बाराबंकी में चार साल की नेत्रहीन बच्ची से दुराचार कर खेत में फेंका, हालत गंभीर, वारदात से आक्रोश
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एक चार वर्षीय दिव्यांग और नेत्रहीन बच्ची को दरिंदे ने घर से उठाकर खेत में हवस का शिकार बना डाला। मासूम की चीख-पुकार पर गांव वाले दौड़े लेकिन तब तक दरिंदा रेप कर उसे गंभीर हालत में तड़पता छोड़ भाग गया। हालांकि, बाद में पुलिस व ग्रामीणों ने आरोपी दूधिये को दबोच लिया।
हैवानियत की शिकार मासूम की हालत नाजुक देखते हुए उसे ट्रॉमा सेंटर लखनऊ में भर्ती कराया गया है। इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना से गांववालों में आक्रोश है। एसपी वीपी श्रीवास्तव ने बताया कि पीड़िता के पिता की तहरीर पर दुराचार व पास्को एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
वारदात देवा कोतवाली क्षेत्र के एक गांव की है। बुधवार की रात पड़ोस के गांव में रहने वाला दूधिया रोज की तरह गांव आया था। मासूम बच्ची के पिता को जरूरी काम याद आया तो वह अपनी दोनों बेटियों को दूधिए गणेश यादव (32) के भरोसे छोड़कर एक रिश्तेदार के साथ चला गया। जब वह लौटा तो देखा कि उसकी छोटी बेटी जो दिव्यांग व नेत्रहीन भी है, नदारद थी।
इस बीच गांव वालों का शोर सुनकर वह भी खेत की ओर भागा तो देखा कि दिव्यांग मासूम खून से लथपथ बेसुध पड़ी थी। पुलिस को सूचना देने के बाद मासूम का पिता शक के आधार पर दूधिये की तलाश में ग्रामीणों के साथ उसके घर पहुंचा तो वह वहां नहीं मिला। लौटते समय पुलिस व ग्रामीणों ने उसे गांव के बाहर एक खेत से दबोच लिया।
आरोपी के खून से सने कपड़ों को जांच के लिए लैब भेजा जाएगा
आनन-फानन में मासूम को जिला महिला अस्पताल लाया गया जहां उसकी गंभीर हालत देखते हुए ट्रॉमा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया गया। कोतवाली प्रभारी नरेंद्र सिंह ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपी के खून से सने कपड़ों को जांच के लिए लैब भेजा जाएगा और मासूम की सुरक्षा के लिए एक एसआई व एक महिला आरक्षी की ड्यूटी अस्पताल में लगाई गई है।
मासूम की हालत पर सीएमएस जिला महिला अस्पताल डॉ. आभा आशुतोष का कहना है कि जिस समय मासूम को जिला महिला अस्पताल लाया गया था उस समय उसके गुप्तांग से काफी खून बह रहा था। अस्पताल में चाइल्ड सर्जन व ऑपरेशन की अन्य सुविधाएं नहीं होने के कारण उसे ट्रॉमा सेंटर रेफर करना पड़ा। मासूम की हालत नाजुक बनी हुई थी।