{"_id":"37cf692db95f380bf83804c7205b56e8","slug":"four-thousand-flats-in-lucknow","type":"story","status":"publish","title_hn":"खुशखबरी: शहरवासियों को 4000 फ्लैट की सौगात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खुशखबरी: शहरवासियों को 4000 फ्लैट की सौगात
लखनऊ/ब्यूरो/इंटरनेट डेस्क
Updated Thu, 15 Aug 2013 12:12 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आवास विकास शहर में करीब साढ़े चार हजार फ्लैट बनाने जा रहा है। इनमें सात से आठ लाख रुपये कीमत वाले एलआईजी फ्लैटों से लेकर 75 से 85 लाख रुपए कीमत वाले फ्लैट भी शमिल हैं।
विज्ञापन
बुधवार को हुई आवास विकास बोर्ड बैठक में इन बहुमंजिला आवासीय योजनाओं को वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति दी गई।
आवासीय योजनाओं को मंजूरी केअलावा बोर्ड ने कई प्रमुख प्रस्तावों को मंजूर किया है। जिनमें दो एकड़ तक के आवंटी को एसटीपी व वाटर रिसाइक्लिंग प्लांट बनाना अनिवार्य हो गया है।
विज्ञापन
बल्क सेल में जमीन बेचने केप्रस्ताव को भी पास कर दिया गया है। परिषद मुख्यायल में पांच दिन का सप्ताह होगा, इस पर भी बोर्ड ने मोहर लगा दी है। किसानों और कर्मचारियों से जुड़े मसलों को भी बोर्ड ने पास कर दिया है।
विज्ञापन
पेट्रोल व डीजल पंप के लिए आरक्षित भूखंडों की पिछले 15 साल से ब्रिकी न होने को देखते हुए उसके लिए जमीन आवंटन की शर्तों में भी संशोधन कर दिया गया है।
बोर्ड बैठक के बाद अपर आवास आयुक्त व परिषद सचिव रुद्र प्रताप सिंह ने बताया कि वृंदावन, अवध विहार व गोकुल ग्राम योजना में बहुमंजिला आवासीय योजनाओं को वित्तीय व प्रशासनिक मंजूरी मिल गई है।
परिषद की योजनाओं में अब बल्क सेल से जमीनें आवंटित की जाएंगी। इसके लिए प्रस्ताव पास हो गया है। इसके तहत 10 से 50 एकड़ तक के प्लॉट काटे जाएंगे।
जिनको टू बिड सिस्टम (टेक्निकल बिड व खुली बोली) से आवंटित किया जाएगा। जो लोग टेक्निकल बिड में पास होंगे, वही खुली बोली में हिस्सा ले सकेंगे।
बल्क सेल के जो आंवटी होंगे उनको परिषद की तरह ही सभी तरह केनियम योजनाओं को विकसित करने में अपनाने होंगे।
लखनऊ, गाजियाबाद, मेरठ व मुरादबाद में परिषद की 600 एकड़ से अधिक जमीन रिक्त पड़ी है, जिसे बल्क सेल योजना से विकसित कराया जाएगा।
दो एकड़ तक के आवंटी को अब एसटीपी व वाटर रिसाइक्लिंग प्लांट बनाना अनिवार्य है। बिना इसके उनका नक्शा पास नहीं होगा। परिषद की अपनी योजनाओं में भी यह अनिवार्य है। इससे भूजल बचाया जा सकेगा।