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बाल रोग विशेषज्ञ व सर्राफ से रंगदारी मांगने वाले चार गिरफ्तार

Sat, 20 Jul 2019 12:57 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 20 Jul 2019 12:57 AM IST
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Four criminal arrested
वेब सीरीज देख बनाया गिरोह, डॉक्टर व सराफ से मांगी रंगदारी, चार गिरफ्तार
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कैसरबाग निवासी बाल रोग विशेषज्ञ व पीजीआई के सराफ से रंगदारी मांगने वाले चार बदमाशों को पुलिस ने दबोच लिया।
पुलिस के मुताबिक, चारों ने डॉक्टर से 30 लाख और सराफ से आठ लाख रुपये की रंगदारी मांगी थी। पकड़े गए आरोपियों में ठेकेदार व प्रतियोगी छात्र हैं।
बदमाशों ने वेब सीरीज देखकर अपहरण व रंगदारी मांगने का गिरोह बनाया था। इसके लिए नया मोबाइल व सिम खरीदा था।
अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) पश्चिम विकास चंद्र त्रिपाठी के मुताबिक, बृहस्पतिवार को कैसरबाग निवासी बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुमित गुप्ता को एक कॉल आई।
कॉलर ने खुद को करन सिंह बताते हुए कहा कि वह तिहाड़ जेल में बंद भूपेंद्र सिंह का भाई है। उसकी रिहाई के लिए 30 लाख की रकम का इंतजाम आपको करना है। इन्कार पर पूरे परिवार की हत्या कर दी जाएगी।
कॉल डिस्कनेक्ट होने के बाद डॉॅ. सुमित ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने कॉलर की डिटेल निकालकर मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगाया तो लोकेशन कैसरबाग इलाके में मिली।
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इसके बाद घेराबंदी कर देर रात करीब 11.45 बजे चार बदमाशों को दबोच लिया। धरे गए बदमाशों में बाराबंकी के देवा रोड अभयनगर शरद कुमार अत्रे, कटरा नवाबगंज का विशाल शुक्ला, बेगमगंज सिविल लाइन का मोहसिन और मो. अलीम है।
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शरद अत्रे ठेकेदार है। जबकि विशाल शुक्ला व मोहसिन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। अलीम की मोबाइल की दुकान से मोबाइल व सिम खरीदा गया था। गिरोह के कब्जे से पांच मोबाइल बरामद हुए हैं।
सीओ संजीव सिन्हा के मुताबिक, आरोपियों ने वेब सीरीज मिर्जापुर व अपहरण देखने के बाद रंगदारी व अपहरण की रची थी।
पूछताछ में बदमाशों ने कुबूला कि रकम लेकर आने वाले को ट्रेन में निर्धारित सीट पर बैग रखने को कहा जाता। फिर अगले स्टेशन पर उसे उतरने को कहते।
इसके बाद गिरोह का कोई सदस्य बैग लेकर निकला जाता। ऐसी वसूली बदमाशों ने वेब सीरीज में देखी थी।
इंटरनेट से सीखा अपराध का तरीका
एएसपी के मुताबिक, ठेकेदारी में घाटा होने के बाद शरद अत्रे ने गिरोह बनाया था। विशाल व मोहसिन पहले से ही उसके संपर्क में थे। अलीम की दुकान पर उसका उठना-बैठना था। पूछताछ में शरद ने कुबूला कि यू-ट्यूब व गूगल से फर्जी पहचान पत्र पर सिम व मोबाइल हासिल करने की जानकारी ली। अलीम ने आसानी से फर्जी पहचान पत्र पर सिम कार्ड उपलब्ध कराया।
25 दिन पहले सराफ से मांगी थी रंगदारी
एएसपी के मुताबिक, चारों ने 25 दिन पहले पीजीआई थानाक्षेत्र के के सराफ आलोक गोयल से आठ लाख की रंगदारी मांगी थी। आलोक ने शेर अली के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। गिरफ्त में आने के बाद चारों ने सराफ से रंगदारी की बात कुबूली। पुलिस के मुताबिक, बदमाशों ने मुंबई के कारोबारियों से रंगदारी मांगना भी कुबूला है।

वोडाफोन का कर्मचारी उपलब्ध कराता था सिम
प्रभारी निरीक्षक कैसरबाग अजय कुमार सिंह के मुताबिक, आरोपियों को महज 500 रुपये में प्री-एक्टिवेटेड सिम बाराबंकी निवासी वोडाफोन का कर्मचारी उपलब्ध कराता था। वह श्रीराम टॉवर में काम करता है। उसकी तलाश के लिए वोडाफोन के अधिकारियों से भी संपर्क किया गया है। अलीम की दुकान पर उसका उठना-बैठना था।
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