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वाराणसी फ्लाईओवर हादसा: जल्द सलाखों के पीछे होंगे दोषी अफसर, शासन ने दिया पुलिस को निर्देश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 18 May 2018 09:19 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में फ्लाईओवर हादसे पर और भी सख्त रुख अपनाया है। शासन ने पुलिस को निर्देश दिए हैं कि वो अपनी जांच का काम जल्द पूरा करे, ताकि गैर इरादतन हत्या के आरोपी अफसरों को जेल भेजा जा सके। पुलिस की तफ्तीश के दायरे में सेतु निगम के हटाए गए परियोजना प्रबंधक से लेकर प्रबंध निदेशक तक को रखा गया है।
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फ्लाईओवर हादसे की जांच के लिए अपर मुख्य सचिव राज प्रताप सिंह की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने गुरुवार की शाम अपनी रिपोर्ट सीएम योगी आदित्यनाथ को सौंप दी।
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इसमें निवर्तमान प्रबंधक निदेशक राजन मित्तल, मुख्य परियोजना प्रबंधक एचसी तिवारी (निंलबित), पूर्व मुख्य परियोजना प्रबंधक गंदा लाल, पूर्व परियोजना प्रबंधक केआर सूद (निलंबित), सहायक अभियंता राजेंद्र सिंह (निलंबित), अवर अभियंता लाल चंद (निलंबित) और राजेश पाल को दोषी ठहराते हुए उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
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रिपोर्ट आने से पहले ही उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने एमडी राजन मित्तल पर कार्रवाई करते हुए उन्हें हटा दिया। मित्तल सपा सरकार में भी सेतु निगम के एमडी पद पर एक जून 2014 से 20 अगस्त 2015 तक रहे थे।
इसलिए उन्हें तत्कालीन पीडब्ल्यूडी मंत्री शिवपाल सिंह यादव का खास माना जाता है। यह दीगर सवाल है कि सपा सरकार के कार्यकाल में ही उन्हें हटा दिया गया था और 11 जुलाई 2017 को उन्हें पुन: यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई।
आगरा में तैनाती के दौरान उन पर चहेते ठेकेदारों को काम देने के आरोप भी लगे, वहीं बलिया में भी उनके खिलाफ अनियमितताएं की शिकायतें की गईं। हालांकि, पीडब्ल्यूडी अधिकारियों का कहना है कि जांच में उन पर आरोप साबित नहीं हो सके।
उच्चस्तरीय समिति की मित्तल के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश के बावजूद उन्हें राजकीय निर्माण निगम के कार्यवाहक प्रबंध निदेशक के पद से न हटाए जाने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
शासन के एक अधिकारी ने नाम न छापने के अनुरोध के साथ बताया कि पूरे मामले में पुलिस को जल्द अपनी तफ्तीश पूरी करके चार्जशीट दाखिल करने के लिए कहा गया है।
चूंकि, फ्लाईओवर बना रहे सेतु निगम के अफसरों, कर्मचारियों, पर्यवेक्षण अधिकारी और ठेकेदार व उनके कर्मचारियों पर गैर इरादतन हत्या और सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुंचाने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है, इसलिए पर्यवेक्षण अधिकारी के रूप में मुख्य परियोजना प्रबंधक और एमडी स्तर तक के अधिकारी पुलिस तफ्तीश के दायरे में आ गए हैं।
उन्होंने बताया कि जितनी गंभीरता से उच्चस्तर पर इस मामले को लिया जा रहा है, जल्द ही ये सभी अधिकारी सलाखों के पीछे होंगे।