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पारिवारिक विवाद के निपटारे को दिखाया दारुल कजा का रास्ता

Thu, 28 Feb 2019 01:54 AM IST
sahaj sahaj न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ Published by: sahaj sahaj Updated Thu, 28 Feb 2019 01:54 AM IST
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Go to Darul kaza for family disputes
क्या चीन इस्लाम को मानसिक बीमारी की तरह ट्रीट कर रहा है।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की दारुल कजा कमेटी की निगरानी में तीन दिवसीय तरबियत कजा कैंप के दूसरे दिन भी मुसलमानों को पारिवारिक मामलों के लिए दारुलकजा का रास्ता दिखाया गया। उलमा ने कहा कि मुसलमान छोटे-छोटे मामलों कोे लेकर इधर-उधर न भटकें। कुरान की  रोशनी में दारुलकजा में अपने मामले हल कराएं। बुधवार को दारुल उलूम फरंगी महल में ‘दारुल कजा हिन्दुस्तान के संविधान की रोशनी में’ विषय पर दूसरे सत्र को संबोधित करते हुए मौलाना काजी मुहम्मद कासिम ने कहा कि परिवार में छोटे-छोटे मामलों को न्यायालयों में ले जाने की जरूरत नहीं है। इसके लिए देश में दारुलकजा है यहां मामलों को आसानी से निपटारा किया जा रहा है। अधिवक्ता फ रहान हबीब नदवी ने कहा कि भारत में उलमा की कोशिशों से दारुल कजा कायम हुए और काम कर रहे हैं जिनमें फौजदारी के मामले कुबूल नहीं किए जाते हैं। पहले से अदालत में चल मामले भी स्वीकार नहीं किए जाते। यह संस्थान हिंदुस्तान के संविधान के अनुसार सिर्फ  अपने धार्मिक मामलों की हद तक मुसलमानों के पारिवारिक मामलों को हल करने की खिदमात को अंजाम दे रहे हैं। मौलाना काजी तबरेज आलम ने कहा कि दारुल कजा में कम खर्च में मामले निपटाए जा रहे हैं। मौलाना काजी वसी अहमद कासमी ने ‘दारुल कजा की अमली कार्रवाई’ विषय पर रोशनी डाली। वहीं मौलाना मुहम्मद शमीम अकरम ने शरीयत पर लोगों के सवालों के जवाब दिए।
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