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एमएसएमई का पेमेंट रोकने पर तीन गुना ब्याज देना पड़ेगा सरकारी विभागों को
Sat, 31 Aug 2019 02:39 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अजीत बिसारिया, लखनऊ
अजीत बिसारिया, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 31 Aug 2019 02:39 AM IST
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सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों से सामान खरीदने पर भुगतान में देरी अब सरकारी विभागों को महंगी पड़ेगी। उन्हें आरबीआई की निर्धारित बैंक ब्याज दर का तीन गुना ब्याज देना पड़ेगा। साथ ही बिना वाजिब वजह पेमेंट में देरी पर दोषी अधिकारियों के लिए सजा का प्रावधान भी होगा।
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इसके लिए नए प्रस्तावित एक्ट में कड़े प्रावधान किए जा रहे हैं। नए स्थापित एमएसएमई उद्यमों को पांच साल तक कोई लाइसेंस लेने की भी जरूरत नहीं होगी।
वाराणसी में पेमेंट न मिलने पर पीडब्ल्यूडी ठेकेदार के मुख्य अभियंता के कक्ष में खुदकुशी करने की घटना सामने आने के बाद प्रदेश सरकार ने ऐसी घटना के दोहराव को रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाने का निर्णय लिया है। एमएसएमई उद्यमों को प्रोत्साहित करने के साथ ही समय से भुगतान के लिए अधिनियम का प्रारूप तैयार करवा रही है।
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प्रस्तावित एक्ट में यह व्यवस्था की जा रही है कि सरकारी विभागों को अपनी जरूरत का करीब 25 प्रतिशत सामान अनिवार्य रूप से एमएसएमई उद्यमों से खरीदना होगा। तीन महीने के भीतर भुगतान भी करना होगा। अभी साल, दो साल और तीन साल तक भुगतान पेंडिंग रहने की बेशुमार शिकायतें हैं।
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प्रस्तावित एक्ट में यह प्रावधान किया जा रहा है कि तीन महीने से ज्यादा देरी होने पर बैंक दर से तीन गुना ब्याज के साथ मूल राशि संबंधित उद्यमी को चुकानी होगी। बैंक दर वह ब्याज दर होती है, जिस पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया विभिन्न बैंकों को लोन देती है।
यहां बता दें कि वाराणसी में ठेकेदार अवधेश श्रीवास्तव के खुद को गोली मार लेने के बाद अधिकारियों के स्तर पर पेमेंट में देरी को दंडात्मक कार्रवाई से जोड़े जाने का फैसला भी ले लिया गया है। यानी, पेमेंट में अनावश्यक देरी पाए जाने पर प्रस्तावित एक्ट में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान किया जा रहा है।
एक्ट में यह व्यवस्था होने पर अधिकारियों को कोर्ट से भी राहत नहीं मिल पाएगी। साथ ही एक्ट के अनुसार कोर्ट सजा भी सुना सकेगा। पेमेंट संबंधी विवाद निदशेक, उद्योग की अध्यक्षता में गठित फैसिलिटेशन काउंसिल सुनेगी। उसके अधिकार भी बढ़ाए जाएंगे।
पांच साल तक बिना लाइसेंस चला सकेंगे एमएसएमई श्रेणी के उद्योग
राजस्थान की तर्ज पर एमएसएमई उद्यमों को पांच साल तक बिना किसी लाइसेंस के चलाने की छूट भी दी जाएगी। हालांकि, राजस्थान में यह समयसीमा तीन साल है, जबकि यूपी के प्रस्तावित एक्ट में इसे पांच साल करने पर विचार चल रहा है। प्रस्तावित एक्ट में ओडीओपी की ब्रांडिंग की भी व्यवस्था होगी। इस ब्रांडिंग में सरकार की भूमिका भी अहम होगी।
एमएसएमई सेक्टर के लिए हम एक्ट लाने जा रहे हैं, जिसमें इस सेक्टर से जुड़े उद्यमियों के हित में महत्वपूर्ण प्रावधान होंगे।
सिद्धार्थनाथ सिंह, मंत्री, एमएसएमई