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फ्रीडम फेस्ट: बंदिशें टूटें तभी असली आजादी?
लखनऊ/शैलेष अरोड़ा
Updated Tue, 13 Aug 2013 01:12 PM IST
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क्या है आजादी का मतलब? तिरंगा स्टीकर गाल में लगाकर माॅल में घूमना, एयरकंडीशंड रेस्त्रां में बर्गर-पिज्जा खाना, कुछ पेंडिंग काम निपटाना, इत्मीनान से देर तक सोना या फिर कुछ और...।
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66 साल पहले जिस आजादी के लिए हजारों-लाखों लोगों ने अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी और हंसते-हंसते फांसी का फंदा चूम लिया, उस जज्बे की क्या कुछ किरचें बची हैं?
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लैपटॉप और स्मार्टफोन के साथ जवान हुई पीढ़ी की आंखों में आंखें डालकर हमने यह जानने की कोशिश की कि अब क्या है उनके लिए 15 अगस्त का मतलब।
देश को लेकर क्या कोई जज्बा उनके दिल में मचलता है या फिर ‘नो पॉलिटिक्स’ प्लीज कहकर वे पल्ला झाड़ लेते हैं।
ईमानदार पर न हो किसी का दबाव
हर कोई बिना डर के खुली हवा में सांस ले सके। उसे यह डर न हो कि अगर वह अपने अधिकारों
जैसे सूचना का अधिकार, अभिव्यक्ति का अधिकार आदि का प्रयोग करेगा तो कुछ लोग उसके दुश्मन बन जाएंगे।
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- डॉ. श्वेता गोयल, मनोचिकित्सक, केजीएमयू
जनता-नेता, सब हों बराबर
जनता अपने बीच से ही किसी को अपना प्रतिनिधि चुनकर सरकार में पहुंचाती है। इसका मतलब यह नहीं कि उसमें और आम जनता के अधिकारों में इतना फर्क कर दिया जाए। जनता-नेता सब बराबर होने चाहिए।
- निखिल जौहरी, मैनेजर, बैंक ऑफ इंडिया
भ्रष्टाचारी को हटवा सके जनता
आजादी का मतलब तब है जब आम आदमी की फरियाद प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तक पहुंच सके। अगर राजनेता और अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त पाया जाए तो जनता के पास यह अधिकार हो कि वह उन्हें हटवा सके।
- वर्ण वैभव सिंह, बीटेक थर्ड ईयर
मिले खुला आसमान
आजादी का मतलब है महिला सशक्तीकरण। महिलाओं पर बंदिशें न हों, उनको अपने अधिकारों के प्रयोग से रोका न जाए। अगर हम किसी को गलत करते देखें तो उसे रोकें न कि आंखें मूंद लें।
- अचिन्तया, बीकॉम छात्रा
घर से बाहर निकलने में न लगे डर
बिना भय की आजादी ही असली आजादी है। सही काम करने में किसी को किसी तरह का भय न हो। महिलाएं किसी भी समय घर से निकल सके, सांप्रदायिक दंगे न हों।
- देविका धवन, असिस्टेंट प्रोफेसर, कॉमर्स, नेशनल पीजी कॉलेज