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आबादी नहीं, क्षेत्रफल और जमीनी जरूरतों के आधार मिले अनुदान : महापौर

Thu, 15 Oct 2026 02:20 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 15 Oct 2026 02:20 AM IST
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Grants should be based on area and land requirements, not population: Mayor
सम्मेलन में बोलतीं महापौर।
लखनऊ। शहर का दायरा 310 से बढ़कर 568 वर्ग किलोमीटर होने के बाद नए और गोमती किनारे बसे बाढ़ प्रभावित इलाकों में विकास के लिए नगर निगम ने 7,603 करोड़ रुपये की मांग उठाई है। बुधवार को होटल ताज में हुए महापौर सम्मेलन में महापौर सुषमा खर्कवाल ने छठवें राज्य वित्त आयोग के सामने शहर के विकास का पक्ष रखा। इस मौके पर वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, वित्त आयोग के अध्यक्ष दीपक कुमार, आयोग के सदस्य और प्रदेश के कई शहरों के महापौर मौजूद रहे।
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सम्मेलन में महापौर ने कहा कि नगर निगम का क्षेत्रफल 83 फीसदी से ज्यादा बढ़ गया है। सीमा बढ़ने के साथ सड़क, नाली, जल निकासी, रोशनी, पेयजल, सीवर, पार्क और सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना भी निगम की जिम्मेदारी है। इसके लिए सिर्फ आबादी नहीं, क्षेत्रफल और जमीनी जरूरतों को भी अनुदान का आधार बनाया जाए। गोमती से सटे बाढ़ प्रभावित मोहल्लों में बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ है, उसके दोबारा निर्माण के लिए भी अलग से बजट जरूरी है।
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महापौर ने कहा कि राजधानी होने से रोज लाखों कर्मचारी, छात्र, मरीज, व्यापारी और पर्यटक आते हैं। अति विशिष्ट लोगों के आवागमन, बड़े सरकारी कार्यक्रमों और विशेष सफाई पर अतिरिक्त खर्च होता है। इसलिए राजधानी के लिए विशेष मदद, वाहन कर में हिस्सेदारी और अनुदान का समय पर भुगतान जरूरी है।
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महापौर ने उठाईं ये पांच मांगें


0 पिछले 15 साल में आबादी और क्षेत्रफल बढ़ा है, इसलिए तय हिस्सा दोगुना किया जाए।

0 नए इलाकों में विकास कार्यों, सड़कों पर रोशनी और प्रशासनिक खर्च के लिए 2,184 करोड़ का बजट दिया जाए।
0 नए इलाकों में पीने के पानी और सीवर लाइन के लिए 5825.85 करोड़ रुपये का बजट उपलब्ध कराया जाए। जलकल विभाग ने इतनी जरूरत बताई है।
0 स्टांप शुल्क का पूरा दो फीसदी हिस्सा निगम को मिले।
0 औद्योगिक विकास प्राधिकरण की संपत्तियों को गृहकर से बाहर रखने और कुछ श्रेणियों को छूट देने से आमदनी घटी है, उसकी भरपाई की जाए।
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