फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Gomti could not be cleaned even after spending 1800 crore

1800 करोड़ रुपये हो गए खर्च, फिर भी नहीं संवर पाई गोमती

Thu, 04 Feb 2021 01:26 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 04 Feb 2021 01:26 AM IST
विज्ञापन
Gomti could not be cleaned even after spending 1800 crore
गोमती नदी में गिरता कुकरैल नाला। - फोटो : ??? ?????
सपा सरकार में करीब 1800 करोड़ रुपये के खर्च से गोमती को संवारने का काम शुरू हुआ। तट सौंदर्यीकरण योजना में करीब 95 प्रतिशत बजट खर्च कर दिया गया।
विज्ञापन

इसके बावजूद करीब 40 प्रतिशत काम अधूरा पड़ा है। नदी को सुंदर और स्वच्छ बनाने का उद्देश्य तो पूरा नहीं हुआ।
इसके उलट नदी से जुड़े वेटलैंड को खत्म कर दिया गया। नदी की वजह से होने वाले भूगर्भ जल रीचार्ज को भी सीमित कर दिया गया।
पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों पर काम कर रहे विशेषज्ञों का मानना है कि रिवरफ्रंट के सौंदर्यीकरण ने नदी को संवारने की जगह इसको नुकसान पहुंचाने का काम किया है।
प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों का खुद मानना है कि इससे पर्यावरण पर होने वाले प्रभाव का आकलन नहीं किया गया।
इसकी वजह से लंबे समय में बुरे परिणाम भी देखने को मिल सकते हैं। अब जरूरत है कि ऐसे कुछ उपाय किए जाएं कि नदी और भूगर्भ जल के आपसी जुड़ाव को वापस लाया जा सके ।
विज्ञापन

सीवर अभी भी नदी में गिर रहे
कुकरैल और हैदर कैनाल सहित करीब 22 नाले पूरी या आंशिक रूप से अब भी नदी में गिर रहे हैं। रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट में इन नालों को टैप कर सीवर को एसटीपी तक ले जाना था। इसके उलट नदी किनारे अब भी पाइप बिना काम पूरा किए पड़े हैं। पंपिंग स्टेशन भी कुकरैल नाले के पानी को रोेकने में उपयोग नहीं हो रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन

टॉयलेट, फव्वारे ताले में बंद
रिवरफ्रंट के विकास और यहां घूमने आने वाले लोगों के लिए टॉयलेट, जनसुविधा परिसर, फव्वारे बनाए गए। इनके उपयोग की जगह ताले में सुविधाएं बंद हैं। करीब चार साल से जहां कंटेनर्स में बंद फव्वारा खराब हो रहा है। वहीं टॉयलेट के ताले नहीं खुलने से इनका उपयोग नहीं हो पा रहा है।
बिजली तक रिवरफ्रंट को नहीं मिल पाई
8.5 किमी लंबे रिवरफ्रंट पर करीब 90 फ्लडलाइट सिंचाई विभाग ने लगवाईं। किनारों पर पार्क संवारने का काम तीन साल के लिए एलडीए को दे दिया गया। लेकिन, बिजली कनेक्शन नहीं हो पाने से आज भी शाम होते ही पूरा रिवरफ्रंट अंधेरे में डूब जाता है। मार्च में अब एलडीए का समय पूरा हो रहा है। ऐसे में आगे क्या हाल होगा? यह देखने वाला होगा।

रिवरफ्रंट विकसित हो, जरूरत नदी संरक्षण की
पर्यावरणविद डॉ. वैंकटेश दत्ता का कहना है कि रिवरफ्रंट के विकास पर केवल पैसा खर्च करना ही उद्देश्य नहीं होना चाहिए। असल में नदी और इससे जुड़े पूरे ईको-सिस्टम का संरक्षण भी होना चाहिए। गोमती नदी भूगर्भ जल पर आधारित नदी है। ऐसे में नदी किनारे या आसपास के वेटलैंड से इसे अलग करना बिल्कुल भी उचित नहीं है। अब अधूरे कामों को पर्यावरण पर असर को ध्यान में रखते हुए पूरा किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed