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ग्राउंड जीरो : सीधे मुकाबले भी दिख रहे टेढ़े, उन्नाव, रायबरेली, अमेठी, सीतापुर के मतदाताओं के दिल की बातें

Wed, 05 Jan 2022 05:12 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव राजन परिहार, अमर उजाला, लखनऊ
राजन परिहार, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Wed, 05 Jan 2022 05:12 AM IST
सार

चुनावी रंग क्या चढ़ा गलियां सियासी हो गईं। चौबारे सियासी हो गए। घर-आंगन सियासी हो गए। जहां जज्बात बंटे हुए हैं। खेमों में। धड़ों में। कहीं चाशनी में पगे शब्द हैं। तो कहीं शब्दों में तोल-मोल है। इतने घुमाव...। इतनी उलझनें...। इतने अगर-मगर...। इतने किंतु-परंतु कि सीधी सी बातें भी जलेबी सी गोल-गोल हैं।

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Ground Zero: Straight contests are visible even in the hearts of voters of Unnao, Rae Bareli, Amethi, Sitapur
यूपी की चुनावी जंग के दिग्गज खिलाड़ी... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश की सियासत के केंद्र राजधानी लखनऊ से सटे जिलों में राष्ट्रीय राजनीति में दखल देने वाले रायबरेली और अमेठी हंै, तो दूसरी तरफ अपने जनप्रतिनिधियों को लेकर सुर्खियों में रहने वाला उन्नाव। सीतापुर जिले की भी सियासत में खासी दखल रहती है। इन जिलों की 25 में से 18 सीटों पर भाजपा का कब्जा है, मगर इसे बरकरार रखना बड़ी चुनौती होगी। मतदाताओं की चर्चाओं में फिलहाल जो कुछ आ रहा है उससे साफ है कि ज्यादातर सीटों पर भाजपा-सपा में सीधा मुकाबला है। कांग्रेस-बसपा के सामने तो पुरानी सीटें बचाने की ही चुनौती ज्यादा है।

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उन्नाव : सदर, भगवंतनगर और मोहान 
चर्चाओं में तो फिलहाल भाजपा और सपा

उन्नाव जिले की बात करें तो यहां की 6 में से 5 सीटें भाजपा के पास हैं। एक सीट बसपा ने जीती थी। पर, अब बसपा विधायक भाजपा के खेमे में हैं। उन्नाव सीट पर क्या हालात हैं, यह जानने के लिए हम उन्नाव-रायबरेली रोड पर निकले। यहां मोड़ पर हमें प्राइवेट जॉब करने वाले रजत और सूरज मिले। माहौल कैसा है, इस सवाल पर वे छुट्टा जानवरों से हो रही परेशानी से लेकर बेरोजगारी, महंगाई तक गिना जाते हैं। वे यह भी कहते हैं कि उनके इलाके में तो मोदी, योगी या अखिलेश के नाम पर ही वोट जाता दिख रहा है। जयशंकर अवस्थी का मानना है कि भले ही यह सीट भाजपा के पास है, इस बार उसे सपा से टक्कर मिलती दिख रही है। 
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भगवंतनगर में भी मतदाताओं की चर्चाओं में मुद्दे उन्नाव सीट जैसे ही हैं। विधानसभा क्षेत्र में आने वाले लालकुुआं कस्बे में ऑटो पार्ट्स की दुकान पर मिले मयंक कहते हैं, जीएसटी को लेकर कारोबारियों में नाखुशी है। वहीं, दुकानदार देवेंद्र कुमार व अजीत कहते हैं, लोगों का रुख तो प्रत्याशी तय होने के बाद ही पता चलेगा। इसी क्षेत्र में एक बैंक के बाहर मिले ऊदन निषाद, सुरेश, श्रीराम निषाद कहते हैं कि भाजपा व सपा के लोग खूब जोर लगाए हुए हैं। 
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लखनऊ से सटी मोहान सुरक्षित सीट पर क्या माहौल है, यह जानने के लिए हमने कस्बे की एक दुकान पर मिले धर्म सिंह, छेदीलाल, शिवशंकर, अनुज, सर्वेश, प्रशांत व बबलू सिंह को कुरेदा। वे कहते हैं, यहां मुकाबला भाजपा-सपा में है। अलबत्ता सोहरामऊ क्षेत्र में चाय की दुकान चलाने वाले लल्लन मिश्र कहते हैं कि कोई कुछ कहे, वोट तो राम के नाम पर पड़ेगा।

