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Lucknow News: 25 विश्वविद्यालयों की बेचते थे फर्जी मार्कशीट, गिरोह का भंडाफोड़
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पुलिस की गिरफ्त में फर्जी मार्कशीट बेचने के आरोपी।
लखनऊ। राजस्थान, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के 25 विश्वविद्यालयों की फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाने वाले गिरोह का गोमतीनगर पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। गिरोह के तीन लोगों को गोमतीनगर पुलिस और पूर्वी जोन की क्राइम टीम ने शनिवार रात करीब 8:30 बजे जनेश्वर मिश्र पार्क के पास से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पाठ्यक्रम के हिसाब से छात्रों से 25 हजार से लेकर चार लाख रुपये तक वसूलते थे।
डीसीपी पूर्वी शशांक सिंह ने बताया कि पकड़े गए आरोपी अयोध्या के पूरा कलंदर निवासी सत्येंद्र द्विवेदी, उन्नाव के बीघापुर निवासी अखिलेश कुमार और लखीमपुर खीरी के ईशानगर का सौरभ शर्मा है। गिरोह का मास्टरमाइंड सत्येंद्र है। आरोपी 2021 से फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां बनाने का काम कर रहे हैं। पूछताछ में गिरोह के और लोगों के भी नाम सामने आए हैं। आरोपी शनिवार शाम फर्जी मार्कशीट और कुछ दस्तावेज किसी को देने जा रहे थे, तभी इन्हें पकड़ा गया।
पीएचडी के बाद सत्येंद्र ने शुरू किया फर्जीवाड़ा
एसीपी गोमतीनगर ब्रज नारायण सिंह के मुताबिक सत्येंद्र ने कलिंगा विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ से समाजशास्त्र में पीएचडी की थी। अखिलेश कानपुर यूनिवर्सिटी से एमएससी कर चुका है। चिनहट के कमता में रहने वाला सौरभ खुद को वकील बताता है। पीएचडी के बाद सत्येंद्र ने 2021 में गिरोह बनाया। सौरभ और अखिलेश से इसका संपर्क सोशल मीडिया के जरिये हुआ था।
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अब तक 1500 से ज्यादा मार्कशीट बेच चुके हैं आरोपी
एसीपी ने बताया कि गिरोह के लोग छात्रों को बिना परिश्रम के ही बीटेक, बीसीए, एमसीए, एमएससी और बीए की मार्कशीट बनवाने का लालच देते थे। जाल में फंसाने के बाद विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय मेरठ, नॉर्थ ईस्ट क्रिश्चियन विश्वविद्यालय दीमापुर नगालैंड, महाराजा अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय उत्तराखंड, कलिंगा विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़, जेआरएन राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय उदयपुर, साबरमती विश्वविद्यालय गुजरात सहित 25 विश्वविद्यालय की मार्कशीट और डिग्री बनाकर बेचते थे। अब तक आरोपी 1500 छात्रों को मार्कशीट बेच चुके हैं।
मास्टरमाइंड चलता था निजी ऑनलाइन एग्जाम सेंटर
फर्जी मार्कशीट गिरोह का मास्टरमाइंड सत्येंद्र साथियों के खरगापुर में ऑनलाइन एग्जाम सेंटर भी चलाता था। यहां आने वाले छात्र-छात्राओं को वह जाल में फंसाता था। आरोपी पकड़ में न आएं इसलिए अलग-अलग साइबर कैफे में पाठ्यक्रम के अनुसार मार्कशीट बनाते थे। पुलिस के मुताबिक, सत्येंद्र कुछ लोगों को फर्जी मार्कशीट देने के लिए उनकी परीक्षा तक कराता था। गिरोह के लोग तीन भाग में बंटकर काम करते थे। फर्जी मार्कशीट के जरिये गिरोह अब तक करीब 15 करोड़ रुपये ऐंठ चुके हैं। इस गिरोह का नेटवर्क पूरे देश तक फैला हुआ है।
विश्वविद्यालयों की संलिप्तता भी जांचेंगे
पुलिस इस दिशा में भी जांच कर रही है कि कहीं इस फर्जीवाड़े में किसी विश्वविद्यालय के अधिकारियों या कर्मचारियों की संलिप्तता तो नहीं है। आरोपी छात्र-छात्राओं से परीक्षा भी दिलवाते थे, इस आधार पर जांच की जा रही है।
मार्कशीट के खरीदारों की होगी तलाश
पुलिस उन लोगों से भी संपर्क करेगी, जिन्होंने फर्जी मार्कशीट के जरिये कहीं नौकरी हासिल की है। या फिर इसके जरिये आवेदन करने वाले हैं। आशंका है कि कुछ लोगों ने फर्जी मार्कशीट का इस्तेमाल सरकारी नौकरी के लिए भी किया है।
