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राज्यपाल ने सीएम योगी से की मांग, तीन जिलों में लागू हो पुलिस कमिश्नर सिस्टम

Thu, 27 Dec 2018 11:18 AM IST
MANISH sachan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: MANISH sachan Updated Thu, 27 Dec 2018 11:18 AM IST
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governor ram naik says police commissioner system should be executed in three big cities.
रैतिक परेड कार्यक्रम में बोलते राज्यपाल रामनाईक। - फोटो : amar ujala

राज्यपाल राम नाईक ने प्रदेश में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने की वकालत की है। पुलिस वीक के दौरान बृहस्पतिवार को राज्यपाल ने कहा कि महाराष्ट्र की तर्ज पर यूपी में भी पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होनी चाहिए।

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लखनऊ पुलिस लाइन में आयोजित रैतिक पुलिस परेड की सलामी लेने के बाद राज्यपाल पुलिस अधिकारियों व कर्मियों को संबोधित कर रहे थे। 

उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था में सुधार हो रहा है, लेकिन और सुधार की गुंजाइश है। इसके लिए यूपी में भी पुलिस कमिश्नर प्रणाली शुरू करने पर भी विचार किया जाना चाहिए। लखनऊ, कानपुर और गाजियाबाद में पायलट प्रोजेक्ट के तहत इसे शुरू करने पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। परिणाम अच्छा रहने पर अन्य महानगरों में भी इसे लागू किया जाए।
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इस अवसर पर राज्यपाल ने पुलिस के कामों का बखान किया और दो दिन पहले डीजीपी ओमप्रकाश सिंह की ओर से प्रस्तुत आंकड़ों को दोहराया। उन्होंने मीडिया को नसीहत भी दी कि कानून-व्यवस्था से संबंधित अच्छी खबरों का भी प्रकाशन किया जाना चाहिए। मीडिया कर्मियों को सुरक्षा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी पुलिस की है। 

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पहली बार कुंभ का आयोजन इलाहाबाद में नहीं, प्रयागराज में 

राज्यपाल ने कहा कि कुंभ के दौरान पुलिस की भूमिका अहम होती है। उन्हें खुशी है कि सैकड़ों वर्ष में पहली बार कुंभ का आयोजन इलाहाबाद में नहीं, बल्कि प्रयागराज में हो रहा है। 2013 में हुए कुंभ के दौरान भगदड़ मच गई थी जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी। उक्त मामले की जांच के लिए ओंकारेश्वर भट्ट की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग गठित किया गया था। इसने 14 अगस्त 2014 को अपनी रिपोर्ट दी थी। नासिक में इस रिपोर्ट पर अमल किया गया और वहां पिछले दिनों हुआ कुं भ शानदार तरीके से संपन्न हुआ। 

सिपाही होता है सरकार का चेहरा
राज्यपाल ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को भ्रष्टाचार से मुक्त रहने की नसीहत देते हुए कहा कि पुलिस का सिपाही जनता के लिए सरकार का दिखाई देने वाला चेहरा होता है। आम आदमी पुलिस के व्यवहार के आधार पर अपनी राय बनाता है। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा, डीजीपी ओमप्रकाश सिंह मौजूद थे।

राजेश पांडेय को मिला कॅरिअर का चौथा वीरता पदक

प्रांतीय पुलिस सेवा से भारतीय पुलिस सेवा में प्रमोट होने वाले 2005 बैच के आईपीएस राजेश पांडेय को उनके कॅरिअर का चौथा वीरता पदक राज्यपाल ने पहनाया। यह पदक कोलकाता में हुए एनकाउंटर में चार बदमाशों को मार गिराए जाने के मामले में दिया गया है। यह ऑपरेशन यूपी एसटीएफ की टीम ने 12 दिसंबर 1998 को अंजाम दिया था। इसमें पांच लाख रुपये के इनामी बदमाश मनजीत सिंह उर्फ मंगे को गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले पांडेय को 1997 में लखनऊ में सब इंस्पेक्टर आरके सिंह को मारने वाले श्रीप्रकाश शुक्ला गैंग के बदमाश टुनिया राम को मार गिराने के मामले में दिया गया था। 1998 में श्रीप्रकाश शुक्ला को एनकाउंटर में मार गिराने के लिए राजेश पांडेय को वीरता पदक दिया गया था। वहीं 2004 में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के चीफ सालार जंग से मोर्चा लेकर उसे ढेर करने की घटना में भी राजेश पांडेय को वीरता पदक से नवाजा गया था। इसी दिन वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर आतंकियों ने हमला किया था।

विशिष्ट सेवाओं के लिए इन्हें मिला पुलिस पदक

राज्यपाल ने विशिष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रपति का पुलिस पदक भी प्रदान किया। इनमें एडीजी ईओडब्ल्यू अभय कुमार प्रसाद, एडीजी प्रशासन एचआर शर्मा, रिटायर्ड आईजी प्रमोद कुमार मिश्रा, रिटायर्ड आईजी राकेशचंद्र साहू, रिटायर्ड डीआईजी जवाहर, रिटायर्ड एसपी राघवेंद्र सिंह चौहान, रिटायर्ड पुलिस उपाधीक्षक रमन पाल सिंह, रिटायर्ड पुलिस उपनिरीक्षक राम बहादुर सिंह यादव, उपनिरीक्षक रमाकांत पांडेय, रिटायर्ड कांस्टेबल शांति स्वरूप, रिटायर्ड मुख्य आरक्षी नरेश पाल और स्वतेंद्र प्रकाश सिंह शामिल हैं।  

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