फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   For pregnant women admitted to the ICU, the heart is the greatest source of pain.

Lucknow News: आईसीयू में भर्ती गर्भवती महिलाओं को सबसे ज्यादा दर्द देता है दिल

Mon, 19 Oct 2026 01:39 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 19 Oct 2026 01:39 AM IST
विज्ञापन
For pregnant women admitted to the ICU, the heart is the greatest source of pain.
प्रतीकात्मक।
सचिन त्रिपाठी
विज्ञापन

लखनऊ। गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचने वाली गर्भवती और प्रसव के बाद की महिलाओं के लिए सबसे बड़ा खतरा दिल संबंधी समस्याएं होती हैं। केजीएमयू में गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती गर्भवती महिलाओं पर हुए अध्ययन में यह बात सामने आई है। इसे जर्नल ऑफ फैमिली मेडिसिन एंड प्राइमरी केयर में अक्तूबर के अंक में स्थान मिला है।
यह अध्ययन डॉ. मोनिका अग्रवाल, डॉ. कथिपी नेलिया, डॉ. अरमीन अहमद, डॉ. सुजाता देव और डॉ. एसपी जैसवार ने किया है। अध्ययन में 125 गर्भवतियों और प्रसव के 42 दिनों के भीतर की महिलाओं को शामिल किया गया। आईसीयू में भर्ती होने के समय और उपचार के दौरान इन महिलाओं के छह प्रमुख अंगों हृदय, फेफड़े, लिवर, गुर्दे, रक्त जमने की प्रक्रिया और तंत्रिका तंत्र की कार्यक्षमता का आकलन किया गया। इसमें पाया गया कि हृदय संबंधी गड़बड़ी मातृ मृत्यु के जोखिम का अनुमान लगाने में सबसे अधिक प्रभावी रही।
विज्ञापन

हृदय के बाद लिवर और फेफड़ों की गड़बड़ी अधिक गंभीर
अध्ययन में अंगों की कार्यक्षमता का आकलन करने के लिए सीक्वेंशनल ऑर्गन फेल्योर एसेसमेंट (सोफा) स्कोर का इस्तेमाल किया गया। यह स्कोर बताता है कि शरीर के प्रमुख अंग कितनी अच्छी तरह काम कर रहे हैं और उनमें कितनी गड़बड़ी है। हृदय संबंधी गड़बड़ी की मृत्यु का अनुमान लगाने की क्षमता सबसे अधिक रही। इसके बाद लिवर और श्वसन तंत्र की गड़बड़ी का स्थान रहा। गुर्दे और रक्त संबंधी गड़बड़ियां भी मृत्यु के जोखिम से जुड़ी मिलीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

जानें, क्यों अहम है यह अध्ययन
डॉ. सुजाता देव के अनुसार, आईसीयू में भर्ती महिलाओं की सामान्य गंभीरता देखने के बजाय अलग-अलग अंगों की कार्यक्षमता का आकलन करना अहम साबित हो सकता है। इससे अधिक जोखिम वाली महिलाओं की पहचान करने और समय रहते उपचार की प्राथमिकताएं तय करने में मदद मिल सकती है। सीमित संसाधन वाले अस्पतालों में इसका उपयोग और भी अहम साबित होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed