राज्यपाल ने सीएम अखिलेश से मांगा जवाब, भ्रष्टाचारियों पर अब तक क्या कार्रवाई की
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लोकायुक्त की विशेष रिपोर्टों पर कार्रवाई न होने से खफा राज्यपाल राम नाईक ने एक बार फिर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को कड़ा पत्र लिखकर पूछा है कि भ्रष्टाचारियों पर क्या कार्रवाई की गई है?
राज्यपाल ने मुख्यमंत्री से लोकायुक्त एवं उप लोकायुक्त की विशेष रिपोर्टों पर राज्य सरकार द्वारा की गई अथवा प्रस्तावित कार्रवाई के साथ उनका और मुख्य सचिव का स्पष्टीकरण मांगा है।
राज्यपाल ने पत्र के साथ सीएम को विशेष रिपोर्टों की सूची भी भेजी है, जिसमें नौ पूर्व मंत्रियों, एक विधायक, 3 नगर पालिका व नगर पंचायत अध्यक्ष तथा 40 अधिकारियों का उल्लेख है।
53 रिपोर्टें भेजी जा चुकी हैं अब तक
राज्यपाल ने सीएम को भेजे गए पत्र में कहा है कि यूपी लोकायुक्त तथा उप लोकायुक्त अधिनियम की धारा 12 (7) के तहत अब तक 53 रिपोर्ट भेजी गई हैं। इसमें मौजूदा लोकायुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्रा द्वारा भेजी गई एक विशेष रिपोर्ट भी शामिल है।
इन रिपोर्टों में से सिर्फ दो पर ही सरकार ने स्पष्टीकरण उपलब्ध कराए हैं। बाकी 51 रिपोर्टों के संबंध में न तो स्पष्टीकरण प्राप्त हुआ है और न ही राज्य विधानमंडल के समझ प्रस्तुत किए जाने की सूचना प्राप्त हुई है।
पहले भी सीएम को चिट्ठी लिख चुके हैं राज्यपाल
लोकायुक्त की विशेष रिपोर्टों पर कार्रवाई न होने से नाराज राज्यपाल राम नाईक ने 12 अगस्त को भी मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखी थी।
उस पत्र में ही लोकायुक्त की विशेष रिपोर्टों पर की गई अथवा प्रस्तावित कार्रवाई के साथ सरकार और मुख्य सचिव से स्पष्टीकरण उपलब्ध कराने की अपेक्षा की गई थी, लेकिन सरकार की ओर से राजभवन को कोई जवाब नहीं भेजा गया।
नसीमुद्दीन समेत नौ पूर्व मंत्रियों की रिपोर्ट ठंडे बस्ते में
लोकायुक्त की ओर से राज्यपाल को भेजी गई विशेष रिपोर्टों में पूर्ववर्ती मायावती सरकार के मंत्रियों के नाम हैं।
जिन पूर्व मंत्रियों के खिलाफ सरकार ने लोकायुक्त की रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल रखा है, उनमें नसीमुद्दीन सिद्दीकी, अवधपाल सिंह यादव, रामवीर उपाध्याय, बादशाह सिंह, रामअचल राजभर, राजेश त्रिपाठी, अयोध्या प्रसाद पाल, रतन लाल अहिरवार व स्वामी प्रसाद मौर्य शामिल हैं।
इसके अलावा जौनपुर की मडियाहूं विधानसभा सीट से तत्कालीन विधायक कृष्ण कुमार सचान के खिलाफ भी भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच करके राज्यपाल को विशेष रिपोर्ट भेजी गई है। इस पर भी सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की है।
रिपोर्ट पर कार्रवाई न होने से लोकायुक्त संगठन बेमकसद
लोकायुक्त की रिपोर्टों पर कार्रवाई में सरकार की हीलाहवाली से नाराज नाईक ने अपने पत्र में कहा है कि इससे लोकायुक्त संगठन का गठन ही बेमकसद हो जाता है।
प्रदेश के नागरिकों को सुशासन का लाभ तभी मिलेगा जब भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
लोकायुक्त तथा उप लोकायुक्त संगठन मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों तथा लोक सेवकों द्वारा अपने पद व शक्ति का दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार करने, अवैध संपत्ति अर्जित करने, लोक संपत्ति को निजी हित में उपयोग लाने की शिकायतों की जांच करने तथा कुशासन समाप्त कर लोक जीवन में शुचिता व सुशासन को सबल बनाने के उद्देश्य से गठित किया गया है।