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बड़े निवेशकों को अतिरिक्त लाभ देने की अड़चन दूर करेगी सरकार, कैबिनेट प्रस्ताव तैयार

Sun, 17 Nov 2019 02:26 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sun, 17 Nov 2019 02:26 PM IST
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Government will solve the problem of giving extra benefits to big investors
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।

प्रदेश सरकार मेगा, मेगा प्लस व सुपर मेगा इकाइयों के निवेशकों को प्रोत्साहन (इंसेंटिव) मिलने में आने वाली अड़चन पूरी तरह दूर करने जा रही है। अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग इसके लिए औद्योगिक निवेशक एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2017 में संशोधन करेगा। नीति में केस-टू-केस इसेंटिव देने की व्यवस्था की जगह तीनों स्तर पर दिए जाने वाले अतिरिक्त लाभ भी स्पष्ट रूप से तय करने की योजना है।

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योगी सरकार ने सत्ता में आने के बाद जिन नीतियों को सबसे पहले मंजूरी दी थी उनमें यूपी औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2017 भी थी। पूर्व की नीतियों की अपेक्षा इसमें कई स्तर पर तार्किक व स्पष्ट प्रावधान हैं, लेकिन मेगा, मेगा प्लस व सुपर मेगा इकाइयों के लिए पिछली सरकारों की तरह केस-टू-केस प्रोत्साहन देने की व्यवस्था कर दी गई।
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इससे सरकार को ऐसी इकाइयों की स्थापना पर नीति से बाहर जाकर केस-टू-केस अतिरिक्त लाभ देने का अधिकार मिल गया। इस अतिरिक्त लाभ को देने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में इंपावर्ड कमेटी बनाई गई। कमेटी की संस्तुतियों पर कैबिनेट का अनुमोदन लेकर अतिरिक्त लाभ देने की व्यवस्था है।

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केस-टू-केस प्रोत्साहन देने की व्यवस्था होगी खत्म

मगर समय-समय पर बड़े उद्योगों की स्थापना पर दिए जाने वाले अतिरिक्त प्रोत्साहन विवाद का विषय बनने से अफसरशाही ने मेगा, मेगा प्लस व सुपर मेगा इकाइयों को दिए जाने वाले अतिरिक्त लाभ पर निर्णय लेने में रुचि नहीं दिखाई। इससे बड़े उद्योगपतियों को अधिक निवेश के बावजूद अतिरिक्त लाभ नहीं मिल पा रहा था। नीति में स्वेटनर की स्पष्टता न होने से इंपावर्ड कमेटी भी सिफारिश से बच रही थी।

औद्योगिक विकास विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार मेगा, मेगा प्लस व सुपर मेगा प्रोजेक्ट को केस-टू-केस प्रोत्साहन देने की व्यवस्था खत्म करेगी। अब अन्य औद्योगिक इकाइयों की तरह मेगा, मेगा प्लस व सुपर मेगा श्रेणी की इकाइयों को दिए जाने वाले अतिरिक्त लाभ भी नीति में ही तय कर दिए जाएंगे।

इससे इन श्रेणी के निवेशकों को निवेश से पहले ही पता रहेगा कि वे अधिक निवेश पर क्या-क्या अतिरिक्त सुविधाएं व इंसेंटिव पाएंगे। अतिरिक्त प्रोत्साहन के लिए उद्यमियों को किसी अफसर या मंत्री के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। ‘पिक एंड चूज’ की विसंगति व रिस्क भी नहीं रहेगा। इससे उद्योगपति प्रोत्साहित होंगे।

ऐसे निवेशकों को अतिरिक्त लाभ का रास्ता होगा साफ

मेगा प्रोजेक्ट : गौतमबुद्ध नगर व गाजियाबाद में 200 करोड़ से अधिक, लेकिन 500 करोड़ से कम पूंजी निवेश या 1000 से अधिक श्रमिकों को रोजगार। मध्यांचल व पश्चिमांचल (गौतमबुद्धनगर व गाजियाबाद छोड़कर) में 150 करोड़ से अधिक, लेकिन 300 करोड़ से कम पूंजी निवेश या 750 से अधिक श्रमिकों को रोजगार। बुंदेलखंड व पूर्वांचल में 100 करोड़ से अधिक, लेकिन 250 करोड़ से कम पूंजी निवेश या 500 से अधिक श्रमिकों को रोजगार।

मेगा प्लस प्रोजेक्ट : गौतमबुद्ध नगर व गाजियाबाद में 500 करोड़ से अधिक, लेकिन 1000 करोड़ से कम पूंजी निवेश या 2000 से अधिक को रोजगार। मध्यांचल व पश्चिमांचल (गौतमबुद्धनगर व गाजियाबाद छोड़कर) में 300 करोड़ से अधिक, लेकिन 750 करोड़ से कम पूंजी निवेश या 1500 से अधिक को रोजगार। बुंदेलखंड व पूर्वांचल में 250 करोड़ से अधिक, लेकिन 500 करोड़ से कम पूंजी निवेश या 1000 से अधिक को रोजगार।

सुपर मेगा प्रोजेक्ट : गौतमबुद्ध नगर व गाजियाबाद में 1000 करोड़ से अधिक पूंजी निवेश या 4000 से अधिक रोजगार। मध्यांचल व पश्चिमांचल (गौतमबुद्धनगर व गाजियाबाद छोड़कर) में 750 करोड़ से अधिक पूंजी निवेश या 3000 से अधिक रोजगार। बुंदेलखंड व पूर्वांचल में 500 करोड़ से अधिक निवेश या 2000 से अधिक को रोजगार।

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