मुस्लिमों में गूंजता है 'भाजपा हराओ' का नारा
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फीरोजाबाद संसदीय क्षेत्र का हाल समझने के लिए कुछ बातें ही काफी हैं। प्रो. रामगोपाल के बेटे और सूबे के सबसे सशक्त सियासी परिवार के अक्षय यादव राजनीति में प्रवेश परीक्षा दे रहे हैं।
उनके साथ इस क्षेत्र में उनकी खुद की दो साल की मेहनत है। सपा सरकार के बचे तीन साल और विकास के वादे उनकी अतिरिक्त ताकत है।
यह बात खुद मुख्यमंत्री अपनी सभा में कह भी गए हैं। हालांकि कुछ क्षेत्रों में इसे धमकी के रूप में भी प्रचारित किया जा रहा है। भाजपा इन दो जमा तीन के मुकाबले मोदी के नाम पर मतदाताओं से पांच साल मांग रही है।
बसपा की कोशिशें भी कम नहीं
तस्वीर के रुख समझाने वाले कुछ दृश्य ये भी हैं- मुखर सिर्फ सपा के समर्थक हैं, बाकी चुप। जैसे दिल और जुबां की भाषा अलग हो।
चार विधानसभा क्षेत्रों के गांव-कस्बों में करीब दो सौ किमी के सफर में सपा, भाजपा के मिलाकर करीब चार दर्जन झंडे दिखते हैं। कोई आठ-दस होर्डिंग, जिनमें दो सपा प्रत्याशी के तो बाकी मतदाता जागरूकता के।
यहां सीधा मुकाबला सपा और भाजपा में नजर आ रहा है। तीसरा कोण बनने के लिए बसपा भागदौड़ कर रही है तो कांग्रेस और आप प्रत्याशी को मानो चमत्कार की आस है।
आखिरी हफ्ते में सपा के अक्षय यादव, भाजपा के एसपी सिंह बघेल, बसपा के विश्वदीप सिंह, कांग्रेस के अतुल चतुर्वेदी, आप के उम्मीदवार राकेश यादव ने दिन-रात एक कर रखा है।
वोटरों के मूड में बदलाव के संकेत
टूंडला से यमुना की ओर बढ़ते ही गांव नगला झम्मन में घरों पर लगे सपा-भाजपा के झंडे चुनावी गर्मजोशी की खबर देते हैं।
दलित बहुल नगला सोना में गांव के बाहर बैठे युवकों में अनुज को लगता है गांव के कुल 80 फीसदी बसपा वोटों में बीस प्रतिशत भाजपा में चले जाएंगे।
वहीं, नरेंद्र सागर का अनुमान है कि सपा के खिलाफ भाजपा का वोट प्रतिशत और भी बढ़ सकता है। सपा का क्यों नहीं, इस पर वह साफ कहते हैं कि वोट दे भी दें तो सपा वाले अपना नहीं मानेंगे।
यह बसपा के परंपरागत वोटरों के मूड में बदलाव का संकेत है।
भाजपा का प्रभाव
एसपी सिंह के पार्टी बदलने को लेकर भी नाराजगी अनवारा में मुन्ना सिंह यादव कहते हैं कि यहां सपा की लहर है।
अपने अहाते में खेतिहर मजदूर जनक सिंह निषाद, प्रताप सिंह व अन्य से घिरे बैठे चोब सिंह का भी यही कहते हैं कि रसूलाबाद तक निषादों के गांव के लोग इस बात से नाराज हैं कि एसपी सिंह ने बसपा का दामन छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया।
थोड़ा और आगे छांहरी में ग्राम प्रधान कविता देवी के पति विक्रम सिंह निषाद भी इसकी तस्दीक करते हैं। पंचायत के 22-23 गांवों का जिक्र करते हुए कहते हैं कि मोदी का असर फर्क डालेगा लेकिन कितना, यह परिणामों के बाद स्पष्ट होगा।
यमुना नदी के करीब सीयर माता का पुराना मंदिर के पास रामगोपाल यादव की सभा की तैयारी में जुटे प्रदीप वर्मा कहते हैं कि टूंडला विधानसभा क्षेत्र में रामगोपाल यादव कई बार आए। इसका असर तो पड़ेगा ही।
