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Lucknow News: उन्नत प्रजाति के पौधे बेचने के नाम पर लाखों ऐंठने वाले गिरोह के चार लोग गिरफ्तार

Mon, 04 Aug 2025 12:40 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ Updated Mon, 04 Aug 2025 12:40 AM IST
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Four people of a gang who extorted lakhs in the name of selling advanced species of plants were arrested
बाबूराव संभाजी।
लखनऊ। उन्नत प्रजाति के केले के पौधे बेचने के नाम पर 29.25 लाख ऐंठने वाले गिरोह के सरगना व तीन अन्य लोगों को गोसाईगंज पुलिस और साइबर क्राइम सेल की टीम ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके पास से छह मोबाइल और दो डेबिट कार्ड बरामद किए हैं। आरोपी फेसबुक पर फर्जी फर्मों के पेज बनाकर ठगी करते थे।
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एडीसीपी क्राइम सेल आर. बसंत कुमार के मुताबिक पकड़े गए आरोपी महाराष्ट्र के सांगली निवासी बाबूराव संभाजी माली, कर्नाटक के बीजापुर का कल्लाप्या पट्टादमथ, मो. रफीक गनीसाब तंबोली व बलप्पा भीमप्पा बांदीवादर हैं। बाबूराव संभाजी गिरोह का सरगना है। 30 जून को गोसाईगंज के बिरूहा निवासी कारोबारी अवधेश कुमार ने थाने में 29.25 लाख की ठगी होने का केस दर्ज कराया था। 22 जून को अवधेश का आरोपियों से संपर्क फेसबुक पर फर्म के जाली पेज पर हुआ था। आरोपियों ने उन्नत प्रजाति के केले के पौधे कम कीमत पर बेचने की बात कही थी। झांसे में आने पर अवधेश ने ठगों के बताए गए खाते में रकम ट्रांसफर कर दी थी। पर उन्हें न पौधे मिले और न रकम।
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एडीसीपी क्राइम सेल ने बताया कि केस दर्ज होने के बाद गोसाईगंज पुलिस और साइबर क्राइम सेल की टीम सर्विलांस के जरिये आरोपियों की तलाश में जुट थी। पुलिस ने बाबूराव को महाराष्ट्र और अन्य आरोपियों को कर्नाटक से गिरफ्तार कर लिया।
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चार फर्माें के नाम से बनाए गए थे पेज
इंस्पेक्टर गोसाईगंज ब्रजेश कुमार त्रिपाठी के मुताबिक पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने फेसबुक पर बायोप्लांट, शिव बायोप्लांट, आनंद शिवकुमार और साईं नर्सरी फर्म नाम से फर्जी फेसबुक बनाए थे। इसके जरिये वे देशभर में लोगों से उन्नत प्रजाति के पौधे सस्ते दामों में बेचने के नाम पर संपर्क करते थे। भरोसे में लेने के लिए वे फर्म के फर्जी प्रमाणपत्र दिखाकर उनसे ठगी कर लेते थे और पौधों की डिलीवरी भी नहीं करते थे।

2021 में कर्नाटक जेल से छूटे थे बाबूराव और कल्लाप्या
इंस्पेक्टर ने बताया कि बाबूराव ठगी और कल्लाप्या जाली नोट के मामले में कर्नाटक जेल में बंद थे। वहीं दोनों की दोस्ती हुई थी। 2021 में दोनों जेल से छूटे थे। इसके बाद गिरोह बनाकर जालसाजी करने लगे। बाबूराव किसानी और कल्लाप्या ऑनलाइन कारोबार करता है। पुलिस ने 29.25 लाख में से चार लाख रुपये फ्रीज कराए हैं।



बैंकों से मिलीभगत होने की भी आशंका

इंस्पेक्टर के मुताबिक बाबूराव और कल्लाप्या ठगी की रकम मो. रफीक गनीसाब तंबोली व बलप्पा भीमप्पा के बैंक खाते में ट्रांसफर कर लेते थे। यह भी आशंका है कि आरोपी बैंकों के कर्मचारियों व अधिकारियों की मिलीभगत से ठगी करते थे। इंस्पेक्टर ने बताया कि बाबूराव व कल्लाप्या के खिलाफ अन्य राज्यों में भी कई मुकदमे दर्ज हैं।

बाबूराव संभाजी।

बाबूराव संभाजी।

बाबूराव संभाजी।

बाबूराव संभाजी।

बाबूराव संभाजी।

बाबूराव संभाजी।

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