ये सामान हुए बरामद
25 विश्वविद्यालयों की 923 फर्जी मार्कशीट व प्रमाणपत्र, 15 मुहर, दो लाख रुपये नकद, 65 मार्कशीट छपाई का पेपर, एसयूवी, छह लैपटाॅप, दो हार्ड डिस्क, एक लैपटॉप चार्जर, पांच मोबाइल, एक प्रिंटर, एक सीपीयू, दो रजिस्टर, दस्तावेजों की एक फाइल, पांच चेक बुक और पासबुक।
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डीसीपी पूर्वी शशांक सिंह ने बताया कि पकड़े गए आरोपी अयोध्या के पूरा कलंदर निवासी सत्येंद्र द्विवेदी, उन्नाव के बीघापुर निवासी अखिलेश कुमार और लखीमपुर खीरी के ईशानगर का सौरभ शर्मा है। गिरोह का मास्टरमाइंड सत्येंद्र है। आरोपी 2021 से फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां बनाने का काम कर रहे हैं। पूछताछ में गिरोह के और लोगों के भी नाम सामने आए हैं। आरोपी शनिवार शाम फर्जी मार्कशीट और कुछ दस्तावेज किसी को देने जा रहे थे, तभी इन्हें पकड़ा गया।
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पीएचडी के बाद सत्येंद्र ने शुरू किया फर्जीवाड़ा
एसीपी गोमतीनगर ब्रज नारायण सिंह के मुताबिक सत्येंद्र ने कलिंगा विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ से समाजशास्त्र में पीएचडी की थी। अखिलेश कानपुर यूनिवर्सिटी से एमएससी कर चुका है। चिनहट के कमता में रहने वाला सौरभ खुद को वकील बताता है। पीएचडी के बाद सत्येंद्र ने 2021 में गिरोह बनाया। सौरभ और अखिलेश से इसका संपर्क सोशल मीडिया के जरिये हुआ था।
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अब तक 1500 से ज्यादा मार्कशीट बेच चुके हैं आरोपी
एसीपी ने बताया कि गिरोह के लोग छात्रों को बिना परिश्रम के ही बीटेक, बीसीए, एमसीए, एमएससी और बीए की मार्कशीट बनवाने का लालच देते थे। जाल में फंसाने के बाद विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय मेरठ, नॉर्थ ईस्ट क्रिश्चियन विश्वविद्यालय दीमापुर नगालैंड, महाराजा अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय उत्तराखंड, कलिंगा विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़, जेआरएन राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय उदयपुर, साबरमती विश्वविद्यालय गुजरात सहित 25 विश्वविद्यालय की मार्कशीट और डिग्री बनाकर बेचते थे। अब तक आरोपी 1500 छात्रों को मार्कशीट बेच चुके हैं।
मास्टरमाइंड चलता था निजी ऑनलाइन एग्जाम सेंटर
फर्जी मार्कशीट गिरोह का मास्टरमाइंड सत्येंद्र साथियों के खरगापुर में ऑनलाइन एग्जाम सेंटर भी चलाता था। यहां आने वाले छात्र-छात्राओं को वह जाल में फंसाता था। आरोपी पकड़ में न आएं इसलिए अलग-अलग साइबर कैफे में पाठ्यक्रम के अनुसार मार्कशीट बनाते थे। पुलिस के मुताबिक, सत्येंद्र कुछ लोगों को फर्जी मार्कशीट देने के लिए उनकी परीक्षा तक कराता था। गिरोह के लोग तीन भाग में बंटकर काम करते थे। फर्जी मार्कशीट के जरिये गिरोह अब तक करीब 15 करोड़ रुपये ऐंठ चुके हैं। इस गिरोह का नेटवर्क पूरे देश तक फैला हुआ है।
विश्वविद्यालयों की संलिप्तता भी जांचेंगे
पुलिस इस दिशा में भी जांच कर रही है कि कहीं इस फर्जीवाड़े में किसी विश्वविद्यालय के अधिकारियों या कर्मचारियों की संलिप्तता तो नहीं है। आरोपी छात्र-छात्राओं से परीक्षा भी दिलवाते थे, इस आधार पर जांच की जा रही है।
मार्कशीट के खरीदारों की होगी तलाश
पुलिस उन लोगों से भी संपर्क करेगी, जिन्होंने फर्जी मार्कशीट के जरिये कहीं नौकरी हासिल की है। या फिर इसके जरिये आवेदन करने वाले हैं। आशंका है कि कुछ लोगों ने फर्जी मार्कशीट का इस्तेमाल सरकारी नौकरी के लिए भी किया है।
ये सामान हुए बरामद
25 विश्वविद्यालयों की 923 फर्जी मार्कशीट व प्रमाणपत्र, 15 मुहर, दो लाख रुपये नकद, 65 मार्कशीट छपाई का पेपर, एसयूवी, छह लैपटाॅप, दो हार्ड डिस्क, एक लैपटॉप चार्जर, पांच मोबाइल, एक प्रिंटर, एक सीपीयू, दो रजिस्टर, दस्तावेजों की एक फाइल, पांच चेक बुक और पासबुक।