारे में जानकारी मांगी तो पता चला कि अभी तक उनका पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत आवेदन ही नहीं किया गया है। एक साथ कई अव्यवस्थाएं मिलने पर उन्होंने अधिकारियों को फटकारा। साथ ही दो अक्टूबर को अस्पताल के उद्घाटन की तिथि की घोषणा करते हुए सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए।
अहमद हसन डफरिन अस्पताल के बाद डीजी हेल्थ विजयलक्ष्मी, सीएमओ डॉ.एसएनएस यादव के साथ के साथ वो अचानक वहां पहुंचे थे। दोपहर लगभग 2.30 बजे वहां पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री ने 100 बेड के अस्पताल के लिए बन रहे भवन का निरीक्षण किया। उन्होंने पाया कि वहां एक लिफ्ट तो लगी थी लेकिन दूसरी लिफ्ट के लिए बनी टनल को बंद कर दिया गया था। उन्होंने इसको लेकर अधिकारियों से पूछताछ और फटकार लगायी।
100 बेड के अस्पताल में लगे सिर्फ 60 बेड
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि एक लिफ्ट को बंद करने का किसने आदेश दिया। अस्पताल में एक लिफ्ट खराब हुई तो दूसरी से मरीजों को मदद मिलेगी। इसके बाद उन्होंने वार्डों का निरीक्षण किया तो पता चला कि अभी तक सिर्फ 60 बेड की ही व्यवस्था की गई है।
उन्होंने कहा कि 100 बेड के अस्पताल में सिर्फ 60 बेड क्यों लगे हैं। उन्होंने 40 और बेड भी वहां उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने अल्ट्रासाउंड मशीनों के बारे में जानकारी मांगी तो पता चला कि दो मशीनें अस्पताल को उपलब्ध करा दी गई हैं लेकिन अभी तक उनका पंजीकरण पीसीपीएनडीटी के तहत सीएमओ कार्यालय से नहीं कराया गया था। इसके लिए अधिकारियों को फटकार लगायी गई।
दो अक्टूबर को मिलेगा 100 बेड का अस्पताल
पुराने लखनऊ के निवासियों को दो अक्टूबर (गांधी जयंती) के दिन एक और अस्पताल का तोहफा मिलेगा। ठाकुरगंज में स्थित टीबी अस्पताल परिसर में इसका निर्माण कार्य जारी है। अभी तक ठाकुरगंज से और उसके आगे दुबग्गा आदि के मरीजों को केजीएमयू या बलरामपुर अस्पताल में इलाज के लिए जाना पड़ता था। इस अस्पताल के शुरू होने से मरीजों को काफी राहत मिलेगी।