फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Ganga Expressway: The reality of flooding has come to light, the expressway level was lowered instead of raisi

गंगा एक्सप्रेसवे: सामने आई पानी भरने की वजह, बिजली की लाइन ऊपर करने के बजाय नीचे किया गया एक्सप्रेसवे का लेवल

Mon, 28 Sep 2026 08:46 PM IST
रोहित मिश्र अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला लखनऊ
अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Mon, 28 Sep 2026 08:46 PM IST
सार

Ganga Expressway: बीते दिनों लगातार बारिश की वजह से उन्नाव के पास गंगा एक्सप्रेसवे पर पानी भरने के वीडियो और तस्वीरें सामने आए थे। अब इस मामले की सच्चाई सामने आई है। 
 

विज्ञापन
Ganga Expressway: The reality of flooding has come to light, the expressway level was lowered instead of raisi
गंगा एक्सप्रेसवे पर भरा पानी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गंगा एक्सप्रेसवे पर 132 केवी की ट्रांसमिशन लाइन और कानपुर एनएच को क्रॉस करने के लिए बनाए गए रैंप में तकनीकी खामी सामने आई है। एचटी लाइन की निर्धारित ऊंचाई बनाए रखने के लिए उसे ऊपर उठाने के बजाय रैंप का लेवल करीब तीन मीटर नीचे कर दिया गया। इससे रैंप में ही जलभराव हो गया। स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह के निरीक्षण में खामी सामने आने पर उन्होंने स्वतंत्र इंजीनियरिंग कंपनी पर पेनाल्टी और ठेकेदार को चेतावनी देने के निर्देश दिए हैं।

विज्ञापन


मनोज सिंह ने बताया कि नियमों के अनुसार तकनीकी समाधान के तौर पर 132 केवी लाइन को करीब तीन मीटर ऊपर उठाने की जरूरत थी। इसके बजाय रैंप का लेवल ही नीचे कर दिया गया। बताया गया कि रैंप का लेवल सी लेवल के हिसाब से करीब 127 मीटर होना चाहिए था, लेकिन इसे करीब 124 मीटर पर बना दिया गया। इससे लाइन और सड़क के बीच जरूरी गैप तो बनाए रखने की कोशिश हुई, लेकिन सड़क की डिजाइन और जल निकासी प्रभावित हो गई।

विज्ञापन

यूपीडा के संज्ञान में लाए बिना हुआ ये काम

Ganga Expressway: The reality of flooding has come to light, the expressway level was lowered instead of raisi
गंगा एक्सप्रेसवे पर सोनिक टोल पर भरा पानी - फोटो : amar ujala

ऐसा इसलिए किया गया ताकि वहां से गुजर रही 132 केवी लाइन की सड़क से नियमानुसार न्यूनतम ऊंचाई 12.5 मीटर रहे। एसटीसी सीईओ ने निरीक्षण में पाया कि इस वजह से रैम्प नेशनल हाईवे से भी नीचे चला गया। रैंप की ड्राइंग और डिजाइन को अंतिम रूप देने की जिम्मेदारी स्वतंत्र इंजीनियरिंग कंपनी ‘लायन इंजीनियरिंग’ की थी। लेकिन सबसे गंभीर बात यह है कि रैंप के लेवल में यह बदलाव यूपीडा के संज्ञान में लाए बिना कर दिया गया। नियमों के मुताबिक ड्राइंग और डिजाइन को अंतिम रूप देने की जिम्मेदारी स्वतंत्र इंजीनियर की होती है। स्वतंत्र इंजीनियर को डिजाइन में बदलाव करने का अधिकार है, लेकिन यह बदलाव निर्धारित तकनीकी और कानूनी मानकों के अनुरूप होना चाहिए। इस बदलाव की जानकारी यूपीईडा को भी दी जानी चाहिए थी।

सीईओ मनोज कुमार सिंह ने संबंधित अधिकारियों को खामियां दूर करने के निर्देश दिए हैं। अब यह भी जांच होगी कि डिजाइन में बदलाव किस स्तर पर हुआ और इसकी जानकारी यूपीडा को क्यों नहीं दी गई। साथ ही रैंप को निर्धारित लेवल पर लाने का खर्च इंजनियरिंग कंपनी को उठाना होगा। वहीं मुख्य कैरिजवे और रैंप के बीच नया टावर लगाने और 132 केवी लाइन को ऊपर करने का खर्च यूपीडा के स्तर से वहन किया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed