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सरकारी अस्पतालों में मुफ्त में होगी कीमोथेरेपी, देखें डिटेल
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Thu, 27 Apr 2017 03:17 PM IST
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लखनऊ के सिविल, बलरामपुर और लोहिया अस्पताल में मुफ्त कीमोथेरेपी की सुविधा जल्द शुरू होगी। इन अस्पतालों के अलावा प्रदेश के अन्य दस सेंटर पर इसे शुरू किया जाएगा। प्रदेश में सर्विक्स और ब्रेस्ट कैंसर के मामले अधिक हैं।
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कीमोथेरेपी छह माह तक चलती है। इसपर लाखों रुपये खर्च होते हैं। इसे देखते हुए यह व्यवस्था मरीजों को बड़ी राहत देगी। उम्मीद जताई जा रही है कि दो माह में कैंसर रोगियों को सुविधा मिलने लगेगी।
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कीमोथेरेपी के लिए तीनों अस्पतालों में 10-10 बेड की यूनिट लगाई जाएंगी। इसके लिए अस्पतालों को 50-50 लाख रुपये का बजट भी जारी कर दिया गया है। फिलहाल खर्च स्टेट बजट से होगा और बाद में एनएचएम से बजट जारी होगा।
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एनएचएम की ओर से योजना की जानकारी सीएमओ को दे दी गई है। नेशनल हेल्थ मिशन के तहत मुंबई के टाटा हॉस्पिटल के कैंसर एक्सपर्ट डॉ. पेंडरकर द्वारा डॉक्टरों को कीमोथेरेपी प्रोसीजर की ट्रेनिंग दी जा चुकी है।
मरीज खुद कर सकेगा अस्पताल का चुनाव
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ऐसे मिलेगी राहत
सरकार दवा मुफ्त में मुहैया कराएगी
सरकार कीमोथेरेपी की दवा मुफ्त में मुहैया कराएगी। जानकारों के मुताबिक, कीमोथेरेपी की प्रक्रिया कम से कम छह माह तक चलती है। इसमें लाखों का खर्च आता है।
बड़े संस्थानों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा
इस योजना का मकसद उन मरीजों को राहत देना है जो देश के बड़े सेंटर पर इलाज व ऑपरेशन करवाते हैं और कीमोथेरेपी के लिए उनको बार-बार उस सेंटर की दौड़ लगानी पड़ती है।
शहर के बडे़ संस्थानों पर दबाव कम होगा
लोहिया संस्थान, पीजीआई और केजीएमयू में कैंसर के इलाज, ऑपरेशन व कीमोथेरेपी की सुविधा है लेकिन तीन अस्पतालों में कीमोथेरेपी शुरू होने के बाद बड़े सेंटर पर भीड़भाड़ कम हो सकेगी।
योजना के तहत कोई मरीज शहर के बाहर या किसी दूसरे राज्य में ऑपरेशन करवाता है और उसे कीमोथेरेपी की जरूरत पड़ती है तो ऐसी स्थिति में ऑपरेशन करने वाला डॉक्टर उसके घर के पते के अनुसार सबसे पास के अस्पताल में कीमोथेरेपी के लिए ट्रीटमेंट लाइन तैयार कर रेफर करेगा। मरीज अपनी इच्छानुसार भी अस्पताल का चुनाव कर सकता है, लेकिन बाद में इसमें कोई बदलाव नहीं होगा।
सरकार दवा मुफ्त में मुहैया कराएगी
सरकार कीमोथेरेपी की दवा मुफ्त में मुहैया कराएगी। जानकारों के मुताबिक, कीमोथेरेपी की प्रक्रिया कम से कम छह माह तक चलती है। इसमें लाखों का खर्च आता है।
बड़े संस्थानों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा
इस योजना का मकसद उन मरीजों को राहत देना है जो देश के बड़े सेंटर पर इलाज व ऑपरेशन करवाते हैं और कीमोथेरेपी के लिए उनको बार-बार उस सेंटर की दौड़ लगानी पड़ती है।
शहर के बडे़ संस्थानों पर दबाव कम होगा
लोहिया संस्थान, पीजीआई और केजीएमयू में कैंसर के इलाज, ऑपरेशन व कीमोथेरेपी की सुविधा है लेकिन तीन अस्पतालों में कीमोथेरेपी शुरू होने के बाद बड़े सेंटर पर भीड़भाड़ कम हो सकेगी।
