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आपदा पीड़ित परिवारों को राहत देने में आ रहीं अड़चनें दूर करेगी सरकार

Fri, 31 Jan 2020 12:29 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी महेंद्र तिवारी, अमर उजाला, लखनऊ
महेंद्र तिवारी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: विक्रांत चतुर्वेदी Updated Fri, 31 Jan 2020 12:29 PM IST
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Government will remove problems in providing relief to disaster affected families
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

प्रदेश में आपदा प्रभावित लोगों को राहत देने में तरह-तरह की अड़चनें आ रही हैं। इससे आपदा पीड़ित परिवारों को राहत राशि नहीं मिल पाती। राहत आयुक्त ने इन अड़चनों को दूर करने के लिए जिलाधिकारियों से सुझाव मांगे हैं। सरकार जल्द से जल्द अड़चनें दूर कर पीड़ित परिवारों को राहत दिलाने की तैयारी कर रही है।

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केंद्र व राज्य सरकार की ओर से घोषित करीब 20 तरह की आपदाओं में संपत्ति नुकसान से लेकर मृत्यु तक पर प्रदेश सरकार राहत राशि उपलब्ध कराती है। मृत्यु पर 4 लाख रुपये की सहायता की व्यवस्था है। शासन को जनप्रतिनिधियों, फील्ड में आपदा राहत से जुड़ी व्यवस्था से जुड़े कर्मियों व अलग-अलग स्तर पर फील्ड के अधिकारियों से राहत राशि वितरण में कई तरह की दिक्कतों का फीडबैक मिल रहा था। 
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अपर मुख्य सचिव राजस्व रेणुका कुमार के निर्देश पर राहत आयुक्त संजय गोयल ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों से सुझाव मांगे हैं। जिलाधिकारियों ने भी बड़ी संख्या में विसंगतियां व सुझाव भेजे हैं। आपदा प्रबंधन से जुड़े फील्ड से शासन तक के अधिकारियों व कर्मियों की बैठक कर इन विसंगतियों पर चर्चा भी की गई है।
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राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि आपदा पीड़ित परिवारों को बिना किसी परेशानी के आसानी से  राहत मिले, इस संबंध में विचार हो रहा है। जो सुझाव आए हैं, उनका परीक्षण हो रहा है कि विसंगतियों का समाधान किस तरह हो सकता है। इस संबंध में जल्द ही दिशा-निर्देश जारी करने की तैयारी है।
 

केंद्र से घोषित आपदा

बाढ़, सूखा, अग्निकांड, ओलावृष्टि, कोहरा व शीतलहरी, बादल फटना, भूकंप व सुनामी, चक्रवात, भू-स्खलन, कीट-आक्रमण व हिमस्खलन।
 

राज्य सरकार से घोषित आपदा

बेमौसम भारी वर्षा व अतिवृष्टि, बिजली गिरना, आंधी-तूफान, लू-प्रकोप, नाव-दुर्घटना, सर्पदंश, सीवर सफाई व गैस रिसाव, बोरवेल में गिरना, जंगली जानवरों का हमला।

 
राहत मिलने में इस तरह की विसंगतियां 


अज्ञात से आग लगने पर सहायता, ज्ञात कारण पर नहीं
तमाम जिले अज्ञात कारण से आग लगने में नुकसान पर एसडीआरएफ से राहत दे देते हैं। वहीं चूल्हे से, बिजली से, शॉर्ट सर्किट, बीड़ी-सिगरेट व अलाव जैसे ज्ञात कारणों से आग लगने में आम तौर पर राहत नहीं दी जाती। जबकि, इस तरह की आग लगने में प्राय: पीड़ित परिवारों की कोई भूमिका नहीं होती। दुविधा यह भी रहती है कि आग पीड़ित व्यक्ति को इलाज के लिए यदि 12700/4300 रुपये की मदद की गई है और बाद में उसकी मृत्यु हो जाती है तो क्या उसे 4 लाख की सहायता दी जाए?
 
