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'खेती की बात खेत पर' में बोलीं राज्यपाल, प्रधानमंत्री मोदी किसान नहीं फिर भी उनके लिए कर रहे काम

Sat, 15 Feb 2020 08:44 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाराबंकी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाराबंकी Published by: ishwar ashish Updated Sat, 15 Feb 2020 08:44 PM IST
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Governor Anandi Ben Patel on Barabanki visit.
बाराबंकी दौरे पर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल। - फोटो : amar ujala

प्रधानमंत्री किसान नहीं हैं फिर भी उनके लिए काम करे रहे हैं। किसानों के यहां नरेंद्र मोदी जी बड़े हुए। वे किसानों की परेशानी को समझते हैं। इसलिए बजट में कई प्रावधान किए जिसका फायदा सीधे किसानों को मिलेगा। यह बातें शनिवार को जिले के दौलतपुर स्थित पद्मश्री किसान रामसरन वर्मा के आधुनिक कृषि फार्म पर आयोजित ‘खेती की बात खेत पर’ सम्मेलन की मुख्य अतिथि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कही।

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राज्यपाल ने कहा कि रामसरन वर्मा जब कार्यक्रम का आमंत्रण लेकर राजभवन पहुंचे तो उन्होंने अपने नवाचार, रिसर्च, किसानों की उन्नति व रोजगार की बात बताई। उनके काम से प्रभावित होकर मैं उनकी खेती देखने दौलतपुर तक आई।
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राज्यपाल ने कहा कि इंडस्ट्रीज अपनी कमाई के लिए रिसर्च व नवाचार करती हैं। मगर, राम सरन वर्मा अपना नवाचार व रिसर्च किसानों के लिए कर रहे हैं। यह गौरव की बात है। पद्मश्री रामसरन बधाई के पात्र है। आनंदीबेन ने कहा कि मैं किसान की बेटी हूं। देश के कृषि मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला व दिलीप संघानी किसान के बेटे हैं। गुजरात सरकार में श्री रूपाला कृषि मंत्री, दिलीप संघानी सहकारिता मंत्री और मैं शिक्षा व स्वास्थ्य मंत्री थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में हम सब मिलकर इस पर भी काम करते थे।
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इससे पहले सम्मेलन में इफ्को के उपाध्यक्ष एवं गुजरात के पूर्व मंत्री दिलीप संघानी, इफ्को के एमडी डॉ. यूसी अवस्थी, सांसद उपेंद्र रावत व जैविक खेती के बारे में प्रगतिशील किसान श्रीकृष्ण चौधरी ने अपनी बात कही। रामसरन वर्मा ने अपनी उपलब्धियों को गिनाया। अधिक समय देने के लिए राज्यपाल को धन्यवाद दिया।

‘किसानों को मार्केट उपलब्ध कराएं अधिकारी’

राज्यपाल आनंदीबेन ने कहा कि हमारे किसानों के उत्पादों की मार्केटिंग कम है। डीएम व कृषि विभाग के अधिकारी उन्हें मार्केट उपलब्ध कराएं। जहां किसान सीधे अपनी फसल बेच सकें। ऐसा हुआ तो वर्ष 2022 से पहले ही किसानों की आमदनी दोगुनी करने का लक्ष्य पूरा होगा।

उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्र कहते हैं कि सरकारी नौकरी नहीं मिलती। उनमें कितने छात्र किसानी व पशुपालन करते हैं। इसका आकड़ा विश्वविद्यालयों के पास नहीं है। मगर, अब कृषि विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों के पिता व परिवार की भूमि की सूची तैयार की जाएगी। प्रगतिशील किसानों को बुलाकर आधुनिक खेती करने की प्रेरणा दी जाएगी। ताकि वे रोजगार मांगने की बजाय रोजगार देने की स्थित में खड़े दिखें।

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