योजना के तहत कोई मरीज शहर के बाहर या किसी दूसरे राज्य में ऑपरेशन करवाता है और उसे कीमोथेरेपी की जरूरत पड़ती है तो ऐसी स्थिति में ऑपरेशन करने वाला डॉक्टर उसके घर के पते के अनुसार सबसे पास के अस्पताल में कीमोथेरेपी के लिए ट्रीटमेंट लाइन तैयार कर रेफर करेगा। मरीज अपनी इच्छानुसार भी अस्पताल का चुनाव कर सकता है, लेकिन बाद में इसमें कोई बदलाव नहीं होगा।
जानिए, क्यों जरूरी होती है कीमोथेरेपी
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लोहिया संस्थान के कैंसर सर्जन डॉ. आशीष सिंघल ने बताया कि कीमोथेरेपी से कैंसर सेल को खत्म किया जाता है। इसमें विशेष तरह की दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने बताया कि कई तरह के कैंसर में स्थिति बेहद खराब होती है। ऐसी स्थिति में कीमोथेरेपी की मदद से असहनीय दर्द और परेशानी से बचाया जा सकता है।
देश में कैंसर पर एक नजर
मुंह का कैंसर- 58 फीसदी
पित्त की थैली का कैंसर- 18 फीसदी
बच्चेदानी का कैंसर 19 फीसदी
ब्रेन ट्यूमर व कैंसर 11 फीसदी
प्रोस्टेट कैंसर 09 फीसदी
कुछ इस तरह कहर बरपा रहा है कैंसर
- सर्विक्स कैंसर से हर आठ मिनट में एक महिला की मौत
- ब्रेस्ट कैंसर के दो नए मरीजों में एक मरीज की मौत
- तंबाकू से हर दिन 2500 कैंसर पीड़ितों की मौत
- धूम्रपान से पांच में से एक मरीज की मौत
- धूम्रपान से 20 में से एक महिला मरीज की मौत
- समय पर इलाज व जांच न होने से 10 फीसदी की मौत
देश में कैंसर पर एक नजर
मुंह का कैंसर- 58 फीसदी
पित्त की थैली का कैंसर- 18 फीसदी
बच्चेदानी का कैंसर 19 फीसदी
ब्रेन ट्यूमर व कैंसर 11 फीसदी
प्रोस्टेट कैंसर 09 फीसदी
कुछ इस तरह कहर बरपा रहा है कैंसर
- सर्विक्स कैंसर से हर आठ मिनट में एक महिला की मौत
- ब्रेस्ट कैंसर के दो नए मरीजों में एक मरीज की मौत
- तंबाकू से हर दिन 2500 कैंसर पीड़ितों की मौत
- धूम्रपान से पांच में से एक मरीज की मौत
- धूम्रपान से 20 में से एक महिला मरीज की मौत
- समय पर इलाज व जांच न होने से 10 फीसदी की मौत
देखें, मुख कैंसर के आंकड़ें
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भारत में मुख कैंसर के आंकड़ों पर नजर
- 75 हजार ओरल कैंसर के मरीज हर साल
- 45 हजार मरीजों की हर साल होती है मौत
- कुल कैंसर में 40 फीसदी ओरल कैंसर
- तंबाकू सेवन से 75 से 90 फीसदी मरीजों को मुख कैंसर
- मुंह के कैसर से पीड़ित मरीजों का सर्जरी एकमात्र इलाज
बीमारी से बचना है तो इनका रखें ध्यान
- हरी सब्जियों का सेवन अधिक करें
- फाइबर युक्त पौष्टिक आहार लें
- विटामिन ‘सी’ व ‘ए’ की कमी न हो
- सिगरेट बीड़ी और शराब से दूर रहें
- नियमित व्यायाम के साथ वजन जरूरी जांचें
‘कीमोथेरेपी यूनिट के लिए एनएचएम से जानकारी मिली है। जरूरी सुविधाओं और संसाधनों की व्यवस्था करने के बाद रिपोर्ट एनएचएम को भेजी जाएगी, जिसके बाद सुविधा को शुरू कराया जाएगा।’ - डॉ. जीएस वाजपेई, सीएमओ
- 75 हजार ओरल कैंसर के मरीज हर साल
- 45 हजार मरीजों की हर साल होती है मौत
- कुल कैंसर में 40 फीसदी ओरल कैंसर
- तंबाकू सेवन से 75 से 90 फीसदी मरीजों को मुख कैंसर
- मुंह के कैसर से पीड़ित मरीजों का सर्जरी एकमात्र इलाज
बीमारी से बचना है तो इनका रखें ध्यान
- हरी सब्जियों का सेवन अधिक करें
- फाइबर युक्त पौष्टिक आहार लें
- विटामिन ‘सी’ व ‘ए’ की कमी न हो
- सिगरेट बीड़ी और शराब से दूर रहें
- नियमित व्यायाम के साथ वजन जरूरी जांचें
‘कीमोथेरेपी यूनिट के लिए एनएचएम से जानकारी मिली है। जरूरी सुविधाओं और संसाधनों की व्यवस्था करने के बाद रिपोर्ट एनएचएम को भेजी जाएगी, जिसके बाद सुविधा को शुरू कराया जाएगा।’ - डॉ. जीएस वाजपेई, सीएमओ