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Lucknow News: गैंस सिलिंडर की किल्लत ने बढ़ाए लकड़ी व कोयले के भाव

Fri, 13 Mar 2026 02:28 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 13 Mar 2026 02:28 AM IST
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Gas cylinder shortage has increased the prices of wood and coal.
लकड़ी व कोयला लेने पहुंचे लोग।
लखनऊ। राजधानी में गैंस सिलिंडर की किल्लत और उसकी कालाबाजारी ने लकड़ी और कोयला के दाम भी बढ़ा दिए हैं। 500 से 700 रुपये क्विंटल मिलने वाली लकड़ी की कीमत 800 से 1000 तक पहुंच गई है। इसी तरह, 30 से 40 रुपये किलो की दर से मिलने वाला कोयला 45 से 65 रुपये की दर से मिलने लगा है।
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उत्तर प्रदेश टेंट कैटरर्स एंड डेकोरेटर वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार ने बताया कि बृहस्पतिवार को राजधानी में 400 से 450 शादियां हुईं, जबकि करीब 100 छोटे स्तर पर कार्यक्रम हुए। इन आयोजनों में 1.80 लाख से अधिक लोगों के लिए खाना बनाने का टेंडर मिला। गैस सिलिंडर के अभाव में कोयला और लकड़ी के सहारे ही खाना बनाया गया।
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कैटरर्स राहुल ने बताया कि दो महीने पहले शादी की बुकिंग की थी। उसके आधार पर प्रति थाली का रेट तय किया था, लेकिन गैस सिलिंडर की किल्लत ने परेशानी बढ़ा दी। युद्ध के प्रभाव से लखनऊ में सिलिंडर के साथ-साथ सब्जियों के भाव भी बढ़ गए। इससे 30 से 35 प्रतिशत नुकसान पर तय बुकिंग के आधार पर खाना बनाना पड़ा। उन्होंने बताया कि आईआईएम स्थित महर्षि स्कूल परिसर में चल रहे कार्यक्रम में 400 लोगों का खाना लकड़ी की मदद से खाना बनाया गया।
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होलिका में जलीं आधी लकड़ियां गायब
होलिकादहन के दौरान राजधानी में 3700 से अधिक जगहों पर लकड़ी जलाई गई। इनमें बड़ी संख्या में लकड़ियां पूरी तरह से नहीं जली थी। 150 से अधिक स्थानों पर बृहस्पतिवार को आधी से जली लकड़ियां गायब मिलीं। सहारागंज के रहने वाले रोहित ने बताया कि भैसाकुंड मार्ग पर बृहस्पतिवार सुबह अधजली लकड़ियां गायब थीं।
बुकिंग के एक सप्ताह बाद पहुंचा सिलिंडर
हजरतगंज के रहने वाले महेश कुमार ने एक सप्ताह पहले निजी गैस एजेंसी से सिलिंडर बुक किया था। बड़ी मशक्कत के बाद बृहस्पतिवार को उन्हें सिलिंडर मिला। गैस एजेंसी के एक कर्मचारी ने बताया कि साइकिल की मदद से हर दिन 15 से 20 सिलिंडर भेजते थे, लेकिन इन दिनों पांच सिलिंडर भी भेजना मुश्किल हो गया है।
नहीं मिली भट्ठी, ईंट से बनाया चूल्हा
पुराने लखनऊ के मोहम्मद फैसल ने बताया कि गैस सिलिंडर की वजह से परेशानी बढ़ती जा रही है। बुधवार को ईंट का चूल्हा बनाकर खाना बनाया गया। भट्ठी के लिए भी तीन से चार दिन पहले ऑर्डर देना पड़ रहा है, कीमत भी बहुत है।

काम करना हो रहा मुश्किल
अवध कैटरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय टिक्का ने बताया कि सिलिंडर नहीं मिल रहा है। कारीगर लकड़ी पर खाना बनाने को राजी नहीं है। एक आयोजन में कम से कम 15 सिलिंडर की जरूरत पड़ती है और 35 से 40 आइटम तैयार किए जाते हैं। अब सभी काम करना मुश्किल हो रहा है।

लकड़ी व कोयला लेने पहुंचे लोग।

लकड़ी व कोयला लेने पहुंचे लोग।

लकड़ी व कोयला लेने पहुंचे लोग।

लकड़ी व कोयला लेने पहुंचे लोग।

लकड़ी व कोयला लेने पहुंचे लोग।

लकड़ी व कोयला लेने पहुंचे लोग।

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