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डीआईजी टेलीकाॅम का भाई बता युवक से नौकरी के नाम पर ठगी

Mon, 09 Sep 2019 12:54 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 09 Sep 2019 12:54 AM IST
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fraud on name of DIG telecom
लखनऊ। महिला दरोगा के पति की कार हड़पकर लाखों रुपये ठगने के आरोपी व डीआईजी टेलीकॉम अनिल कुमार के करीबी शातिर चंद्रपाल सिंह का एक और कारनामा सामने आया है। शातिर ने खुद को डीआईजी टेलीकॉम अनिल कुमार का भाई बताकर निशातगंज के ओल्ड हैदराबाद निवासी अमन कुमार से नौकरी के नाम पर 1.70 लाख रुपये ठग लिए। रुपया लेकर शातिर चंद्रपाल करीब डेढ़ साल तक अमन को टरकाता रहा। बीते दिनों ठगी के मामलों की खबरें सामने आने के बाद अमन ने उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। सीओ संतोष कुमार सिंह का कहना है कि चंद्रपाल सिंह मूलरूप से बरेली का है। उसकी तलाश की जा रही है।
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इंस्पेक्टर ने बताया कि अमन मूलरूप से उन्नाव के सफीपुर स्थित उगु गांव का रहने वाला है और यहां ओल्ड हैदराबाद में किराए के मकान में रहता है। वह कपूरथला के एक रेस्टोरेंट में काम करता था जो बीते वर्ष बंद हो गया। अमन का कहना है कि चंद्रपाल सिंह अक्सर रेस्टोरेंट में खाना खाने आता था। वह खुद को वायरलेस विभाग में कार्यरत डीआईजी अनिल कुमार बताता था। बकौल अमन, वर्ष 2017 में उसने नौकरी लगवाने की बात कही। नौकरी के नाम पर उसने नौ लाख रुपये मांगे। इतने रुपया न होने पर अमन ने मना कर दिया। वर्ष 2018 में शातिर चंद्रपाल सिंह ने दोबारा नौकरी के लिए कहा। उसने डीआईजी कोटे से नगर निगम लखनऊ में क्लर्क के पद पर भर्ती कराने के नाम पर 1.80 लाख रुपये मांगे। चंद्रपाल सिंह की बातों में आकर अमन ने उसे किस्तों में रुपया दे दिया। हालांकि, कई माह बाद भी नौकरी नहीं मिली। रुपया वापस मांगने पर उसने जानमाल की धमकी देते हुए भगा दिया।
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गनर और वायरलेस सेट लेकर चलता था शातिर
अमन ने बताया कि शातिर ठग चंद्रपाल सिंह जब भी रेस्टोरेंट आता था, उसके साथ एक गनर और पुलिस का वायरलेस सेट रहता था। धीरे-धीरे ठग चंद्रपाल सिंह से उसकी घनिष्ठता हो गई। एक दिन चंद्रपाल सिंह ने बताया कि वह खुद डीआईजी नहीं है बल्कि उसके भाई अनिल कुमार टेलीकॉम में डीआईजी हैं। अमन को शक है कि शातिर चंद्रपाल सिंह के पास डीआईजी टेलीकॉम का ही गनर और वायरलेस सेट होता था।
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कॉल लेटर के नाम पर ढाई लाख रुपये और मांगे
ठग चंद्रपाल ने रुपया देने के तीन दिन बाद कॉल लेटर आने की बात कही थी। अमन ने बताया कि कई दिन बीतने के बाद भी उसे कॉल लेटर नहीं मिला तो चंद्रपाल से बात की। उसने लोकसभा चुनाव की बात कहते हुए टाल दिया। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद भी वह नौकरी के नाम पर बरगलाता रहा। नई सरकार के शपथ ग्रहण के दिन उसने कॉल लेटर देने के नाम पर ढाई लाख रुपये और मांगे। अमन ने रुपया देने से मना करते हुए अपनी रकम वापस मांगी तो उसने जल्द पैसा लौटाने का आश्वासन दिया।
महिला दरोगा के पति से की थी कार व रुपयों की ठगी
शातिर चंद्रपाल ने गौतमपल्ली थाना में तैनात महिला दरोगा पूजा यादव के पति अवनेश द्विवेदी से गैस एजेंसी दिलाने के नाम पर 12 लाख रुपये ठगने के साथ ही उनकी कार हड़प ली थी। अवनेश ने महानगर कोतवाली में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। अगले दिन पूजा यादव ने पुलिस को पति की कार महानगर निवासी डीआईजी टेलीकॉम अनिल कुमार के घर पर खड़ी होने की सूचना देकर हड़कंप मचा दिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने छानबीन की तो डीआईजी ने खुद पूजा यादव और अपने करीबी चंद्रपाल सिंह द्वारा कार खड़ी किए जाने की जानकारी दी। पुलिस कार को थाना ले आई थी।

शातिर के खिलाफ कई राज्यों में दर्ज हैं मुकदमे
महिला दरोगा के पति अवनेश द्विवेदी का कहना है कि शातिर चंद्रपाल सिंह के खिलाफ लखनऊ व बरेली समेत कई राज्यों में ठगी के मुकदमे दर्ज हैं। वह गिरोह बनाकर लोगों से नौकरी और ठेके दिलाने के नाम पर रुपये ऐंठता है। डीआईजी से नजदीकी संबंध होने के चलते पुलिस उस पर हाथ नहीं डालती।
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