कैबिनेट के फैसले को टरका रही नौकरशाही, बिना काम के लाखों की सैलरी उठा रहे अधिकारी
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मनोरंजन कर निरीक्षकों के समायोजन से जुड़े कैबिनेट के फैसले पर नौकरशाही करीब 8 महीने से कुंडली मारे बैठी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मनोरंजन कर विभाग के पांच संवर्गों के अधिकारियों का वाणिज्य कर विभाग में समायोजन कर दिया गया था, लेकिन राजस्व वसूली से जुड़े सबसे अहम निरीक्षकों का समायोजन अभी तक नहीं हो सका है।
केंद्र सरकार की ‘एक देश, एक कर’ की अवधारणा के तहत जीएसटी लागू होने के बाद मनोरंजन कर विभाग का विलय वाणिज्य कर विभाग में करने का फैसला योगी कैबिनेट ने 6 फरवरी को किया था।
फैसले में संयुक्त आमोद और पणिकर आयुक्त, उप आमोद और पणिकर आयुक्त, सहायक आमोद और पणिकर आयुक्त, जिला आमोद और पणिकर अधिकारी, संख्या अधिकारी और आमोद एवं पणिकर निरीक्षक (मनोरंजन कर निरीक्षक) संवर्ग को वाणिज्य कर विभाग में समायोजित किया गया था।
लेकिन इस फैसले के करीब तीन महीने बाद संस्थागत वित्त कर एवं निबंधन विभाग ने 24 अप्रैल को जब विलय संबंधी अधिसूचना जारी की तो उसमें निरीक्षक संवर्ग को छोड़ दिया। बाकी पांच संवर्गों के समायोजन का ही आदेश किया गया।
इस अधिसूचना में यह टिप्पणी अंकित कर दी गई कि निरीक्षकों के विलय के बारे में आदेश बाद में जारी किए जाएंगे। अधिसूचनाजारी हुए भी करीब पांच महीने बीत गए लेकिन मनोरंजन कर विभाग के 101 निरीक्षकों का समायोजन अभी तक लटका हुआ है।
हालांकि, इनका वेतन वाणिज्य कर विभाग ने देना शुरू कर दिया है लेकिन तकनीकी तौर पर विलय का आदेश जारी नहीं होने से इनसे काम नहीं लिया जा रहा है। इससे सरकार को हर महीने करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
बिना काम के ही निरीक्षकों को दिया जा रहा है वेतन
नौकरशाही की अड़ंगेबाजी से सरकारी खजाने को दो तरह से चपत लग रही है। पहला यह कि जिन निरीक्षकों ने मनोरंजन विभाग में रहते हुए पिछले वित्तीय वर्ष में 725 करोड़ रुपये का राजस्व वसूल कर सरकार को दिया था, उन निरीक्षकों ने इस वित्तीय वर्ष में एक पैसे की वसूली नहीं की है। दूसरा नुकसान यह है कि विभाग के 110 निरीक्षकों को 5 महीने से बैठाकर सरकारी खजाने से हर महीने लाखों रुपये वेतन दिया जा रहा है।