इस सैनिक को 15 साल बाद मिला न्याय
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सेना के एक पूर्व नि:शक्त जवान ने करीब 15 साल चली कानूनी जंग जीत ली। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने याची पूर्व सैनिक को सेना से डिस्चार्ज किए जाने की तारीख से विकलांगता पेंशन समेत एरियर का भुगतान तीन माह में किए जाने के निर्देश केंद्र सरकार को दिए हैं।
न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति महेंद्र दयाल की खंडपीठ ने यह सुरक्षित फैसला केंद्र सरकार व अन्य की तरफ से दायर विशेष अपील को खारिज कर सुनाया। इसमें एकल न्यायाधीश की अदालत के फैसले को चुनौती दी गई थी।
दो न्यायाधीशों की खंडपीठ ने एकल पीठ के फैसले पर मुहर लगाते हुए कहा कि अपीलकर्ता (केंद्र सरकार व अन्य) एकल न्यायाधीश के निर्देश मानने को बाध्य हैं। अदालत ने कहा कि यह साबित करने वाला कोई रिकॉर्ड नहीं है कि सेना में भर्ती होते समय इस जवान को किसी तरह की बीमारी थी।
यह था मामला
याची जवान अनिल कुमार सिंह 17 जनवरी 1989 को सेना में भर्ती हुआ। नासिक रोड कैंप से बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग करने के बाद उसे पुंछ फील्ड एरिया में तैनाती दी गई।
इसके बाद उसे राजस्थान के पीस एरिया में तैनात कर दिया गया, जहां उसे मेडिकली अनफिट घोषित कर 15 अक्तूबर 1994 को सेना से डिस्चार्ज कर दिया गया। इसके बाद वह पांच महीने अस्पताल में भर्ती रहा।
इस पूर्व सैनिक ने विकलांगता पेंशन दिए जाने की अर्जी दी, जिसे 2 अप्रैल 1998 को खारिज कर दिया गया। इसके खिलाफ जवान ने वर्ष 1999 में हाईकोर्ट में एकल न्यायाधीश की अदालत में रिट दायर कर दी।
अदालत ने 12 अप्रैल 2007 को इसे मंजूर करते हुए विकलांगता पेंशन प्रमाणपत्र देने से इन्कार करने वाले 2 अप्रैल 1998 के आदेश को रद्द कर दिया।
साथ ही केंद्र सरकार समेत अन्य को निर्देश दिया कि याची जवान को सेना से डिस्चार्ज किए जाने की तारीख से विकलांगता पेंशन का मय एरियर भुगतान किया जाए।