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फर्जीवाड़ा: यूपी के मेडिकल कॉलेजों में दाखिला पाने के लिए हिंदू छात्र बने बौद्ध और जैन, इस तरह से आए पकड़ में

Mon, 16 Sep 2024 12:12 AM IST
रोहित मिश्र चन्द्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चन्द्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Mon, 16 Sep 2024 12:12 AM IST
सार

UP Medical College: यूपी में मेडिकल कॉलेज में सीट पाने के लिए फर्जीवाड़ा सामने आया है। अल्पसंख्यक कोटे का फायदा उठाने के लिए कई छात्र हिंदू से जैन और बौद्ध बन गए हैं। 

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Fraud: Hindu students pretend to be Buddhists and Jains to get admission in medical college, caught in this wa
यूपी के मेडिकल कॉलेजों में फर्जीवाड़ा। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के वक्त अल्पसंख्यक कोटे का फायदा लेने के लिए तमाम हिंदू छात्र बौद्ध और जैन बन गए। इन छात्रों ने निर्धारित प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया। मामला सामने आने के बाद अब नए सिरे से सभी के प्रमाण पत्रों की जांच शुरू कराई गई है। ऐसे में 17 छात्रों के अलावा अन्य छात्र भी कार्यवाही के दायरे में आ सकते हैं।

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प्रदेश के छह अल्पसंख्यक कॉलेजों में एमबीबीएस की 475 और एमडीएस की 150 सीटें हैं। इन कॉलेजों में दाखिले के लिए सीटें आरक्षित करने के लिए छात्रों को अल्पसंख्यक (मुस्लिम, बौद्ध, जैन, पारसी, इसाई) का प्रमाण पत्र देना होता है। उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिशेध अधिनियम 2021 लागू होने के बाद धर्म परिवर्तन करने से 60 दिन पहले आवेदन करना होता है। आवेदन के 30 दिन तक आपत्ति ली जाती है। इसके बाद ही प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। सूत्रों के मुताबिक अल्पसंख्यक कोटे की सीटें हासिल करने के लिए तमाम हिंदू छात्र आनन- फानन में बौद्ध और जैन बनकर दाखिला ले लिया। इन्होंने दाखिले के लिए प्रमाण पत्र भी लगा दिया। जब इनके प्रमाण पत्रों की जांच कराई गई तो पता चला कि धर्म परिवर्तन की निर्धारित प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है। अभी तक 22 ऐसे छात्र चिन्हित किए गए हैं, जिसमें 17 ने दाखिला ले लिया था। अब इन छात्रों का दाखिला निरस्त करने की तैयारी चल रही है। दूसरी तरफ अन्य कॉलेजों में दाखिला लेने वालों की भी जांच शुरू कर दी गई है।
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प्रमाण पत्र जारी करने वाले विभागों को किया अलर्ट
17 छात्रों के फर्जी प्रमाण पत्र से दाखिला लेने का मामला सामने आने के बाद दूसरे चरण की काउंसिलिंग में विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। डीजीएमई ने गृह विभाग और अल्पसंख्यक विभाग में पूरे मामले की जानकारी दी है। इसके बाद अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति जनजाति सहित सभी प्रमाण पत्र जारी करने वाले विभागों को अलर्ट कर दिया गया है। अब नोडल सेंटरों पर प्रमाण पत्रों के सप्तापन में भी विशेष सावधानी बरती जाएगी। दाखिले के तत्काल बाद सभी प्रमाण पत्र जिलाधिकारी के माध्यम से तत्काल सत्यापित कराए जाएंगे।
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कम मेरिट पर भी हो जाता है दाखिला
अल्पसंख्यक कोटे की सीटों पर कम मेरिट पर भी दाखिला हो जाता है। क्योंकि अल्पसंख्यक वर्ग के जितने छात्र मौजूद होंते हैं, उन्हीं के आधार पर कटऑफ मेरिट तैयार की जाती है। ऐसे में तमाम कम मेरिट वाले छात्र भी अल्पसंख्यक कॉलेजों के जरिएदाखिला पाने में कामयाब हो जाते हैं।


केंद्र और राज्य से लेना होता है प्रमाण पत्र
अल्पंसख्यक कोटे के तहत संचालित होने वाले कॉलेजों के लिए अलग से गाइडलाइन बनी हुई है। इसके तहत केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय, राज्य के अल्पसंख्यक विभाग और डीजीएमई कार्यालय से पंजीयन होता है। पंजीयन के बाद वहांकी व्यवस्था के हिसाब से सीटें निर्धारित की जाती हैं।

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