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कौन बांधे बिल्ली के गले में घंटी
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 21 Aug 2014 02:03 PM IST
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उपचुनावों की जंग में हाथी की चाल देखने को नहीं मिलेगी।
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बहनजी के उपचुनाव न लड़ने के फैसले से उनके कुछ लोग इत्तेफाक नहीं रखते।
कुछ समय पहले तक अहम ओहदे पर रहे एक बसपा नेता ने कहा, हम अपने वोट बैंक को दूसरे दलों का रास्ता दिखा रहे हैं।
लोकसभा चुनाव में खाता नहीं खुला तो क्या उपचुनाव से किनारा कर लें? हम मिशन के लिए राजनीति कर रहे हैं, अपने दल के लिए कर रहे हैं, दूसरों के लिए नहीं।
पूर्व को-ऑर्डिनेटर की टिप्पणी पर एक पूर्व विधायक ने उन्हें सलाह दी, बहनजी तक अपनी बात पहुंचाइए।
इस पर वह तपाक से पलट गए। कहा, बहनजी पार्टी हित में ही फैसला ले रही होंगी। पूर्व विधायक ने कहा, ऐसा नहीं है। असल बात यह है कि बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे।