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Lucknow News: आईसीयू में भर्ती गर्भवती महिलाओं को सबसे ज्यादा दर्द देता है दिल
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प्रतीकात्मक।
सचिन त्रिपाठी
लखनऊ। गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचने वाली गर्भवती और प्रसव के बाद की महिलाओं के लिए सबसे बड़ा खतरा दिल संबंधी समस्याएं होती हैं। केजीएमयू में गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती गर्भवती महिलाओं पर हुए अध्ययन में यह बात सामने आई है। इसे जर्नल ऑफ फैमिली मेडिसिन एंड प्राइमरी केयर में अक्तूबर के अंक में स्थान मिला है।
यह अध्ययन डॉ. मोनिका अग्रवाल, डॉ. कथिपी नेलिया, डॉ. अरमीन अहमद, डॉ. सुजाता देव और डॉ. एसपी जैसवार ने किया है। अध्ययन में 125 गर्भवतियों और प्रसव के 42 दिनों के भीतर की महिलाओं को शामिल किया गया। आईसीयू में भर्ती होने के समय और उपचार के दौरान इन महिलाओं के छह प्रमुख अंगों हृदय, फेफड़े, लिवर, गुर्दे, रक्त जमने की प्रक्रिया और तंत्रिका तंत्र की कार्यक्षमता का आकलन किया गया। इसमें पाया गया कि हृदय संबंधी गड़बड़ी मातृ मृत्यु के जोखिम का अनुमान लगाने में सबसे अधिक प्रभावी रही।
हृदय के बाद लिवर और फेफड़ों की गड़बड़ी अधिक गंभीर
अध्ययन में अंगों की कार्यक्षमता का आकलन करने के लिए सीक्वेंशनल ऑर्गन फेल्योर एसेसमेंट (सोफा) स्कोर का इस्तेमाल किया गया। यह स्कोर बताता है कि शरीर के प्रमुख अंग कितनी अच्छी तरह काम कर रहे हैं और उनमें कितनी गड़बड़ी है। हृदय संबंधी गड़बड़ी की मृत्यु का अनुमान लगाने की क्षमता सबसे अधिक रही। इसके बाद लिवर और श्वसन तंत्र की गड़बड़ी का स्थान रहा। गुर्दे और रक्त संबंधी गड़बड़ियां भी मृत्यु के जोखिम से जुड़ी मिलीं।
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जानें, क्यों अहम है यह अध्ययन
डॉ. सुजाता देव के अनुसार, आईसीयू में भर्ती महिलाओं की सामान्य गंभीरता देखने के बजाय अलग-अलग अंगों की कार्यक्षमता का आकलन करना अहम साबित हो सकता है। इससे अधिक जोखिम वाली महिलाओं की पहचान करने और समय रहते उपचार की प्राथमिकताएं तय करने में मदद मिल सकती है। सीमित संसाधन वाले अस्पतालों में इसका उपयोग और भी अहम साबित होगा।
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लखनऊ। गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचने वाली गर्भवती और प्रसव के बाद की महिलाओं के लिए सबसे बड़ा खतरा दिल संबंधी समस्याएं होती हैं। केजीएमयू में गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती गर्भवती महिलाओं पर हुए अध्ययन में यह बात सामने आई है। इसे जर्नल ऑफ फैमिली मेडिसिन एंड प्राइमरी केयर में अक्तूबर के अंक में स्थान मिला है।
यह अध्ययन डॉ. मोनिका अग्रवाल, डॉ. कथिपी नेलिया, डॉ. अरमीन अहमद, डॉ. सुजाता देव और डॉ. एसपी जैसवार ने किया है। अध्ययन में 125 गर्भवतियों और प्रसव के 42 दिनों के भीतर की महिलाओं को शामिल किया गया। आईसीयू में भर्ती होने के समय और उपचार के दौरान इन महिलाओं के छह प्रमुख अंगों हृदय, फेफड़े, लिवर, गुर्दे, रक्त जमने की प्रक्रिया और तंत्रिका तंत्र की कार्यक्षमता का आकलन किया गया। इसमें पाया गया कि हृदय संबंधी गड़बड़ी मातृ मृत्यु के जोखिम का अनुमान लगाने में सबसे अधिक प्रभावी रही।
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हृदय के बाद लिवर और फेफड़ों की गड़बड़ी अधिक गंभीर
अध्ययन में अंगों की कार्यक्षमता का आकलन करने के लिए सीक्वेंशनल ऑर्गन फेल्योर एसेसमेंट (सोफा) स्कोर का इस्तेमाल किया गया। यह स्कोर बताता है कि शरीर के प्रमुख अंग कितनी अच्छी तरह काम कर रहे हैं और उनमें कितनी गड़बड़ी है। हृदय संबंधी गड़बड़ी की मृत्यु का अनुमान लगाने की क्षमता सबसे अधिक रही। इसके बाद लिवर और श्वसन तंत्र की गड़बड़ी का स्थान रहा। गुर्दे और रक्त संबंधी गड़बड़ियां भी मृत्यु के जोखिम से जुड़ी मिलीं।
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डॉ. सुजाता देव के अनुसार, आईसीयू में भर्ती महिलाओं की सामान्य गंभीरता देखने के बजाय अलग-अलग अंगों की कार्यक्षमता का आकलन करना अहम साबित हो सकता है। इससे अधिक जोखिम वाली महिलाओं की पहचान करने और समय रहते उपचार की प्राथमिकताएं तय करने में मदद मिल सकती है। सीमित संसाधन वाले अस्पतालों में इसका उपयोग और भी अहम साबित होगा।