बांगरमऊ, सफीपुर : कौन होगा उम्मीदवार, निगाहें इसी पर
बांगरमऊ से विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दुष्कर्म मामले में सजा हो गई। हालांकि 2020 में हुए उपचुनाव में भाजपा फिर जीती। श्रीकांत कटियार विधायक बने। यहां के एक होटल में चाय की चुस्की लेते मिले बुजुर्ग सामाजिक कार्यकर्ता देवी प्रसाद वर्मा ने बताया कि मुकाबला सपा व भाजपा में ही है, लेकिन उम्मीदवार चयन भी अहम होगा। किसान जयप्रकाश कटियार व नासिर अली भी इसी बात का समर्थन करते हैं। 
पूर्व प्रधान देव प्रकाश कटियार व श्रीकांत तिवारी क्षेत्र में विकास न होने का मुद्दा बताते हैं तो राधेश्याम व सुरेंद्र कटियार का मानना है कि किसी भी दल को अबकी बार प्रदेश में बहुमत मिलना कठिन है।  भाजपा के कब्जे वाली सफीपुर सीट के सरायसुबेदार कस्बे में अलाव ताप रहे राजेश कहते हैं कि क्षेत्र में एक डिग्री कॉलेज खुलना चाहिए। उम्मेदाराय बाजार के यूनुस पीएम आवास योजना की तारीफ करते हैं तो क्षेत्र के लोग लिंक मार्गों की बदहाली को बड़ी विफलता बताते हैं। नीरज कुशवाहा मुफ्त अनाज व किसान सम्मान निधि को गरीबों के लिए सीधी मदद बताते हैं। वहीं, पुरवा विधानसभा क्षेत्र में मिले धर्मेंद्र कहते हैं कि चुनाव रोचक होगा। फिलहाल लड़ाई सपा-भाजपा में है। यहां से पिछली बार बसपा के अनिल सिंह जीते थे, मगर अब वे भाजपा में हैं। पार्टी बदलने से उनकी राह आसान नहीं होगी।

रायबरेली : समीकरण साधने की होगी चुनौती
सदर, हरचंदपुरव ऊंचाहार सीट

रायबरेली जिले की दो सीटें हरचंदपुर और रायबरेली से कांग्रेस जीती थी। अब दोनों विधायक भगवा खेमे में आ गए हैं। जेल रोड पर स्थित चाय-पकौड़ी की दुकान पर मिले मटिहा के किसान उमाशंकर ने छुट्टा जानवरों के साथ ही महंगाई को बड़ी समस्या बताया तो प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे प्रदीप कुमार ने कहा कि रायबरेली व आसपास में राजमार्गों तक का हाल बुरा है। यहां मौजूद लोगों ने कहा कि मुकाबला सपा, भाजपा में होगा। 
हरचंदपुर सीट का मिजाज जानने के लिए हम सेमरी चौराहा पहुंचे। यहां चाय की दुकान में मिले एलआईसी एजेंट पंकज पांडेय कहते हैं कि अन्य इलाकों की तरह यहां भी छुट्टा जानवर सबसे बड़ा मुद्दा हैं। पास खड़े विजय बहादुर कहते हैं, पानी की भी बड़ी किल्लत है। हैंडपंप खराब हैं। हालांकि, समर बहादुर और संतोष कहते हैं कि इन सब मुद्दों का असर चुनाव में नहीं दिखेगा। 
सरेनी विधानसभा क्षेत्र के लालगंज क्षेत्र में एक दुकान पर राजेश, देवी प्रकाश सिंह, डॉ. राजेश और अवधेश सिंह लूडो खेलते मिल गए। राजेश कहते हैं कि सड़कें खराब हैं। अवधेश ने कहा कि छुट्टा जानवर घरों में घुस जाते हैं। वोट तो इन्हीं मुद्दों पर पड़ेगा। ऊंचाहार सीट का मिजाज जानने के लिए डलमऊ से रायबरेली सड़क मार्ग से हम चौदह मील पहुंचे। इसका बाएं तरफ का हिस्सा सरेनी विधानसभा में आता है तो दाहिनी तरफ का ऊंचाहार सीट में। ऊंचाहार सीट वाले हिस्से में एक चाय की दुकान पर मिले किसान शीतला प्रसाद कहते हैं, छुट्टा जानवर तो किसानों व खेती के दुश्मन बन गए हैं। खेतों में लगे तार तक तोड़ डालते हैं। वहीं मौजूद संजय कहते हैं कि धान की खरीद में भी मनमानी हो रही है। बोरी मिलती नहीं। अंजनी ने बताया कि सिंचाई के समय पर नहर बंद है। हालांकि, कुरेदने पर यह सभी लोग लड़ाई भाजपा-सपा में बताते हैं।

