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UP POLITICS: आखिर क्यों अलग हुईं दारा सिंह और सपा की राहें, बेटी के विवाह तक में भी नहीं पहुंचे थे अखिलेश
Sun, 16 Jul 2023 08:37 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 16 Jul 2023 08:37 AM IST
सार
पूर्व मंत्री दारा सिंह चौहान और समाजवादी पार्टी के बीच समय के साथ खाई बढ़ती गई। दारा सिंह चौहान चुनाव जीतने के बाद भी महत्व न मिलने से सपा में साइडलाइन नजर आने लगे थे। एक अन्य पूर्व मंत्री भी भाजपा में जाने की जुगत में है। कई और नेता भी किनारा कर चुके हैं। पूर्व मंत्री का सरकार न बनने से सपा से मोह भंग हो गया था।
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अखिलेश यादव के साथ दारा सिंह चौहान(फाइल फोटो)
- फोटो : सोशल मीडिया।
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विस्तार
पूर्व मंत्री दारा सिंह चौहान के सपा से भाजपा की ओर वापसी के कदम बढ़ाने की कई वजह हैं। लेकिन, पार्टी में उम्मीद के हिसाब से महत्व मिलने की जगह उपेक्षा ने इसमें सबसे बड़ी भूमिका अदा की। अब चौहान के अगले कदम पर लोगों की निगाहें टिकी हैं। जानकार बताते हैं कि भाजपा सरकार से मंत्री पद छोड़कर सपा में शामिल होने वाले चौहान सपा सरकार न बनने से वैसे ही निराश थे। मगर पार्टी में उम्मीद के हिसाब से महत्व न मिलने से सत्ता के साथ वापसी की तैयारी जल्दी हो गई।
विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा सरकार के तीन मंत्री दारा सिंह चौहान, स्वामी प्रसाद मौर्य और धर्म सिंह सैनी सपा में शामिल हुए थे। सपा ने इन तीनों नेताओं को विधानसभा चुनाव में टिकट दिए, लेकिन सिर्फ चौहान ही जीते। पर, सपा ने चौहान को न तो संगठन में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी और न ही विधानसभा में ही उन्हें कोई महत्वपूर्ण दायित्व दिया।
एक तरह से पार्टी ने पूरी तरह से उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया था। दूसरी ओर स्वामी प्रसाद मौर्य चुनाव हार गए तो सपा ने न सिर्फ उन्हें राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया बल्कि उन्हें एमएलसी भी बनाया। स्थिति ये हो गई कि चौहान ने निजी कार्यक्रमों तक में पार्टी के प्रमुख लोगों से दूरी बना ली। सपा ने इस ओर ध्यान नहीं दिया और चौहान जीती सीट से त्यागपत्र देकर भाजपा में वापसी की ओर बढ़ गए।
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विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा सरकार के तीन मंत्री दारा सिंह चौहान, स्वामी प्रसाद मौर्य और धर्म सिंह सैनी सपा में शामिल हुए थे। सपा ने इन तीनों नेताओं को विधानसभा चुनाव में टिकट दिए, लेकिन सिर्फ चौहान ही जीते। पर, सपा ने चौहान को न तो संगठन में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी और न ही विधानसभा में ही उन्हें कोई महत्वपूर्ण दायित्व दिया।
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एक तरह से पार्टी ने पूरी तरह से उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया था। दूसरी ओर स्वामी प्रसाद मौर्य चुनाव हार गए तो सपा ने न सिर्फ उन्हें राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया बल्कि उन्हें एमएलसी भी बनाया। स्थिति ये हो गई कि चौहान ने निजी कार्यक्रमों तक में पार्टी के प्रमुख लोगों से दूरी बना ली। सपा ने इस ओर ध्यान नहीं दिया और चौहान जीती सीट से त्यागपत्र देकर भाजपा में वापसी की ओर बढ़ गए।
