हाथरस कांड : सुनवाई के दौरान डीएम को अभी तक नहीं हटाने पर कोर्ट ने व्यक्त की नाराजगी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 25 Nov 2020 08:38 PM IST
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प्रदेश के बहुचर्चित हाथरस कांड मामले की इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में बुधवार को सुनवाई हुई। सीबीआई ने अब तक की गई जांच की स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर दी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जिलाधिकारी हाथरस को अभी तक नहीं हटाने को लेकर नाराजगी व्यक्त की। इस पर सरकार की तरफ से कोर्ट में तर्क देते हुए  जवाबी हलफ़नामा  दाखिल किया गया। कोर्ट ने  मामले की अगली सुनवाई 16  दिसंबर को नियत किया है।
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न्यायमूर्ति पंकज मित्थल और न्यायमूर्ति राजन रॉय की खंडपीठ ने  बुधवार को यह आदेश हाथरस मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए दर्ज कराई गई जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। गत  दो नवंबर को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 25 नवंबर को सीबीआई से जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश को कहा था, जिसके अनुपालन में बुधवार को सीबीआई ने स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर दी। सीबीआई ने कोर्ट से कहा है कि जांच तेज गति से चल रही है। वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के लिए इस मामले के चारों आरोपितों का गांधीनगर में पॉलीग्राफ और बीईओएस (ब्रेन इलेक्ट्रिकल ऑसिलेशन सिग्नेचर) टेस्ट कराया जा रहा है। कहा कि संभवत: 10 दिसंबर तक जांच पूरी हो जाएगीं।


उधर, राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही केंद्र की ओर से एसपी राजू, पीड़िता के परिवार की ओर से अधिवक्ता सीमा कुशवाहा व सीबीआई की ओर से अधिवक्ता अनुराग सिंह पेश हुए। मालूम हो कि दो नवंबर को सुनवाई के दौरान कोर्ट में उतर प्रदेश के एडीजी कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार, गृह सचिव तरुण गाबा व हाथरस के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक कोर्ट में पेश हुए थे।

जिलाधिकारी हाथरस प्रवीण कुमार के संबंध में कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि विवेचना के दौरान क्या उन्हें हाथरस में बनाए रखना निष्पक्ष और उचित है। कोर्ट ने कहा था कि हमारे समक्ष भी जो प्रक्रिया चल रही है, उससे वह भी जुड़े हुए हैं। क्या यह उचित नहीं होगा कि सिर्फ निष्पक्षता व पारदर्शिता के लिए इन प्रक्रियाओं के दौरान उन्हें कहीं और शिफ्ट कर दिया जाए। इस पर राज्य सरकार के अधिवक्ता ने अगली सुनवाई पर सरकार का रुख स्पष्ट करने की बात कही है।
यह था मामला :  हाथरस जिले के चंदपा इलाके के बूलगढ़ी गांव में 14 सितंबर को चार लोगों ने कथित रूप से 19 साल की दलित युवती से सामूहिक दुष्कर्म किया था। इस दौरान युवती को गंभीर चोट आई थी। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान 29 सितंबर को पीड़िता की मौत हो गई थी। पीड़िता की 30 सितंबर को रात के अंधेरे में उसके घर के पास ही अंत्येष्टि कर दी गई थी। उसके परिवार का आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने जल्दबाजी में अंतिम संस्कार करने के लिए मजबूर किया, जबकि स्थानीय पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि परिवार की इच्छा के मुताबिक ही अंतिम संस्कार किया गया।
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हाईकोर्ट में पेश होगी शवों के अन्तिम संस्कार की प्रक्रिया

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