अमेठी, तिलोई : हवा का रुख भांप रहे मतदाता 
अमेठी की तीन सीटें भाजपा ने तो एक सपा ने जीती थीं। जिले की सीटों के सियासी मिजाज जानने के लिए हम ग्राम पंचायत खेरौना में पहुुंचे। यहां दुकान पर चाय की चुस्कियां लेते मिले बुजुर्ग अमरनाथ गौतम ने चर्चा छिड़ते ही छुट्टा मवेशियों की समस्या सुनानी शुरू कर दी। इस पर हनुमान विश्वकर्मा ने जवाबी हमला किया, मवेशियों को तो हम सब ही छोड़ते हैं। बाहर से तो लाए जाते नहीं। लाए जाते हों तो बताओ? नवनीत द्विवेदी बोले, योगी सरकार अच्छा काम कर रही है। मंदिर निर्माण से बड़ा कोई काम नहीं है। यहीं मौजूद विनोद शर्मा बोले, सपा सरकार में विधायक मिलते थे, सुनवाई होती थी। अब ऐसा नहीं है। सुधीर द्विवेदी कहते हैं कि जो भी विकास हुआ है, कांग्रेस के समय में हुआ है। दुर्गेश सिंह भी पिल पड़े। वे बोले, चुनाव आया तो श्रम कार्ड से पैसे भेजे जा रहे हैैं। तिलोई के फुर्सतगंज कस्बे में रात में हम निकले तो एक मेडिकल स्टोर पर सुधीर कुमार, अंकित शुक्ला, मुकेश व सोनू मिले। वे कहते हैं, फ्री राशन मिल रहा है। कर्ज माफी की भी सबको उम्मीद रहती है। जायस कस्बे में मंडी स्थल के सामने शत्रुघ्न की पकौड़े की दुकान पर मौजूद आढ़ती श्रवण कुमार और राम सजीवन कहते हैं कि यहां कमल का जोर है। पास में बैठ पान के दुकानदार ने कहा जोर ‘राजा’ का रहेगा। एक मेडिकल स्टोर संचालक ने कहा कि सपा का जोर है, तोे व्यापारी दिनेश जैन, अशोक मौर्या, संजय मित्तल, रमाकांत कौशल, विष्णु अग्रवाल, राजकुमार कनौजिया ने भाजपा का नाम लिया।

गौरीगंज, जगदीशपुर : प्रत्याशियों पर निर्भर करेगी लड़ाई
अमेठी जिले की गौरीगंज अकेली सीट है जहां पिछले चुनाव में सपा के राकेश प्रताप सिंह ने जीत दर्ज की थी। यहां कस्बे में घर के बाहर आग ताप रहे अनुपम मणि त्रिपाठी, रवि शंकर, कृष्ण कुमार व चंदन सोनी कहते हैं, अबकी बार मुकाबला प्रत्याशी पर निर्भर करेगा। गौरीगंज से हम जगदीशपुर सीट का मिजाज जानने के लिए निकले। यूपीसीडा कॉलोनी में एक होटल पर मिले एजाज अहमद कहते हैं,  यहां राहुल गांधी की छाप ज्यादा है। शौकत अली कहते हैं कि सपा भी मजबूत है। 
चाय की दुकान पर बैठे मिले दिनेश कुमार कहते हैं कि वे 40 साल से अधिक के हो चुके हैं, लेकिन जो काम पिछले वर्षों में भाजपा ने किया, अब तक किसी ने नहीं किया। बासदेव श्रीवास्तव और राम चरन सरोज भी उनका समर्थन करते हैं। पिसियांवा निवासी रामलली कहती हैं, फ्री में राशन और खाते में पैसा इसी सरकार में मिला है। चांदगढ़ के मोईन कहते हैं, जब सब लोग योगी-मोदी के साथ हैं तो हम भी उन्हीं के साथ हैं। हालांकि जहीर, समीर, नूर मोहम्मद भी हमें मिले, पर इन सबने रुझान देने से मना कर दिया।
 

