मकान की किस्त नहीं चुका पा रहे लोगों के लिए अच्छी खबर
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लखनऊ विकास प्राधिकरण ऐसे हजारों आवंटियों को राहत देने की तैयारी कर रहा है जो प्लॉट की किस्त नहीं चुका सके और अब पूरा पेमेंट कर प्लॉट पाना चाहते हैं। ऐसे मामलों में एलॉटमेंट के समय की मूल दर के भुगतान की व्यवस्था शुरू करने की तैयारी है।
बहरहाल अभी ऐसे मामलों में रिन्यूवल (पुनर्जीवन) के लिए मौजूदा दर से भुगतान करना पड़ता है। इस संबंध में एलडीए की बोर्ड मीटिंग में विस्तृत प्रस्ताव लाने की तैयारी की जा रही है।
ऐसे प्लॉट जिनमें कम भुगतान की वजह से नोटिस हो चुका है, पर वह किसी अन्य के नाम पर आवंटित नहीं किया गया है तो उसका रिन्यूवल किया जा सकता है। ऐसे मामलों में प्राधिकरण में पुनर्जीवन को लेकर अधिकारियों की कमेटी विशेष परिस्थितियों में फैसला करती है।
आंवटियों को चुकानी होगी प्लाट की मौजूदा कीमत
मगर मौजूदा नियमों के अनुसार बकाया का भुगतान मूल दर से नहीं बल्कि मौजूदा दर से करना होता है। मसलन किसी को भूखंड 1988 में आवंटित हुआ और पुनर्जीवन 2015 में कराया जा रहा है तो मौजूदा सेक्टर या सर्किल रेट से भुगतान करना पड़ेगा।
ऐसे में कीमत के बीच लाखों रुपये का अंतर आ जाता है। ये अंतर भले ही बहुत ज्यादा हो मगर बाजार भाव से फिर भी बहुत कम होता है। ऐसे में मूल दर पर रिन्यूवल की व्यवस्था अगर शुरू होती है तो ऐसे आवंटियों को बहुत फायदा मिलेगा।
एलडीए भले ही बोर्ड मीटिंग में विस्तृत प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा हो एलडीए कर्मचारी यूनियन ने इसका विरोध करने का फैसला किया है। यूनियन का साफ कहना है कि इससे न केवल प्राधिकरण को भारी नुकसान होगा, बल्कि भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा मिलेगा। घूसखोरी बढ़ेगी। औने-पौने दाम पर महंगे भूखंड रसूखदारों के हवाले हो जाएंगे।
पुनर्जीवन के मामलों में आवंटी को प्लॉट का नया रेट चुकाना पड़ता है। वहीं चक्रवृद्धि ब्याज का बोझ भी एलॉटी पर पड़ता है। इससे उसे बहुत ज्यादा नुकसान होता है। इसलिए इस नियम को बदल कर ऐसे मामलों में पुराना रेट ही लेने को लेकर प्रस्ताव एलडीए बोर्ड में रखा जाएगा।
सत्येंद्र कुमार सिंह, उपाध्यक्ष, लविप्रा
इससे रसूखदारों को फायदा मिलेगा। हर साल प्राधिकरण को करोड़ों रुपये का नुकसान होगा। जिसने समय पर किस्त नहीं जमा की, उसको वर्तमान दर पर ही प्लॉट देना चाहिए। बाजार दर के मुकाबले वर्तमान एलडीए दर बहुत कम होती है। ये बहुत ही गलत फैसला होगा।
शिवप्रताप सिंह, अध्यक्ष, लविप्रा कर्मचारी यूनियन