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नौकरी के नाम पर 1400 लोगों से ठगे 30 करोड़ रुपये, एक गिरफ्तार
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लखनऊ। एसटीएफ की टीम ने मंगलवार को आशियाना के डेरी चौराहे से करीब 30 करोड़ से अधिक की ठगी करने वाले जालसाज को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ने अपने साथियों संग मिलकर करीब 14 सौ लोगों से ठगी की है। आरोपी के खिलाफ फतेहपुर में मुकदमा दर्ज है।
एसटीएफ के एसपी अनिल सिंह सिसौदिया के मुताबिक, एटीएफ ने फतेहपुर पुलिस केसाथ मिलकर आशियाना के डेरी चौराहे के पास से उन्नाव के पूरबखेड़ा निवासी देवेश सिंह को गिरफ्तार किया। देवेश के खिलाफ फतेहपुर कोतवाली में ठगी का मुकदमा दर्ज है। उस पर पुलिस ने 25,000 रुपये का इनाम घोषित किया था। एसटीएफ के अधिकारी के मुताबिक, ऑल इंडिया वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन इम्पलाई यूनियन का 2017 में चुनाव लड़कर महामंत्री बन चुके देवेश सिंह ने पूछताछ में कई राज उगले। उसने बताया कि उसकी मुलाकात एसके पांडेय से हुई। वह भी यूनियन के महामंत्री थे। उन्होंने आसानी से लोगों को निवेश कराने के नाम पर लाखों रुपये कमाने का लालच दिया जिसके बाद दोनों ने मिलकर ठगी शुरू कर दी।
स्थायी नौकरी दिलाने के नाम पर वसूले डेढ़ से दो लाख
पुलिस के मुताबिक, देवेश ने लोगों को झांसा दिया था कि जो डेढ़ से दो लाख रुपये जमा करेगा, उसे न्यायालय के माध्यम से राज्य भंडारण निगम में स्थायी नौकरी दिलाई जाएगी। इसके लिए गिरोह बनाया। एसके पांडेय गिरोह का मास्टरमाइंड था। गिरोह बनाने के बाद करीब 1400 लोगों से डेढ़ से दो लाख रुपये जमा करा लिए। एसके पांडेय ने कूटरचित दस्तावेज तैयार कर नियुक्ति पत्र दिया। जब लोग ज्वॉइन करने क्षेत्रीय प्रबंधक उप्र राज्य भंडारण निगम के कार्यालय पहुंचे तो वहां फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। इसके बाद प्रदेश के कई थानों में पीड़ितों ने केस दर्ज कराए। एसके पांडेय को फतेहपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है।
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एसटीएफ के एसपी अनिल सिंह सिसौदिया के मुताबिक, एटीएफ ने फतेहपुर पुलिस केसाथ मिलकर आशियाना के डेरी चौराहे के पास से उन्नाव के पूरबखेड़ा निवासी देवेश सिंह को गिरफ्तार किया। देवेश के खिलाफ फतेहपुर कोतवाली में ठगी का मुकदमा दर्ज है। उस पर पुलिस ने 25,000 रुपये का इनाम घोषित किया था। एसटीएफ के अधिकारी के मुताबिक, ऑल इंडिया वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन इम्पलाई यूनियन का 2017 में चुनाव लड़कर महामंत्री बन चुके देवेश सिंह ने पूछताछ में कई राज उगले। उसने बताया कि उसकी मुलाकात एसके पांडेय से हुई। वह भी यूनियन के महामंत्री थे। उन्होंने आसानी से लोगों को निवेश कराने के नाम पर लाखों रुपये कमाने का लालच दिया जिसके बाद दोनों ने मिलकर ठगी शुरू कर दी।
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स्थायी नौकरी दिलाने के नाम पर वसूले डेढ़ से दो लाख
पुलिस के मुताबिक, देवेश ने लोगों को झांसा दिया था कि जो डेढ़ से दो लाख रुपये जमा करेगा, उसे न्यायालय के माध्यम से राज्य भंडारण निगम में स्थायी नौकरी दिलाई जाएगी। इसके लिए गिरोह बनाया। एसके पांडेय गिरोह का मास्टरमाइंड था। गिरोह बनाने के बाद करीब 1400 लोगों से डेढ़ से दो लाख रुपये जमा करा लिए। एसके पांडेय ने कूटरचित दस्तावेज तैयार कर नियुक्ति पत्र दिया। जब लोग ज्वॉइन करने क्षेत्रीय प्रबंधक उप्र राज्य भंडारण निगम के कार्यालय पहुंचे तो वहां फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। इसके बाद प्रदेश के कई थानों में पीड़ितों ने केस दर्ज कराए। एसके पांडेय को फतेहपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है।
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