फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   ground report of lakhimpur kheeri loksabha seat

यहां बेबस करती रही बाढ़, नहीं जागा कोई नेता

Sat, 29 Mar 2014 04:10 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 29 Mar 2014 04:10 PM IST
विज्ञापन
ground report of lakhimpur kheeri loksabha seat

लखीमपुर खीरी जनपद के आठ विधानसभा क्षेत्र में से पांच को मिलाकर गठित खीरी लोकसभा क्षेत्र को कुदरत ने खूब सजाया-संवारा है।

विज्ञापन


लेकिन, कुदरत की ही नियामत नदियों में आने वाली बाढ़ यहां खेत, खलिहान, जंगल के लिए अभिशाप भी बन चुकी है।

इससे मुक्ति की चाह में यहां के लोगों ने एक ही परिवार के सदस्यों को 10 बार संसद भेजा। इसके बावजूद न तो इलाके की तस्वीर बदली और न ही लोगों का भरोसा पक्का हो सका।

हालांकि पिछले लोकसभा चुनाव में लोगों ने कांग्रेस के प्रत्याशी को आजमाया लेकिन बाढ़ की विभीषिका से छुटकारे का सपना हकीकत नहीं बन सका है। इसको लेकर मौजूदा सांसद जफर अली नकवी पर सवाल भी उठते हैं।

विज्ञापन

बाढ़ ने मचाई तबाही

ground report of lakhimpur kheeri loksabha seat

सहकारी गन्ना विकास समिति के निदेशक अमोलक सिंह बताते हैं कि खीरी लोकसभा क्षेत्र में बीते बारिश के मौसम में बाढ़ से करीब 18 करोड़ की फसल बर्बाद हुई तो सवा तीन करोड़ रुपये की जमीन नदियों ने लील ली।

भीरा से पलिया की ओर बढ़ते ही शारदा नदी के पुल से पहले बोझुआ में झुग्गी-झोपड़ी में रह रहे बाढ़ पीडि़त कीरत सिंह, सिमरनजीत, सुखदेव और बेचे लाल बताते हैं कि दो साल पहले दो गांव कटान में बह गए तो पूरी आबादी सड़क किनारे विस्थापित हो गई।

गांव दौलतापुर कच्चनारा के जमील अहमद, रईस खां और छोटेलाल बताते हैं कि वर्ष 2008 में यहीं मालगाड़ी का एक वैगन कटान में समा गया था लेकिन बाढ़ से बचाव के उपाय नहीं हुए।

मैलानी के पास खोखे पर जुटे मो. नबी, रंजीत सिंह और गुलाब कहते हैं इसी जंगल में चार किमी भीतर गांव कांपटांडा है जहां न बिजली है और न सड़क।

किसी सांसद ने नहीं की ठोस कोशिश

ground report of lakhimpur kheeri loksabha seat

गोला-लखीमपुर मार्ग पर रजागंज कस्बे में चंद्रभान और रेलवे क्रॉसिंग किनारे फरधान गांव के मनोज और निर्मल कहते हैं, शारदा और नेपाली नदियां-मुहाना और सुहेली कहर बरपाती हैं।

श्रीनगर के खंभार खेड़ा की ग्राम प्रधान शोभा देवी, लखनापुर गांव के राजू सिंह और मैनहां गांव के कमलेश व जितेंद्र सिंह के अनुसार इस कहर से बचाने के लिए किसी सांसद ने ठोस कोशिशें नहीं कीं।

ट्रांस शारदा क्षेत्र में पीलीभीत जिले के रामनगर कॉलोनी, शांति नगर, कबीरगंज समेत 49 राजस्व ग्राम हर साल बाढ़ आने पर ये गांव टापू बन जाते हैं।

यहां के लोगों को पीलीभीत जिला मुख्यालय जाने के लिए संपूर्णानगर, पलिया, मैलानी, खुटार होते हुए करीब २०० किमी की दूरी तय करनी होती है।

विज्ञापन

नहीं पूरी हुई पचपेड़ी घाट पर पुल की मांग

ground report of lakhimpur kheeri loksabha seat

निघासन से श्रीनगर बीच शारदा नदी पर पचपेड़ी घाट पर पुल नहीं बनने से लखीमपुर के लिए जो दूरी 35 किमी की वह शारदा नगर से घूम कर जाने में 55 किमी हो जाती है।

मलेनिया गांव के भगवती पाल, राम प्रसाद, ललित और उदित बताते हैं कि कई बार मांग की लेकिन न सांसद ने सुध ली और न दूसरे नुमाइंदों ने।

