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इतने झाड़ू तो लाओ कि गंदगी साफ हो जाए
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 22 Apr 2014 10:03 AM IST
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झाड़ू
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वाले साहबान इन दिनों राजधानी के गली-मोहल्ले में इसी उम्मीद से खाक छान
रहे हैं कि शायद उनकी किस्मत चमक जाए।
वोटर उन्हें मुंबई की फिल्मी दुनिया से दिल्ली की नेतानगरी की दुनिया में पहुंचा दें। जहां वे जाते हैं समर्थक एक ही नारा लगाते सुनाई देते हैं कि आ गए भई आ गए..।
कहीं भी जाएं तो बस यही गूंजता है। जनता उनसे वोट के लिए कम, ऑटोग्राफ-फोटोग्राफ के लिए ज्यादा मिलती है। ग्रुप में एक से एक शेर हैं, लेकिन कहते हैं कि शेर को ही सवा शेर मिल जाते हैं।
बीते दिनों पुराने लखनऊ पहुंचे नेताजी के दल को कुछ लोगों ने उनके नारे पर घेर लिया।
गलियों से निकले कुछ मसखरों ने मजाक-मजाक में टोक ही दिया कि बाकी सब तो ठीक है, लकिन पहले इतने झाड़ू तो लाओ कि यहां की सफाई हो जाए। हाथ जोड़े सारे समर्थक झेंपते हुए आगे बढ़ गए।
वोटर उन्हें मुंबई की फिल्मी दुनिया से दिल्ली की नेतानगरी की दुनिया में पहुंचा दें। जहां वे जाते हैं समर्थक एक ही नारा लगाते सुनाई देते हैं कि आ गए भई आ गए..।
कहीं भी जाएं तो बस यही गूंजता है। जनता उनसे वोट के लिए कम, ऑटोग्राफ-फोटोग्राफ के लिए ज्यादा मिलती है। ग्रुप में एक से एक शेर हैं, लेकिन कहते हैं कि शेर को ही सवा शेर मिल जाते हैं।
बीते दिनों पुराने लखनऊ पहुंचे नेताजी के दल को कुछ लोगों ने उनके नारे पर घेर लिया।
गलियों से निकले कुछ मसखरों ने मजाक-मजाक में टोक ही दिया कि बाकी सब तो ठीक है, लकिन पहले इतने झाड़ू तो लाओ कि यहां की सफाई हो जाए। हाथ जोड़े सारे समर्थक झेंपते हुए आगे बढ़ गए।