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रेमडेसिविर इंजेक्शन और ऑक्सीजन के नाम पर ठगी, दो नाबालिग पकड़े

Tue, 04 May 2021 01:16 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 04 May 2021 01:16 AM IST
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Fraud on behalf of oxygen cylinder and remedesivir, two student caught
रसूखदार परिवार के तीन किशोरों ने ट्विटर व सोशल मीडिया पर रेमडेसिविर इंजेक्शन व आक्सीजन आपूर्ति का झांसा देकर लोगों से रुपये ऐंठे।
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उनकी हरकतों के चलते ऑक्सीजन न मिल पाने से एक मरीज की जान तक चली गई। इसकी शिकायत पर सेंट्रल जोन की सर्विलांस टीम व हजरतगंज पुलिस ने पड़ताल शुरू की।
पुलिस ने 9वीं और 10वीं के छात्र को दबोच लिया जबकि 11वीं का छात्र पकड़ से बाहर है। पकड़ा गया एक किशोर बिजली विभाग में तैनात एक अधिकारी का बेटा है जबकि दूसरा प्राइवेट कंपनी में बड़े पद पर तैनात एक अफसर का बेटा है।
पुलिस ने दोनों को बाल सुधार गृह भेजा है। पुलिस के मुताबिक, तीनों ने यूूपीआई आईडी, गूगल पे व फोन पे के जरिए 30 से ज्यादा लोगों से हजारों की ठगी की है।
एडीसीपी मध्य चिरंजीव नाथ सिन्हा के मुताबिक, रेमडेसिविर इंजेक्शन और आक्सीजन सप्लाई के लिए जालसाजों ने ट्विटर व टेलीग्राम पर दो मोबाइल नंबर 7985763840 और 7652058860 पोस्ट किए।
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सोशल मीडिया पर यह मेसेज डाला कि यह नंबर प्रमाणित है और हमारे यहां जरूरतमंदों को रेमडेसिविर इंजेक्शन और ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है।
रकम ट्रांसफर होते ही ब्लॉक कर देते थे नंबर
मध्य जोन के सर्विलांस सेल प्रभारी धर्मेंद्र कुमार के मुताबिक, सोशल मीडिया पर यह मेसेज देखकर कई लोगों ने संपर्क किया। कॉल करने पर लोगों से बैंक खाते के जरिए यूपीआई आईडी, गूगल पे व फोन पे के जरिए रकम की 40 प्रतिशत रिाश एडवांस ट्रांसफर करा लेते थे। अपचारियों ने रेमडेसिविर इंजेक्शन की कीमत 3500 रुपये और ऑक्सीजन सिलेंडर की कीमत 8500 रुपये रखी थी। पैसे ट्रांसफर होने के बाद शातिर किशोर उनके मोबाइल नंबर को ब्लॉक कर देते थे। यही नहीं, अंजान नंबर से कॉल आने और इंजेक्शन व सिलेंडर की सप्लाई की बात करने पर वह उस नंबर को भी ब्लॉक कर देते थे।
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धोखेबाजी में चली गई एक शख्स की जान
प्रभारी निरीक्षक हजरतगंज श्याम बाबू शुक्ला के मुताबिक, बाल अपचारी के जाल में फंसे एक परिवार ने ऑक्सीजन सिलिंडर के लिए उनके बताए खाते में पैसा ट्रांसफर कर दिया। ऑक्सीजन सिलिंडर के सप्लाई के आस में बैठे रहे। कई बार कॉल करने के बाद भी संपर्क नहीं हो सका और बिना ऑक्सीजन मरीज की जान चली गई। पीड़ित परिवार के साथ कई अन्य लोगों ने भी इस संदर्भ में पुलिस से शिकायत की। इसके बाद उन नंबरों के आधार पर सोशल मीडिया में चल रहे फर्जीवाड़ा के खुलासे की जिम्मेदारी सेंट्रल जोन के सर्विलांस सेल टीम को सौंपी गई। हजरतगंज पुलिस की मदद से टीम दो अपचारी तक पहुंच सकी।
30 से अधिक को शिकार बनाया
पुलिस टीम ने नंबरों के आधार पर उनकी लोकेशन का पता लगाया। उनकी लोकेशन वृंदावन कॉलोनी के पास मिली। पुलिस टीम ने उनके मोबाइल नंबर पर कॉल किया तो दोनों किशोर सिल्वर की होटल के पास मिल गए। पूछताछ में दोनों ने बताया कि अब तक दो दर्जन से ज्यादा लोगों को शिकार बनाया है। इनमें करीब 10 लोगों से 72500 रुपये वसूला है। उनके खिलाफ हजरतगंज पुलिस ने धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया।

मोबाइल से मिले डिटेल
पुलिस के मुताबिक पकड़े गए अपचारियों के मोबाइल से मिले करीब 35 मोबाइल नंबरों पर संपर्क किया जा रहा है। तीनों किशोर 20-22 दिनों से सोशल मीडिया पर ठगी का जाल फैलाए हुए थे। उनके निशाने पर सीतापुर, उन्नाव, बाराबंकी, अयोध्या, सुल्तानपुर और अंबेडकरनगर के पीड़ित भी थे। साथ ही दिल्ली, मुंबई, पुणे के मरीजों के तीमारदारों के नंबर भी मिले हैं। ठगे गए लोगों में कुछ दिल्ली के भी हैं।
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