बड़ा मसला है पलिया को अलग जिला बनाने की मांग जिले के पलिया क्षेत्र को अलग जिला बनाने की मांग एक बड़ा मुद्दा है।

यह सीधे तौर पर क्षेत्र के करीब 20 लाख लोगों की सहूलियत से जुड़ा मसला है। गोविंदनगर, खजुरिया, संपूर्णानगर, गौरीफंटा, चंदन चौकी आदि गांव-कस्बों से जिला मुख्यालय जाने में लोगों को सवा सौ से डेढ़ सौ किमी की दूरी तय करनी पड़ती है।

पढ़िए, क्या कहती है जनता

ground report of lakhimpur kheeri loksabha seat

महज 660 वर्ग किमी क्षेत्रफल पर हापुड़ और महज 7.09 लाख आबादी पर महोबा जिला बन सकता है तो पलिया क्यों नहीं?
-अमित महाजन, सामाजिक कार्यकर्ता

आज पारंपरिक खेती लुप्त हो गई है। किसानों के हित के काम कोई नहीं करता उन्हें सिर्फ मूर्ख बनाया जा रहा है।
-डॉ. बेनी सिंह, राष्ट्रपति से सम्मानित प्रगतिशील किसान

खीरी लोकसभा क्षेत्र में छह चीनी मिलें हैं। किसानों की मुख्य फसल गन्ना है। भुगतान अटके होने से उनके सामने फांकाकशी, कर्ज और खुदकुशी की नौबत आ गई है। किसान इस बार बैलेट में आग उगलने को तैयार है।
-मनप्रीत सिंह कंडोला, राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के कार्यकर्ता

ये हैं आपके मैदान में

ground report of lakhimpur kheeri loksabha seat

जफर अली नकवी (कांग्रेस): प्रदेश सरकार में वन और गृहराज्य मंत्री के पदों पर रह चुके जफर अली नकवी ने 2009 में इसी सीट से बसपा प्रत्याशी इलियास आजमी को मामूली मतों के अंतर से पराजित किया था। पार्टी ने फिर से मैदान में उतारा।

तरकश के तीर:
अमेठी व रायबरेली के बाद खीरी में सबसे अधिक विकास का दावा। इसे ही मुद्दा बना वोटरों को लुभाने की कोशिश।

अजय मिश्र उर्फ टैनी (भाजपा)
अजय मिश्र टैनी निघासन सीट से वर्ष २०१२ में विधायक चुने गए। हालांकि इससे पहले वह इस सीट से हार गए थे। वर्ष 2009 में खीरी संसदीय सीट से भाजपा के टिकट पर लड़े और तीसरे स्थान पर रहे।

तरकश के तीर: निघासन में कराए गए विकास कार्यों को भुनाने की कोशिश। पचपेड़ी घाट पर पुल न बन पाने व गन्ना किसानों के भुगतान की समस्या को लेकर राज्य सरकार तो भ्रष्टाचार को लेकर केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश।

ये भी आजमा रहे किस्मत

ground report of lakhimpur kheeri loksabha seat

रवि प्रकाश वर्मा (सपा): सपा के राष्ट्रीय महासचिव रवि प्रकाश वर्मा को पार्टी ने फिर चुनाव मैदान में उतारा है। इसी संसदीय सीट से तीन बार सांसद रह चुके हैं।

वह भाजपा के राजेंद्र गुप्ता व विनय कटियार जैसे दिग्गजों को बोल्ड कर चुके हैं। वर्ष 2009 के चुनाव में वह चौथे पायदान पर पहुंच गए। इसी सीट से उनकी मां ऊषा वर्मा दो बार तो पिता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. बालगोविंद वर्मा चार बार सांसद रह चुके हैं।

तरकश के तीर: राज्य सरकार की योजनाओं को भुनाने की कोशिश। मुलायमसिंह यादव को अल्पसंख्यकों का हितैषी बताकर मुस्लिम वोटरों को लुभाने का प्रयास।

अरविंद गिरि (बसपा): जिले की हैदराबाद विधानसभा सीट (अब गोला) से लगातार तीन बार सपा टिकट पर विधायक रह चुके हैं। वर्ष 2009 में सपा छोड़ कांग्रेस का दामन थाम लिया व गोला विधानसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा पर  हार गए।

तरकश के तीर: मायावती सरकार में हुए विकास कार्यों को भुनाने की कोशिश। गन्ना मूल्य भुगतान न होने को लेकर सपा सरकार को घेरेंगे। अपनी बाढ़ मुक्ति यात्रा का जिक्र कर बाढ़ पीडि़तों को सच्चा हितैषी बताने की कोशिश।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed