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सामने आई एक और बड़ी लापरवाही, सीएम योगी की सुरक्षा से खिलवाड़

Tue, 18 Apr 2017 01:30 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Tue, 18 Apr 2017 01:30 PM IST
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gvk emri company sent defected ambulance for cm's fleet
सीएम योगी आदित्यनाथ
जीवीके ईएमआरआई कंपनी लापरवाही से बाज नहीं आ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों आधी-अधूरी एएलएस एंबुलेंस को हरी झंडी दिखवाने का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि कंपनी ने इस बार सीएम की सुरक्षा से खिलवाड़ कर दिया।
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दरअसल, सीएम की फ्लीट के लिए जो एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस कंपनी ने भेजने का फैसला किया उसकी बैट्री डिस्चार्ज थी, जिससे उसमें लगे मेडिकल इक्विपमेंट बंद पड़े थे।
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सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने जांच की तो आनन-फानन एंबुलेंस को वीआईपी ड्यूटी से रिजेक्ट कर सिविल अस्पताल की एएलएस एंबुलेंस को भेजा गया। 
जानकारी के मुताबिक, सोमवार सुबह सीएम की फ्लीट के लिए एएलएस एंबुलेंस को जाना था।

सीएमओ डॉ. जीएस वाजपेई के निर्देश पर एंबुलेंस नंबर यूपी 41 जी 3952 को भेजने की अनुमति मिली। वीआईपी ड्यूटी में जाने को तैयार सिविल अस्पताल के डॉ. अनूप गुप्ता और डॉ. पीके सिंहानियां ने एंबुलेंस की जांच की तो पता चला कि उसमें लगे उपकरणों को संचालित करने वाली बैट्री डिस्चार्ज है।
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इससे एंबुलेंस में लगा मॉनीटर, इंफ्यूजन पंप, सक्शन मशीन काम नहीं कर रही थी, जबकि ऑक्सीजन लेवल सही न होने से वेंटिलेटर सपोर्ट सिस्टम भी दुरुस्त नहीं था।

सर्विस में जानी थी एंबुलेंस

gvk emri company sent defected ambulance for cm's fleet
एंबुलेंस - फोटो : amar ujala
आनन-फानन दोनों चिकित्सकों ने मामले की जानकारी अस्पताल के निदेशक डॉ. एचएस दानू और एमएस डॉ. आशुतोष दुबे को दी। अधिकारियों ने बिना देर किए अस्पताल की एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस को फ्लीट में भेज दिया।

अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आशुतोष दुबे ने बताया कि जीवीके ईएमआरआई कंपनी ने जो एंबुलेंस फ्लीट के लिए भेजी थी, उसकी बैट्री डिस्चार्ज थी। डॉ. अनूप गुप्ता और डॉ. पीके सिंहानियां ने खामी पकड़ ली, जिसके बाद उसे वापस कर दिया गया।

अस्पताल की एएलएस एंबुलेंस को फ्लीट में ड्यूटी के लिए भेजा गया। वहीं, कंपनी के पीआरओ अजय यादव ने बताया कि एंबुलेंस में किसी तरह की कमी की कोई जानकारी नहीं मिली थी। एंबुलेंस सीएमओ स्तर से भेजी जाती है।

सिविल अस्पताल की जिस एंबुलेंस नंबर यूपी 81 एजी 0455 को सीएम की फ्लीट के लिए भेजा गया उसे सोमवार को सर्विसिंग के लिए जाना था। सूत्रों के मुताबिक, यह एंबुलेंस भी काफी चल चुकी है। ऐसे में सर्विसिंग में जाने से ऐन पहले उसे ड्यूटी के लिए भेजा गया उससे भी खतरा था।

जल्दबाजी जान पर न पड़ जाए भारी

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एंबुलेंस - फोटो : amar ujala
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी बताते हैं कि राजधानी में वीआईपी ड्यूटी में जा रही एंबुलेंस की बैट्री डिस्चार्ज मिली तो जिलों में पहुंची एंबुलेंस का क्या हाल होगा, जहां उनकी निगरानी के लिए कोई है ही नहीं।

मालूम हो कि  बीते गुरुवार को को सीएम योगी आदित्यनाथ ने 150 एएलएस एंबुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था, वह भी आधी अधूरी तैयार थी।सूत्रों की मानें तो प्रदेशभर में जो एएलएस एंबुलेंस भेजी गई हैं उनमें कई खामियां है।

ऐसे में इनमें किसी मरीज को शिफ्ट करने की तैयारी हुई और बीच रास्ते में बैट्री या ऑक्सीजन सिलेंडर ने धोखा दिया तो मरीज की जान पर आफत बन सकती है।

इन एंबुलेंस को मेडिकल उपकरण लगाने के बाद सीधे जिलों में भेज दिया, कोई ट्रायल तक नहीं किया गया जिससे कंपनी और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही उजागर होती है।
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