लेसा में फिर गोलमाल, खींच दी ‘डील’ की हाईटेंशन लाइन

नरेश शर्मा/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 20 Jan 2014 08:40 AM IST
fraud in lesa, deal for hightension line
बिजली इंजीनियर और प्रॉपर्टी डीलर की ‘डील’ में सभी नियम कायदों को ताक पर रखकर 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन बना दी गई।

गठजोड़ 4 लाख रुपये में हुआ था। इंजीनियर ने इसके लिए न तो अनुमति ली और न ही सरकारी एस्टीमेट की रकम जमा कराई।

पूरी रकम जेब में रखकर अवैध तरीके से छह पोल की हाईटेंशन लाइन बना दी। गठजोड़ का खुलासा हुआ तो एस्टीमेट की रकम जमाकर लाइन वैध करा दी गई। मामला 33/केवी उपकेंद्र चिनहट पर तैनात जूनियर इंजीनियर (जेई) महेंद्र यादव का है।

जेई की मानें तो इस गोरखधंधे में उपखंड अधिकारी (एसडीओ) भी शामिल था। अब जेई को बचाने के लिए हाईटेंशन लाइन बनाने वाले ठेकेदार के खिलाफ पुलिस में धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।

सूत्रों के मुताबिक एक आईएएस अफसर के रिश्तेदार महेंद्र ने एक प्रॉपर्टी डीलर के प्लॉटिंग एरिया के ऊपर से गुजरी 11केवी हाईटेंशन लाइन को हटाने और नई लाइन बनाने की डील हुई थी।

दरअसल प्लाटिंग एरिया के बीच से हाईटेंशन लाइन गुजरने के कारण प्लॉट की बिक्री नहीं हो रही थी। एक ठेकेदार ने बताया कि जेई ने बिना रजिस्ट्रेशन वाले ठेकेदार से स्टील के पोल एवं बिजली सामग्री का घालमेल कर प्लाटिंग एरिया के किनारे-किनारे प्लॉट के बीच से पहले से निकली हाईटेंशन लाइन के समानांतर लाइन बनवाई।

जांच करने पहुंचे तो एक्सईएन से भिड़ गया जेई
एक्सईएन शैलेश गुप्ता जब कमता एवं मटियारी के बीच चोरी-छिपे बनाई गई इस लाइन का मौका मुआयना करने पहुंचे तो जेई महेंद्र यह कहते हुए उनसे भिड़ गया कि लाइन बनवाने के बारे में उसने एसडीओ अंशुमान यादव को बता दिया था।

एसडीओ ने इससे इन्कार किया तो महेंद्र अपने दोनों सीनियर अफसरों से भिड़ गया। जब एक्सईएन ने उसे सस्पेंड करने की धमकी दी तब जाकर वह शांत हुआ।

ऐसे हुआ अवैध को वैध करने का खेल
एक्सईएन ने मौके पर ही जेई एवं एसडीओ से हाईटेंशन लाइन का एस्टीमेट बनाने का निर्देश दिया। एस्टीमेट में लाइन में लगे स्टील पोल से लेकर एक-एक नट बोल्ट की लागत और लाइन बनाने में आने वाले लेबर खर्च को जोड़ा गया।

सूत्र बताते कि यह एस्टीमेट दो लाख रुपये से ऊपर बना था, लेकिन जेई ने अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए उसे 1.72 लाख रुपये का करा दिया। प्रॉपर्टी डीलर से जो रकम वसूली गई थी उसी से एस्टीमेट की रकम जमाकर अवैध लाइन को वैध किया गया।

आईएएस अफसर को खुश करने के लिए मामला दबा दिया

सूत्रों के अनुसार बिजली महकमे के एक बड़े अफसर ने एक आईएएस अफसर को खुश करने के लिए उसके रिश्तेदार जेई को बचाने के लिए बगैर एस्टीमेट जमा कराए हाईटेंशन लाइन बनाने के प्रकरण को दबवा दिया।

इस बड़े अफसर के हस्तक्षेप से ही यह जांच नहीं कराई गई कि जेई स्टील के पोल, तार एवं अन्य सामान कहां से लाया।

क्या कहता है नियम
प्लॉट के ऊपर से बिजली लाइन हटवाने या नई लाइन बनाने के लिए एक्सईएन को एक प्रार्थना पत्र देना होता है। एक्सईएन बिजली लाइन का निरीक्षण कराता है। अगर लाइन का हटना या बनना मुमकिन है तो उपभोक्ता से पोल, तार एवं लेबर की लागत जमा कराई जाती है।

इसके बाद एक्सईएन लाइन बनाने का आदेश जारी करता है। लाइन बनाने के लिए इलाके इंजीनियर को स्टोर से पोल, तार सहित अन्य बिजली सामग्री का इशू कराना पड़ता है।

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