मंत्री कोटे से रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी, अफसरों व कर्मचारियों पर मिलीभगत का आरोप
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लखनऊ के जानकीपुरम में मंत्री के कोटे से रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का मामला सामने आया है। सेक्टर-एच में रहने वाले कपड़ा विक्रेता पवन कुमार सोनकर ने दंपती समेत सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है।
उनका आरोप है कि ठगी में रेलवे के अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल हैं। प्रभारी निरीक्षक मुहम्मद अशरफ ने केस दर्ज कर जांच की बात कही है। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि पवन का भाई प्रफुल्ल स्नातक के बाद नौकरी की तलाश कर रहा है।
बकौल पवन, छोटी बहन की सहेली की मां किरन ने प्रफुल्ल की नौकरी लगवाने की बात कही थी। वह अलीगंज के सेक्टर-ए में रहती है। उसने कुछ ऐसे लोगों से पहचान बताई थी, जो नौकरी दिलाने में सक्षम हैं। 20 अप्रैल 2018 को किरन ने उसे फैजाबाद निवासी व यहां जानकीपुरम के यमन सहारा एस्टेट में रहने वाले विशाल मिश्रा की पत्नी नीलम से मिलवाया।
नीलम ने पवन से कहा कि वह रेलवे के कई अधिकारियों को जानती है। इनके जरिये उसने मंत्री के कोटे से प्रफुल्ल को टिकट कलेक्टर व रेलवे सुपरवाइजर की नौकरी लगवाने की बात कही। इसके बदले पवन से सात लाख रुपये मांगेे।
व्हॉट्सएप पर भेजी मेडिकल रिपोर्ट व नियुक्ति पत्र
पवन ने एडवांस के तौर पर नीलम के घर पर दो लाख रुपये दिए। इसके बाद उसने प्रफुल्ल को मेडिकल परीक्षण व साक्षात्कार के लिए रेलवे भर्ती बोर्ड, नई दिल्ली भेजा। यहां रेलवे भर्ती बोर्ड के कर्मचारी संतोष व राहुल ने लाल पैथोलॉजी में उसका मेडिकल परीक्षण कराया।
उसे दो दिन रोकने के बाद लखनऊ भेज दिया गया। पवन ने किरन, नीलम मिश्रा, उसके पति विशाल मिश्रा, ओमकार वर्मा, संतोष, राहुल, सुशील गुप्ता पर नौकरी के नाम पर रुपया ऐंठने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया है।
पवन ने बताया कि लखनऊ आने के करीब 15 दिन बाद प्रफुल्ल के मेडिकल रिपोर्ट व्हॉट्सएप नंबर पर भेज दी। इसके बाद पवन ने नीलम के पति विशाल के आईसीआईसीआई बैंक खाते में एनईएफटी से ढाई लाख रुपये जमा करा दिए।
23 जून 2018 को कोलकाता की चीफ पर्सनल अफसर की ओर से व्हॉट्सएप पर ही नियुक्ति पत्र भेजा गया। उसमें प्रफुल्ल को नियुक्ति के लिए 30 जुलाई 2018 को कोलकाता की चक्रधरपुर डिवीजन पहुंचने को कहा गया था। हालांकि, तैनाती लोको पायलट के पद पर दी गई थी।
पवन ने इस पर आपत्ति जताई तो नीलम ने कहा कि शेष रकम मिलने पर वह उसे टिकट कलेक्टर की पोस्ट दिला देगी। बाकी रकम देने पर 23 जून 2018 को प्रफुल्ल के व्हॉट्सएप नंबर पर पर्सनल अफसर पूर्वोत्तर रेलवे, कोलकाता के नाम से दूसरा नियुक्ति पत्र भेजा।
दबाव डालने पर लौटाए एक लाख रुपये, फिर भागे
प्रफुल्ल ने बताया कि नीलम ने उसे संतोष और सुशील गुप्ता से संपर्क करने को कहा। सुशील ने खुद को बालीघाट स्टेशन पर तैनात बताया था। प्रफुल्ल कोलकाता पहुंचा, जहां उसे चार-पांच दिन हावड़ा स्टेशन पर ही रोककर रखा गया।
बाद में पास के गेस्टहाउस में भेज दिया गया। प्रफुल्ल को नियुक्ति के नाम पर एक से दूसरे स्टेशन पर बुलाया जाता। करीब दस दिन कोलकाता में रहने के बाद भी नौकरी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई तो वह लखनऊ लौट आया।
प्रफुल्ल ने बताया कि स्टेशन के पास जिस गेस्टहाउस में उसे ठहराया गया, वहां कई और युवक भी थे। बातचीत से पता चला कि उन्हें भी नियुक्ति के लिए बुलाया गया है। वहां रुके सभी युवकों का मेडिकल परीक्षण दिल्ली के कनाट प्लेस स्थित लाल पैथोलॉजी में कराया गया था।
प्रफुल्ल को नौकरी नहीं मिली तो उसने नीलम और विशाल मिश्रा पर दबाव बनाया। इस पर दोनों नई दिल्ली में अधिकारियों से संपर्क करने की बात कहकर टरकाते रहे। कई दिन बाद भी नौकरी नहीं मिली तो रुपया लौटाने के लिए कहा। इस पर विशाल ने एक लाख रुपये एनईएफटी से लौटाए। शेष रकम जल्द लौटाने को कहा। हालांकि, कुछ दिन बाद दंपती मकान पर ताला लगाकर गायब हो गया।