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किसान नेता को हाईकोर्ट से राहत नहीं

Tue, 23 Mar 2021 01:46 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 23 Mar 2021 01:46 AM IST
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former leader has no relief from court
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने लंबे आपराधिक इतिहास के चलते गुंडा घोषित कर जिला बदर किए गए तारा सिंह बिष्ट को कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि जिला बदर करने के पुलिस आयुक्त व डिवीजनल कमिश्नर के आदेश में कुछ भी अविधिक नहीं है। याची ने एक ही प्रकार की जमीन कब्जाने वाले अपराध किए हैं और गवाह भयवश गवाही देने नहीं पहुंचते। याची एक लैंड शॉर्क है। याची के विरुद्ध पर्याप्त सामग्री है, जिससे उसे गुंडा कहा जा सकता है।
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यह आदेश जस्टिस दिनेश कुमार सिंह की बेंच ने तारा सिंह बिष्ट की याचिका को खारिज करते हुए पारित किया। याची के खिलाफ लखनऊ पुलिस ने 15 अक्टूबर, 2020 को गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए छह माह के लिए लखनऊ की सीमा से जिला बदर कर दिया। याची ने इसके खिलाफ डिवीजनल कमिश्नर के समक्ष अपील दाखिल की जो 21 अक्टूबर, 2020 को खारिज हो गई। इसके बाद याची की ओर से कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए दलील गई कि वह भारतीय किसान यूनियन अवध (राजू गुट) का प्रवक्ता है और उसे राजनीतिक कारणों से फंसाया गया है।
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सरकारी वकील ने याचिका का विरोध करते हुए दलील दी कि याची के विरुद्ध 24 आपराधिक मुकदमे हैं। वह गरीब व कमजोर तबके के लोगों की जमीनें धोखाधड़ी व बल पूर्वक हड़प लेता है। याची का समाज में इतना भय है कि उसके खिलाफ कोई गवाही नहीं देता। कोर्ट ने भी पाया कि याची 11 मुकदमों में बरी हुआ है लेकिन उसके बरी होने का आधार गवाहों का पक्षद्रोही हो जाना है। कोर्ट ने सुनवाई के बाद याचिका खारिज कर दी।
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