बोलने से कतराते लोग
फीरोजाबाद-इटावा सीमा का गांव कठफोरी सिरसागंज विधानसभा क्षेत्र में आता है। यहां एक दुकान पर तीन-चार लोग बैठे हैं। कहते हैं, सपा को भाजपा ही टक्कर दे रही है।
एक युवक ने मोदी की बात की तो दूसरे ने उसे इशारे से रोका। नाम न छापने का आग्रह किया। फिर बोले, ‘जिसे जहां वोट डालना है, वहां चुपचाप डालेगा।
वह किसी से बुराई नहीं लेना चाहता।’ यहीं के डॉक्टर अश्वनी गुप्ता सपा को तो मजबूत बताते हैं पर कहना नहीं भूलते कि दूसरी पार्टियों के वोटर भी हैं।
उनकी नजर में बिजली के फॉल्ट और ओवर लोड ट्रांसफॉर्मर यहां की बड़ी समस्या हैं।
सपा से नाराजगी
छत्तीसगढ़ में भूमि संरक्षण विभाग में एडीओ के पद से रिटायर किशन सिंह वैश्य बोले- मैंने तो प्रचार को आए प्रत्याशी के करीबी लोगों तक से कह दिया कि किसान के लिए बिजली का शेड्यूल और चुस्त कानून व्यवस्था होती तो शायद सपा को वोट नहीं मांगना पड़ता।
माधवगंज और नगला गुलाल यादव बहुल है लेकिन अपराधों का मुद्दा यहां भी सपा को घेर रहा है। छेड़छाड़ और उससे आहत किशोरी की आत्महत्या मामले में आरोपी पक्ष की सपा नेताओं की पैरवी ने इसी वर्ग के पीड़ित गुट ही नहीं बाकियों को भी नाराज किया।
हड़ल, किशनपुरा, रसुलपुरा में दलितों के वोट भाजपा की ओर शिफ्ट होने की चर्चा भी खूब हो रही है। खुलकर बोलने के बावजूद नाम उजागर न करने का आग्रह यहां भी है।
मुस्लिमों में भाजपा हराओ नारा
फीरोजाबाद शहर क्षेत्र में ताड़ोंवाली गली के शाहिद हुसैन अंसारी की बात एकदम साफ है। कहते हैं, ‘मुस्लिमों में भाजपा हराओ का नारा गूंज रहा है।’
जामा मस्जिद के पास टेलर की दुकान चला रहे अंजुम शकील कहते हैं कि मुकाबला सपा और भाजपा के बीच है।
यही बात वहीं के दुकानदार महेंद्र कुमार जैन भी कहते हैं। पर उनका कहना है कि मोदी की लहर के असर से ध्रुवीकरण होना तय है।
सपा की जीती सीट पर उपचुनाव में डिंपल यादव की हार की वजह से सपा को सर्वाधिक सक्रिय बनाए हुए। उसका प्रचार, रणनीति और सशक्त बूथ प्रबंधन किसी भी दल के मुकाबले ज्यादा सुसंगठित है। कमान भी खुद प्रो. रामगोपाल के अनुभवी हाथों में है।
अपने-अपने दावे
सपा जिलाध्यक्ष अजीम भाई का दावा है कि सपा प्रत्याशी रिकॉर्ड मतों से जीतने जा रहे हैं। वहीं भाजपा भी ताल ठोक रही है कि उसे हर जाति वर्ग का वोट मिल रहा है।
भाजपा जिलाध्यक्ष अरविंद पचौरी कहते हैं, मोदी के नाम पर युवाओं का वोट मिल रहा है। जो वोट बैंक बसपा का माना जाता है वह इस बार भाजपा को मिलेगा।
बसपा जिलाध्यक्ष हेमंत प्रताप मोदी लहर को हवा-हवाई बताते हैं। कहते हैं, भाजपा के दलबदलू प्रत्याशी तीसरे नंबर पर रहेंगे। बसपा और सपा के बीच फाइट होगी। कांग्रेस भी दावे में पीछे नहीं है।
पार्टी के चुनाव प्रभारी धर्म सिंह यादव कहते हैं, कांग्रेस का उम्मीदवार स्थानीय और ब्राह्मण होने के कारण मुख्य मुकाबले में हैं। पार्टी को अल्पसंख्यकों का वोट भारी संख्या में मिल रहा है।