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UP News: खेलते समय बच्ची के सिर में धंसी गोली... बार-बार बदल रही थी जगह, डॉक्टरों ने जटिल ऑपरेशन कर बचाई जान

Thu, 29 Jan 2026 07:08 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Thu, 29 Jan 2026 07:08 PM IST
सार

राजधानी में खेलते समय बच्ची के सिर में गोली धंस गई थी। वह बार-बार अपनी जगह बदल रही थी। डॉक्टरों ने ऑपरेशन करके बच्ची की जान बचाई। डॉक्टरों का दावा है कि यह बेहद दुर्लभ व जटिल सर्जरी थी। 

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girl was shot in head while playing in Lucknow Doctors performed complex operation to save her life
ऑपरेशन (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी लखनऊ में केजीएमयू के डॉक्टरों ने दुर्लभ व जटिल सर्जरी करके तीन साल की बच्ची की जान बचाने में कामयाबी हासिल की है। बच्ची के सिर में खेलते वक्त गोली धंस गई थी। डॉक्टरों ने ऑपरेशन करके सुरक्षित तरीके से गोली निकाल ली है। बच्ची कई दिनों तक आईसीयू में भर्ती रही। इलाज के बाद उसकी सेहत में अब सुधार हुआ है। केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने इस दुर्लभ और जटिल मामले के सफल इलाज पर पूरी चिकित्सा टीम को बधाई दी।

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न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉ. अंकुर बजाज ने बताया कि बच्चे को 16 दिसंबर 2025 की शाम लगभग 4 बजे गाजीपुर की रहने वाली बच्ची लक्ष्मी (3) के माथे के बाईं तरफ गोली लगी थी। चोट के करीब 4.30 घंटे बाद एक बाहरी अस्पताल में किए गए सीटी स्कैन में गोली मस्तिष्क के बाएं क्षेत्र में हिस्से में पाई गई। अगले दिन चोट के लगभग 20 घंटे बाद जब बच्चे को केजीएमयू लाया गया था। 

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रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती थी गोली

दोबारा सीटी स्कैन किया गया। इसमें यह बात सामने आई कि गोली मस्तिष्क के गहरे बेसल क्षेत्र की ओर खिसक चुकी है। डॉ अंकुर बजाज ने बताया कि यह स्थिति अत्यंत गंभीर थी, क्योंकि गोली लगातार अपना स्थान बदल रही थी। जो मस्तिष्क की महत्वपूर्ण रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती थी।

इसी आशंका को देखते हुए चिकित्सकों ने सर्जरी से पहले सीटी एंजियोग्राफी कराने का निर्णय लिया। हालांकि, चोट के लगभग 25 घंटे बाद की गई। इस जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि गोली एक बार फिर खिसककर सिर के भीतर दूसरे क्षेत्र में पहुंच चुकी थी। क्रमिक जांचों से यह स्पष्ट हुआ कि यह माइग्रेटरी या वांडरिंग इंट्राक्रेनियल बुलेट का अत्यंत दुर्लभ मामला है।
 

इंट्रा ऑपरेटिव विधि से मिली सफलता

सर्जरी के दौरान सबसे बड़ी चुनौती गोली की लगातार बदलती स्थिति थी। इसे इंट्राऑपरेटिव फ्लोरोस्कोपी की मदद से वास्तविक समय में ट्रैक किया गया। इससे आसपास के मस्तिष्क ऊतकों को न्यूनतम क्षति पहुंचाते हुए 3.30 घंटे की सर्जरी के बाद सुरक्षित तरीके से निकाला गया।

सर्जरी के बाद सुधार, बच्चे के हाथ व पैर में आई जान

डॉ. अंकुर बजाज ने बताया सर्जरी के बाद बच्ची को पीडियाट्रिक आईसीयू में रखा गया था। वहां बाल रोग विभाग की टीम ने उसकी सेहत की निगरानी में जुटी थी। पांच दिन तक बच्ची वेंटीलेटर सपोर्ट पर रही। वेंटीलेटर हटने के बाद कई दिनों तक वह आईसीयू में रखी गई थी। गोली लगने की वजह बच्ची का एक पैर व हाथ ने काम करना बंद कर दिया था। इलाज के बाद बच्ची के हाथ-पैर ने काम करना शुरू कर दिया है।

ऑपरेशन टीम में यह डॉक्टर रहे शामिल

डॉ. अंकुर बजाज, डॉ. अनूप सिंह, डॉ. अंकन बसु और डॉ. श्रद्धा न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. बी. के. ओझा व एनेस्थीसिया की डॉ. मोनिका कोहली और डॉ. नीलकमल शामिल रहे।
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