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उप्र शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र, मंदिरों का जिक्र

Mon, 28 Sep 2020 06:46 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Mon, 28 Sep 2020 06:46 PM IST
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Former chairman of UP Shia Central Waqf Board wrote to the Prime Minister, mentioning temples
वसीम रिजवी - फोटो : amar ujala
उप्र शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर प्लेसेस ऑफ वरशिप एक्ट 1991 को समाप्त करने कि की मांग की है। सोमवार को लिखे गए पत्र में उन्होंने देश की कई धार्मिक स्थानों की सूची भेजी है। रिजवी के मुताबिक पूर्व में ये मंदिर तोड़कर मुगलकाल में मस्जिद बनाए गए। इनमें मथुरा के केशव देव मन्दिर के अलावा देश के अन्य ऐसे स्थानों का भी जिक्र है।
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पत्र जारी कर वसीम रिजवी ने कहा कि 90 के दशक में कांग्रेस ने कट्टरपंथी संगठनों को खुश करने के लिए ये एक्ट बनाया था, लेकिन अब हिंदुओ की धार्मिक सम्पतियां उनको वापस सौंपा जाना असली न्याय होगा।  पीएम को लिखे पत्र में जिक्र किया है कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर का मामला माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा निस्तारित हो चुका है। फिर भी कई ऐसे धर्म स्थान बाकी हैं, जो कांग्रेस सरकार के समय बनाये गये उस एक्ट के तहत आते हैं।
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पीएम मोदी को लिखे पत्र में मथुरा श्रीकृष्ण जन्म मन्दिर केशवदेव मन्दिर, वाराणसी काशी विश्वनाथ मंदिर, गुजरात बटना का रुद्र महालया मन्दिर, अहमदाबाद भद्रकाली मंदिर, वेस्ट बंगाल पंडुआ अदिना मस्जिद, मप्र विदिशा विजया मंदिर, दिल्ली कुतुबमीनार मस्जिद कुवतुल इस्लाम का जिक्र किया गया है। कहा गया है ये आज भी उक्त एक्ट के तहत हैं। पत्र में उन्होंने पीएम मोदी से अनुरोध किया है द प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट 1991 को समाप्त कर हिंदुओं के प्राचीन पवित्र मंदिरों को जिन्हें मुगलों ने तोड़कर मस्जिद बनवाई हैं। मस्जिदों को पवित्र स्थान से हटा कर, पवित्र मंदिरों को स्थापित करने हेतु अधिनियम बनाए या ऐसी कोई भी उच्च स्तरीय समिति बनाए जो बातचीत के माध्यम से उक्त समस्त प्राचीन मंदिरों को पुन: स्थापित करा सकें।
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