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रेलवे की ढिलाई से दलालों की बल्ले-बल्ले
निशांत यादव/अमर उजाला,लखनऊ
Updated Sat, 21 Jun 2014 12:49 PM IST
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तत्काल कोटे की सीट के लिए लखनऊ के सभी रेल आरक्षण केंद्रों पर फर्जी लिस्ट की धांधली चल रही है। वहीं इन केंद्रों पर काबिज दलालों के खिलाफ कार्रवाई करने में रेलवे के अधिकारी भी टालमटोल भरा रवैया अपना रहे हैं।
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रेलवे की उदासीनता के कारण दलालों के हौसले बुलंद हैं। अधिकारी भी फर्जीवाड़ा रोकने के बजाय एक-दूसरे पर जिम्मेदारी ढकेल रहे हैं।
लखनऊ के सभी रेल आरक्षण केंद्रों पर रोजाना 12 हजार से अधिक तत्काल कोटे के रेल आरक्षण के आवेदन फार्म जारी होते हैं।
यहां पहला नंबर हासिल करने के लिए दलाल भोर में ही रेल आरक्षण केंद्रों पर पहुंचकर अपने लोगों की लिस्ट बना लेते हैं।
इस सिंडिकेट में दलालों को जीआरपी और आरपीएफ का संरक्षण मिलता है। जीआरपी और आरपीएफ तत्काल कोटे के धंधे में ऊपरी कमाई के लिए लिस्ट में अपने लोगों के नाम पहले से डलवा लेते हैं।
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इसके लिए प्रति व्यक्ति दो से पांच सौ रुपये तक की कमाई जीआरपी-आरपीएफ करते हैं। आगे के काउंटरों पर दलालों के नंबर होने के कारण इंतजार करने वाले लोगों को कंफर्म टिकट ही नहीं मिल पाती है।
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अमर उजाला ने नौ जून के अंक में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
ऐसे झाड़ रहे पल्ला
रेल आरक्षण केंद्रों के बाहर फर्जी लिस्ट बनवाकर लाइन लगाने वाले दलालों पर वाणिज्य अनुभाग यह कहकर कार्रवाई नहीं कर रहा है कि अनुशासन बनाने का जिम्मा आरपीएफ का है।
वहीं आरपीएफ कहती है कि फर्जी लिस्ट रोकने का जिम्मा वाणिज्य अनुभाग का है। दोनों ही विभाग एक दूसरे के पाले में कार्रवाई की गेंद डाल रहे हैं।
इन केंद्रों पर दलालों का फर्जीवाड़ा
चारबाग रेल आरक्षण केंद्र, लोको वर्कशॉप आरक्षण केंद्र, मानक नगर, आलमनगर, ऐशबाग, लखनऊ सिटी, डालीगंज, मोहिबुल्लापुर, हजरतगंज, बादशाह नगर, गोमती नगर।