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हालांकि, दारा सिंह चौहान ने इस्तीफा देने के बाद भी अभी तक सार्वजनिक रूप से सपा से नाराजगी को लेकर कोई बयान नहीं दिया है। हालांकि, चौहान ने जब भाजपा छोड़ी थी, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सार्वजनिक रूप से उनसे पार्टी में ही बने रहने की अपील की थी। कहा था कि उनके समाज के हित भाजपा में ही सुरक्षित हैं।
एक और पूर्व मंत्री भी भाजपा में जाने की जुगत में
बताते हैं कि भाजपा से सपा में शामिल हुए एक और पूर्व मंत्री भी भाजपा में जाने की जुगत में लगे हैं। शिवपाल यादव की प्रसपा के सपा में विलय के बाद कई नेता पार्टी छोड़ चुके हैं। इनमें प्रसपा के प्रमुख महासचिव रहे अजय त्रिपाठी भाजपा में जा चुके हैं, जबकि सपा के राष्ट्रीय सचिव रहे नवाब अली अकबर ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। ये दोनों नेता प्रसपा में शिवपाल के नजदीकी माने जाते थे।
बताते हैं कि भाजपा से सपा में शामिल हुए एक और पूर्व मंत्री भी भाजपा में जाने की जुगत में लगे हैं। शिवपाल यादव की प्रसपा के सपा में विलय के बाद कई नेता पार्टी छोड़ चुके हैं। इनमें प्रसपा के प्रमुख महासचिव रहे अजय त्रिपाठी भाजपा में जा चुके हैं, जबकि सपा के राष्ट्रीय सचिव रहे नवाब अली अकबर ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। ये दोनों नेता प्रसपा में शिवपाल के नजदीकी माने जाते थे।
पुत्री के विवाह में नहीं पहुंचे थे अखिलेश
जानकार बताते हैं कि इसी वर्ष फरवरी में दारा सिंह चौहान के बेटी की शादी थी। इसमें सपा मुखिया अखिलेश यादव नहीं पहुंचे थे। हालांकि सपा सूत्रों का कहना है कि चुनाव जीतने के बाद दारा सिंह चौहान ने पार्टी से दूरी बना ली। उनकी पुत्री के विवाह समारोह में सपा से ज्यादा भाजपा के नेता आए, तभी पार्टी के लोगों को दारा सिंह चौहान के इरादों का पता चल गया था।
जानकार बताते हैं कि इसी वर्ष फरवरी में दारा सिंह चौहान के बेटी की शादी थी। इसमें सपा मुखिया अखिलेश यादव नहीं पहुंचे थे। हालांकि सपा सूत्रों का कहना है कि चुनाव जीतने के बाद दारा सिंह चौहान ने पार्टी से दूरी बना ली। उनकी पुत्री के विवाह समारोह में सपा से ज्यादा भाजपा के नेता आए, तभी पार्टी के लोगों को दारा सिंह चौहान के इरादों का पता चल गया था।
इस शादी में ऐन वक्त पर निमंत्रण मिलने के कारण सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव शामिल नहीं हो पाए थे। सपा नेताओं का कहना है कि विधानसभा चुनाव के बाद सपा की सरकार बनने का गणित लगाते हुए चौहान सपा में शामिल हुए थे और जब सरकार नहीं बनी तो वह फिर भाजपा में शामिल होने की जुगत में लग गए।
क्या होगा अगला कदम
सूत्रों का कहना है कि दारा सिंह चौहान को भाजपा लोकसभा चुनाव भी लड़ा सकती है। लेकिन, ज्यादा संभावना इस बात की है कि उनके इस्तीफे से रिक्त हुई सीट पर उन्हें पुनः भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ाया जाए। जीतकर आने पर प्रदेश मंत्रिमंडल में फिर शामिल कर लिया जाए। बताया जाता है कि दारा सिंह चौहान भी इस दूसरे विकल्प को ही ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि दारा सिंह चौहान को भाजपा लोकसभा चुनाव भी लड़ा सकती है। लेकिन, ज्यादा संभावना इस बात की है कि उनके इस्तीफे से रिक्त हुई सीट पर उन्हें पुनः भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ाया जाए। जीतकर आने पर प्रदेश मंत्रिमंडल में फिर शामिल कर लिया जाए। बताया जाता है कि दारा सिंह चौहान भी इस दूसरे विकल्प को ही ज्यादा पसंद कर रहे हैं।