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गिरधारी विश्वकर्मा एनकाउंटर की होगी न्यायिक जांच, परिजनों ने उठाए थे सवाल
Mon, 08 Mar 2021 08:32 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 08 Mar 2021 08:32 PM IST
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गिरधारी, एनकाउंटर स्थल पर मौजूद पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला
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पिछले दिनों लखनऊ के विभूतिखंड थाना क्षेत्र में हुए गिरधारी विश्वकर्मा के एनकाउंटर की न्यायिक जांच होगी। सोमवार को हुए कैबिनेट बाई सर्कुलेशन में यह निर्णय लिया गया है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश पंकज जायसवाल को न्यायिक आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है।
यह पूरा मामला अजीत सिंह हत्याकांड से जुड़ा हुआ है जिसे 6 जनवरी को विभूति खंड में गोलियों से भून दिया गया था। इस घटना में बतौर शूटर गिरधारी विश्वकर्मा ने बतौर शूटर काम किया था। गिरधारी के एनकाउंटर के बाद परिजनों ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए थे। इसके बाद कुछ वकीलों ने सीजेएम कोर्ट में याचिका दायर की थी जिसमें पुलिस कमिर्यों पर एपॅआईआर का आदेश हुआ। इस आदेश पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी।
इसी मामले में पुलिस ने पूर्व सांसद धनंजय सिंह को 120 का मुल्जिम बनाया था। धनंजय पर 25 हजार रुपये का पुरस्कार घोषित किया था, जिसके बाद धनंजय ने प्रयागराज में एमपी एमएलए कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। हाल के दिनों में विकास दुबे के बाद यह दूसरा मामला है जिसमें न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया गया है।
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यह पूरा मामला अजीत सिंह हत्याकांड से जुड़ा हुआ है जिसे 6 जनवरी को विभूति खंड में गोलियों से भून दिया गया था। इस घटना में बतौर शूटर गिरधारी विश्वकर्मा ने बतौर शूटर काम किया था। गिरधारी के एनकाउंटर के बाद परिजनों ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए थे। इसके बाद कुछ वकीलों ने सीजेएम कोर्ट में याचिका दायर की थी जिसमें पुलिस कमिर्यों पर एपॅआईआर का आदेश हुआ। इस आदेश पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी।
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इसी मामले में पुलिस ने पूर्व सांसद धनंजय सिंह को 120 का मुल्जिम बनाया था। धनंजय पर 25 हजार रुपये का पुरस्कार घोषित किया था, जिसके बाद धनंजय ने प्रयागराज में एमपी एमएलए कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। हाल के दिनों में विकास दुबे के बाद यह दूसरा मामला है जिसमें न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया गया है।
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