सीतापुर : कहीं योजनाओं की चर्चा, तो कहीं प्रत्याशी का इंतजार

सीतापुर, सिधौली 
सीतापुर सदर सीट पर भाजपा से राकेश राठौर जीते थे, लेकिन वह सपा में जा चुके हैं। राकेश राठौर ने चार बार के सपा विधायक राधेश्याम जायसवाल को 2017 में मोदी लहर में हराया था। दोनों अब सपा में हैं। हर किसी की निगाहें भाजपा के प्रत्याशी पर टिकी हैं। बहरहाल, आबकारी विभाग के पास मिले अधिवक्ता अखिलेंद्र कुमार श्रीवास्तव कहते हैं, धर्म की राजनीति नहीं होनी चाहिए। वहीं, अमित कुमार सिंह ने कहा कि सरकार अफसरों के भ्रष्टाचार को रोकने में नाकामयाब रही है। मुन्ना सिंह बोले, राम मंदिर से वर्षों की मुराद पूरी हुई है। बृजलाल ने कहा, सरकार ने ट्रॉमा सेंटर तो बनवा दिया है, लेकिन इसे तत्काल चालू करवाने की जरूरत है। सिधौली से बसपा के डॉ. हरगोविंद भार्गव विधायक हैं। कुछ दिन पहले वे सपा में चले गए थे। यहां तहसील गेट के सामने मिले कठवा निवासी अधिवक्ता प्रदीप शुक्ल कहते हैं, मुफ्त राशन, प्रधानमंत्री आवास, किसान सम्मान निधि का फायदा भाजपा  मिल रहा है। जीवन पांडेय कहते हैं, यह सब तो है, पर असल समीकरण तो टिकट फाइनल होने के बाद सामने आएगा।  

कोई समस्याएं गिना रहा, कोई सुविधाएं
सेवता, महमूदाबाद

सेवता के एक होटल पर मिले जागेश्वर भार्गव कहते हैं, हम तो बाढ़ से निजात दिलाने का वादा करने वाले को ही वोट करेंगे। वहीं, मैकूलाल गौतम ने बताया- किसान रात भर जाग कर खेतों की रखवाली करता है। महंगाई चरम पर है। इनसे इत्तफाक न रखते हुए सतीश अवस्थी कहते हैं कि सड़कों का निर्माण हुआ है। विजय त्रिवेदी बोले, लोगों को फ्री में गल्ला मिल रहा है। सरकार सबका ध्यान रख रही है। वहीं, महमूदाबाद विधानसभा क्षेत्र में सिधौली मार्ग स्थित एक होटल पर मिले देव कुमार मिश्रा ने कहा कि शारदा नहर नूरपुल, रामपुर मथुरा, थानगांव, बहराइच, रेउसा आदि मार्गों को जोड़ता है, लेकिन सिंगल लेन सड़क होने की वजह से हादसे का खतरा रहता है। जाम की भी बड़ी समस्या है। मोलहे यहां पार्क न होने का मुद्दा उठाते हैं, तो अयूब अहमद कहते हैं कि महमूदाबाद अस्पताल में एक्स-रे की सुविधा नहीं है। 2017 से ही मशीन खराब है। स्थानीय निवासी राहुल सिंह कहते हैं कि महमूदाबाद को जिला बनाने का मुद्दा इस बार भी उठेगा। यहां से सपा के नरेंद्र वर्मा विधायक हैं।