बाढ़ से नुकसान पर मुआवजा, लेकिन डूबने से मृत्यु पर नहीं
नदियों से आई बाढ़ से नुकसान पर मुआवजा दे दिया जाता है लेकिन नहर, तालाब, नदियों में डूबने से हुई मृत्यु पर मुआवजा नहीं दिया जाता। बाढ़ व बरसात से घर गिरने पर कितने नुकसान पर आंशिक नुकसान माना जाए कितने पर पूर्ण, यह तय नहीं है। पूर्ण क्षतिग्रस्त पर 95100 रुपये व आंशिक पर 5200 रुपये दिए जाते हैं।
 
शीतलहरी व कोहरे में घटनाओं से मृत्यु पर नहीं मिलता मुआवजा
शीतलहरी व कोहरे की वजह से तमाम घटनाएं होती हैं। यह भी प्रकृति या दैवी प्रकोप की तरह है। इस दौरान ठंड से मृत्यु की भी तमाम घटनाएं होती हैं, लेकिन आम तौर पर इसके लिए मुआवजा नहीं दिया जाता। कोहरे के कारण बड़ी संख्या में दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें मौतें भी होती हैं। लेकिन, इनमें भी मुआवजा नहीं दिया जाता।
 
कैसे तय हो मुआवजा
यदि किसी घर में कई सदस्य अलग-अलग रह रहे हैं। बारिश या बाढ़ की वजह से वह पुराना जीर्ण-शीर्ण घर गिर जाए तो किस तरह सहायता दी जाए, यह तय नहीं है। सहायता क्या घर में रहने वाले अलग-अलग सभी परिवारों को दी जाएगी या केवल किसी एक परिवार को दी जाएगी?
 
बिजली गिरने से मृत्यु पर मुआवजा मिलने में दिक्कत
बिजली गिरने से बड़ी संख्या में मृत्यु होती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में प्राय: मृत्यु का कारण हार्ट अटैक बता दिया जाता है। ऐसे मामलों में आर्थिक सहायता देने में मुश्किल खड़ी की जाती है। प्राय: ऐसे परिवारों को राहत नहीं दी जाती।
 
गैस रिसाव से मृत्यु पर मुआवजा, लेकिन कौन-सी गैस तय नहीं
गैस रिसाव से मृत्यु पर मुआवजा तय है, लेकिन यह तय नहीं है कि इसमें कौन-कौन सी गैस आएगी। इसी तरह बोरवेल में गिरने पर मृत्यु में तो मुआवजा दिया जाता है लेकिन कुएं में गिरने से मृत्यु पर नहीं दिया जाता।


 
पोस्टमार्टम न हो तो नहीं मिलती सहायता
कई बार किसी दुर्घटना या आपदाग्रस्त होकर मृत्यु का शिकार हुए परिजन का अंतिम संस्कार बिना पोस्टमार्टम कराए कर दिया जाता है। तमाम लोगों को इसकी जानकारी ही नहीं होती कि बिना पोस्टमार्टम व कारण स्पष्ट हुए किसी तरह की आर्थिक सहायता नहीं मिल सकती। प्रभावित लोगों में ज्यादातर कम पढ़े-लिखे, गरीब परिवार होते हैं जिन्हें सर्वाधिक मदद की जरूरत होती है। ऐसे लोगों को राहत नहीं मिल पाती।
 
कई जगह अतिवृष्टि की रिपोर्ट में ही मुश्किल
अतिवृष्टि के लिए वर्षा का मानक तय है। कई बार किसी क्षेत्र विशेष में कुछ ही देर की बारिश से पूरी फसल चौपट हो जाती है। लेकिन, वर्षा मापने के लिए चुनिंदा स्थानों पर ही यंत्र होने की वजह से अतिवृष्टि की रिपोर्ट देने में मुश्किलें होती हैं। वजह, जहां बारिश हुई वहां यंत्र नहीं और जहां यंत्र लगा है, वहां बारिश नहीं। ऐसे में इन इलाकों के किसान व पीड़ित लोग नुकसान झेलने के बावजूद राहत से वंचित रह जाते हैं।

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