विकास को लेकर सवाल उठा रहे लोग
लहरपुर, मिश्रिख 

लहरपुर विधानसभा क्षेत्र के रतौली गांव के निवासी जनार्दन कहते हैं कि हर साल आने वाली बाढ़ भारी परेशानी पैदा करती है। मनीष कुमार बताते हैं कि शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन की सुविधाएं आज भी लोगों को नहीं मिल रही हैं। मिश्रिख सीट की बात करें तो पौराणिक महत्व वाले नैमिषारण्य तीर्थस्थल का उस हिसाब से विकास नहीं होने   की वजह से लोगों में मायूसी है। राहुल शर्मा कहते हैं कि कई विकास कार्य हुए हैं। देवदेवेश्वर घाट का कायाकल्प हुआ है, लेकिन जनहित में कोई काम नहीं हुआ है।  तीर्थ का सौंदर्यीकरण और जलनिकासी की समस्या है। जल प्रदूषित होने की वजह से हर साल मछलियां मरती हैं। महंत देेवानंद गिरी बताते हैं कि बस स्टॉप नहीं होने से लोगों को कानपुर, मेरठ, बरेली, शाहजहांपुर जाने के लिए परेशानी होती है। मिश्रिख से 25 किमी. दूर सीतापुर जिला मुख्यालय पर जाने के बाद बस मिलती है। स्थानीय निवासी विजय गोपाल यहां सरकारी डिग्री कॉलेज की मांग उठाते हैं। यहां से भाजपा के रामकृष्ण भार्गव विधायक हैं।

स्थानीय समस्याओं को लेकर नाराजगी 
महोली, बिसवां

महोली विधानसभा क्षेत्र के गुजिया लाइन मोड़ के पास मिले सोलंकी गुप्ता चुनावी चर्चा छिड़ते ही प्रदेश सरकार की योजनाओं की तारीफ करने में जुट जाते हैं। चवा बेगमपुर के राज किशोर ने कहा कि गुंडों-माफिया पर कार्रवाई हुई है। पर, वह यह भी जोड़ते हैं कि महंगाई बहुत बढ़ गई है। महोली चीनी मिल चलाने की मांग भी पूरी नहीं हुई है। बाबूराम शर्मा भी कहते हैं, सरकार में काम हुए हैं, लेकिन  क्षेत्र में बस स्टॉप न होना भी एक बड़ी समस्या है। रामसनेही कहते हैं कि महोली को तहसील तो मिल गई, लेकिन रजिस्टार की तैनाती नहीं हुई। लोगों को मिश्रिख जाना पड़ता है। बिसवां क्षेत्र के हसनापुर गांव में मिले प्रदीप कुमार, रबी भल्ला चुनावी चर्चा छिड़ते ही जाम की समस्या, ओवरब्रिज की मांग पूरी नहीं होने का मसला उठा देते हैं। जबकि राकेश कहते हैं कि इसी सरकार में सबसे ज्यादा विकास हुआ है। फ्री गल्ला मिला है। आशीष वर्मा, अंशू रस्तोगी ने बस अड्डे का मुद्दा उठाया तो धर्मेंद्र और बंश मेहरोत्रा ने बालिका डिग्री कॉलेज नहीं होने का।

रोचक मुकाबले की संभावना
हरगांव

हरगांव विधानसभा क्षेत्र के पिपरा गांव में शाम को अलाव ताप रहे लोगों से हमने माहौल पूछा तो विशाल बोले, भ्रष्टाचार बढ़ा है। फिरोज ने कहा, अधिकारी सुनते नहीं। बीच में बात काटते हुए कमाल बोले कि गन्ना पर्ची समय से नहीं मिलती। पर, इन्हीं में से खालिद कहते हैं, आवास योजना से जरूरतमंदों को लाभ मिला है। विक्रम ने कहा कि राशन फ्री मिल रहा है। यहां से भाजपा के सुरेश राही विधायक हैं। इनके भाई रमेश राही सपा में हैं। अंदर खाने चर्चाएं हैं कि वे सपा से टिकट मांग रहे हैं। अगर टिकट मिला तो दोनों भाई आमने-सामने होंगे। ऐसे में चुनावी जंग रोमांचक हो सकती है।

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